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तपिश से राहत के लिए पहाड़ों का रुख, छुट्टियां मनाने 20 करोड़ तक खर्च करेंगे जैसाणवासी

अप्रेल महीने के आखिरी सप्ताह में ही धोरां धरती तपने लगी है और पारा 45 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में आगामी दिनों में होने वाली गर्मी की छुट्टियों में यहां के लोग गर्मी से फौरी राहत की तलाश में पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं।

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अप्रेल महीने के आखिरी सप्ताह में ही धोरां धरती तपने लगी है और पारा 45 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में आगामी दिनों में होने वाली गर्मी की छुट्टियों में यहां के लोग गर्मी से फौरी राहत की तलाश में पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। मई और जून के महीनों में बड़ी संख्या में परिवार, युवाओं के समूह उत्तर भारत के ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा पर निकलने की योजना बड़े पैमाने पर बना रहे हैं। अनुमान है कि इस सीजन में जैसलमेर क्षेत्र से ही करीब 20 करोड़ रुपए पर्यटन पर खर्च होंगे, जिससे ट्रेवल उद्योग में खासा उत्साह देखा जा रहा है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से परेशान लोग ठंडे मौसम का आनंद लेने के लिए हिमालयी राज्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इनमें शिमला, मनाली, नैनीताल, मसूरी और कश्मीर के अलावा उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम जैसे स्थान पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभर रहे हैं। इन जगहों पर तापमान अपेक्षाकृत कम होने के कारण लोग यहां सुकून भरे पल बिताने के लिए आकर्षित हो रहे हैं।

मौसम से राहत के साथ मानसिक सुकून

जानकारों का मानना है कि गर्मी से राहत के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती है। यही कारण है कि अब लोग सिर्फ घूमने-फिरने के लिए ही नहीं, बल्कि तनाव कम करने और बेहतर स्वास्थ्य के उद्देश्य से भी इन स्थानों का चयन कर रहे हैं। पारिवारिक अवकाश के रूप में भी यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जहां पूरा परिवार एक साथ समय बिताने के लिए यात्रा पर निकल रहा है।

ट्रेवल एजेंसियों में बुकिंग का उछाल

स्थानीय ट्रेवल एजेंसियों के अनुसार इस बार पूछताछ और बुकिंग में पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ोतरी का रुख है। ट्रेवल एजेंट श्रेय भाटिया ने बताया कि होटल, बस, ट्रेन और फ्लाइट की बुकिंग तेजी से भर रही हैं। फ्लाइट का किराया ज्यादातर सेक्टरों में बढ़ गया है। पसंदीदा स्थानों के लिए जाने वाली टे्रनों में हमेशा की भांति हाउसफुल के हालात हैं। कई एजेंसियों ने विशेष समर पैकेज भी तैयार किए हैं, जिनमें आवास, भोजन और घूमने की सुविधाएं शामिल हैं। खासकर युवाओं और नवविवाहित जोड़ों में हनीमून और एडवेंचर ट्रिप्स का क्रेज भी बढ़ा है। पिछले वर्ष कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए भयावह आतंकी हमले का असर आज भी कायम है और पारिवारिक पर्यटक कश्मीर के प्रति आशंकित हैं।

सदाबहार है धार्मिक पर्यटन

-जैसलमेर से हजारों की तादाद में मई-जून के महीनों में लोग धार्मिक पर्यटन पर निकलने की तैयारी में हैं।

  • सूची में सबसे ऊपर उत्तराखंड के चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा है।

-स्थानीय टे्रवल एजेंट अखिल भाटिया के अनुसार इनके अलावा मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित महाकाल मंदिर, उत्तराखंड के ही हरिद्वार और ऋषिकेश की यात्रा को लेकर भी पूछताछ बड़े पैमाने पर की जा रही है।
-विगत कुछ वर्षों से जैसलमेर के लोग विदेश भ्रमण पर भी जाने लगे हैं। इस बार भू-राजनीतिक कारणों से दुबई की बजाय लोग थाईलैंड, वियतनाम, कम्बोडिया आदि देशों की यात्रा करने के बारे में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

  • बढ़ते ट्रेंड का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी देखा जा रहा है। एक ओर जहां ट्रेवल एजेंसियों और टूर ऑपरेटरों को अच्छा व्यवसाय मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवहन और होटल उद्योग भी लाभान्वित हो रहा है।