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पशुपालन व डेयरी प्रबंधन को लेकर दिया प्रशिक्षण

पशुपालन व डेयरी प्रबंधन को लेकर दिया प्रशिक्षण

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पशुपालन व डेयरी प्रबंधन को लेकर दिया प्रशिक्षण

पशुपालन व डेयरी प्रबंधन को लेकर दिया प्रशिक्षण

दिया प्रशिक्षण
पोकरण. कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार मे मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय भारत सरकार की ओर से लाभकारी पशुपालन एवं डेयरी प्रबंधन से किसानों का क्षमता संवद्र्धन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का समापन किया गया, जिसमें दुधारु पशुओं में परजीवियों के प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। शिविर में ऊजला, ताड़ाना, सनावड़ा, केलावा, महेशों की ढाणी, बड़ली नाथूसर आदि गांवों के 40 किसानों व पशुपालकों ने भाग लिया। शिविर के समापन के मौके पर वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ.बलवीरसिंह ने बताया कि डेयरी व्यवसाय की सफलता दुधारू पशुओं पर निर्भर करती है। उन्होंने परजीवियों को रहने व खाने के लिए पशु पर निर्भर रहने एवं इससे ग्रस्त दुधारू पशुओं में दूध देने की क्षमता कम होने की जानकारी दी। उन्होंने पशुओं के रख रखाव, स्वास्थ्य, टीकाकरण आदि के बारे में बताया। पशुपालन वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण प्रभारी डॉ.रामनिवास ढाका ने बताया कि दुधारू पशुओं में आंतरिक परजीवी का प्रकोप देशी पशुओं में कम होता है, लेकिन संकर नस्ल के बछड़े, बछिया में अधिक होता है। पशुओं में 90 प्रतिशत बाह्य परजीवी उस स्थान पर होते है, जहां पशुओं को रखा जाता है। 10 प्रतिशत परजीवी ही पशु की चमड़ी पर होते है, जो दिखाई देते है। इसलिए पशुशाला का उपचार आवश्यक होता है। उन्होंने पशुशाला के उपचार की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। साथ ही परजीवियों से बचाव के बारे में बताया। शस्य वैज्ञानिक डॉ.केजी व्यास ने पशुशालला के चारोंं तरफ खरपतवार नियंत्रण एवं जलवायु उपयुक्त पौधे लगाने के बारे में जानकारी दी। प्रसार वैज्ञानिक सुनील शर्मा ने भी विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया।