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सब्जी उत्पादन पर दिया प्रशिक्षण

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सब्जी उत्पादन पर दिया प्रशिक्षण

सब्जी उत्पादन पर दिया प्रशिक्षण

पोकरण. कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से कस्बे के मदागण बास में किचन गार्डन में मौसमी सब्जी उत्पादन विषय पर मंगलवार को असंस्थागत प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। गृह वैज्ञानिक डॉ.चारु शर्मा ने महिलाओं को घर में खाली पड़ी जगह पर किचन गार्डन बनाकर उसमें पौष्टिक एवं जैविक सब्जी लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए दैनिक आहार में संतुलित पोषण का होना जरूरी बताया। मौसमी सब्जियां इसी संतुलन को बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते है। क्योंकि इनमें विटामिन, खनिज लवण, कार्बोहाइड्रेट, वसा व प्रोटीन के अच्छे स्रोत होते है। किचन गार्डन के लिए घर के चारों तरफ उपलब्ध भूमि पर घर के साधनों उपलब्ध भूमि में रसोई व नहाने के पानी का समुचित उपयोग करते हुए स्वयं एवं परिवार के सदस्यों की देखरेख व प्रबंधन में स्वास्थ्यवर्धक व गुणवत्तायुक्त मनपसंद सब्जियों, फलों व फूलों का उत्पादन कर दैनिक आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है। सब्जियों को मौसम के हिसाब से लगाया जाना चाहिए। महिलाएं खरीफ के मौसम में विभिन्न सब्जियां लोबिया, तोरई, गिल्की, भिंडी, अरबी, करेला, लौकी, ग्वार, मिर्च टमाटर, खीरा आदि को जून-जुलाई में लगा सकती है। रबी मौसम में सब्जियां बैंगन, टमाटर, मिर्च, आलू, मेथी प्याज, लहसून, धनिया, पालक, गोभी, गाजर, मटर आदि को सितंबर-नवम्बर माह में लगाया जाता है। जायद मौसम में सब्जियां कद्दूवर्गीय सब्जियां, भिंडी आदि को फरवरी-मार्च में बोया जाता है। उन्होंने बताया कि जड़ वाली सब्जियों को मेड़ों पर उगावें एवं फसल चक्र के सिद्धांतों के अनुसार सब्जियों का चुनाव करें, ताकि साल भर इनकी उपलब्धता बनी रहे। किचन गार्डन में समय-समय पर निराई-गुड़ाई एवं सब्जियों, फलों व फूलों के तैयार होने पर तुड़ाई करते रहे। डॉ.रामनिवास ढाका ने बताया कि सब्जी बगीचा के एक किनारे पर खाद का गड्ढ़ा बनाए। जिससे घर का कचरा, पौधों का अवशेष डाला जा सके, जो बाद में सड़कर खाद के रूप में प्रयोग किया जा सके। उन्होंने कीटनाशकों व रोगनाशक रसायनों का प्रयोग कम से कम करने की बात कही।