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हटा तारीखों का जाल, पूरा हुआ सात वर्ष पुराना प्रोजेक्ट

-सोनू-हमीरा रेल लाइन पर अब दौड़ रही मालगाडिय़ां-वर्ष 2013 में मिली थी रेल लाइन को मंजूरी-सोनू से लाइम स्टोन ट्रकों के जरिए रखा जाता था जैसलमेर रेलवे स्टेशन

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हटा तारीखों का जाल, पूरा हुआ सात वर्ष पुराना प्रोजेक्ट

हटा तारीखों का जाल, पूरा हुआ सात वर्ष पुराना प्रोजेक्ट

जैसलमेर. अब तक तारीखों में उलझा रहा करीब सात वर्ष पुराना करीब 400 करोड़ का प्रोजेक्ट आखिर पूरा हुआ। अब लाइन स्टोन की नियमित ढुलाई सोनू स्टेशन से की जाएगी। जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर लाइन स्टोन के लगने वाले ढेर अब बीते जमाने की बात हो गए हैं तथा क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण भी बंद हो जाएगा और जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर सांस लेना आसान हो सकेगा। गौरतलब है कि गत 20 दिसंबर २0१९ को करीब ५६ किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन पर इंजन ट्रायल हुआ, जो १०० किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ा। ट्रायल पूर्ण होने के करीब 8 माह बाद सरहदी जैसलमेर जिले के सोनू गांव से सीधे मालगाड़ी के जरिए लाइम स्टोन देश के विभिन्न हिस्सों में भेजने की कवायद पूर्ण हुई। सोनू से हमीरा तक बिछाई गई नई रेल लाइन पर पहली बार मालगाड़ी दौड़ी। इस मालगाड़ी में रखा लाइम स्टोन यहां से 1600 से ज्यादा किलोमीटर की दूरी पर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य के भिलाई शहर भेजा गया। गौरतलब है कि पूर्व में आरएसएमएमएल का लाइम स्टोन वहां से ट्रकों में लोड होकर जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर पहुंचता था तथा यहां से बाहरी राज्यों के लिए मालगाडिय़ों में भरकर भेजा जाता। अब सोनू से हमीरा गांव तक नई रेल लाइन बिछ जाने के बाद संयंत्र से सोनू गांव तक ही ट्रकों में माल भरकर लाया जाएगा और वहां से सीधे गंतव्य स्थान के लिए भेज दिया जाएगा।
इंतजार के 7 वर्ष: यूं चला घटनाक्रम
-वर्ष 2013 के बजट में सोनू-हमीरा रेल लाइन को मंजूरी मिली
-वर्ष 2014 में आरएसएमएम ने योजना की आधी राशि रेलवे को जमा करवा दी।
-शुरूआत में रेल लाइन के सर्वे कार्य में देरी हुई, यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।
-जीएसटी लागू होने के चलते एक बार ठेेकेदार ने काम आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। वह मामला सुलट गया।
-लाइन के कुछ हिस्से में जमीन अधिग्रहण का मसला खड़ा हो गया, जो कुछ महीनों बाद जाकर थमा।
-प्रोजेक्ट के तहत अर्थवर्क कार्य करने के बाद पुलिया व पिलर निर्माण का कार्य पूर्ण हुए।
-हमीरा-सोनू रेलवे लाइन का निर्माण कार्य गत दिसंबर २०१९ में ही पूरा हो गया था।
-२० दिसंबर २०१९ को आखिरकार सोनू-हमीरा रेल लाइन पूर्ण व इंजन ट्राइल।
-रेलवे की उच्च स्तरीय टीम ने निरीक्षण में रेल लाइन को उपयुक्त पाया था।
-26 अगस्त 2020 को सोनू स्टेशन से 58 डिब्बों के साथ पहली गाड़ी रवाना हुई।

अब सांस लेना हुआ आसान
अब तक सोनू से लाइम स्टोन ट्रकों के जरिए जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर लाकर रखा जाता था, जिसे रेल कंटेनरों में भरकर बाहर भिजवाया जाता था। यहां रेलवे स्टेशन पर डस्ट पोल्युशन की समस्या लंबे अरसे से बनी हुई थी, जिससे यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों व अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा था। सांस संबंधी बीमारियां फैलने की आशंका थी। लाइम स्टोन को कंटेनरों में भरते समय पूरे वातावरण में पाउडर सरीखी बारीक धूल जमा होने से स्टेशन पर सांस लेना दूभर हो रहा था।

तब और अब
पूर्व में आरएसएमएमएल का लाइम स्टोन ट्रकों में लोड होकर जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर पहुंचता था तथा यहां से बाहरी राज्यों के लिए मालगाडिय़ों में भरकर भेजा जाता। अब होगाअब सोनू से हमीरा गांव तक नई रेल लाइन बिछ जाने के बाद संयंत्र से सोनू गांव तक ही ट्रकों में माल भरकर लाया जाएगा और वहां से सीधे गंतव्य स्थान के लिए भेज दिया जाएगा।

फैक्ट फाइल
-56 किलोमीटर बिछी सोनू-हमीरा रेल लाइन, 64 ब्रिज बने
-2013के रेल बजट में कार्य हुआ स्वीकृत
-54 करोड़ रेलवे ने दी थी नई रेल लाइन को स्वीकृति
-2013 में मिली थी रेल लाइन को मंजूरी
-400 करोड़ के करीब लागत का है प्रोजेक्ट
-7 वर्ष बाद थमा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का इंतजार
-58 डिब्बों के साथ सोनू स्टेशन से रवाना हुई पहली गाड़ी
-160० किलोमीटर दूरी तय कर लाइम स्टोन लेकर भिलाई पहुंची पहली मालगाड़ी

अब होगी नियमित ढुलाई
सोनू स्टेशन से 58 डिब्बों के साथ पहली गाड़ी रवाना हुई। अब लाइन स्टोन की नियमित ढुलाई सोनू स्टेशन से की जाएगी।
-एसएस गहलोत, अधिशासी अभियंता उत्तर-पश्चिम रेलवे, जैसलमेर