
होली पर परम्पराओं, उल्लास और उमंग की बहेगी त्रिवेणी
जैसलमेर. स्वर्णनगरी समेत समूचे सीमांत जैसलमेर जिले में सोमवार और मंगलवार को दो दिवसीय होली पर्व को लेकर मस्ती और उल्लास हर कहीं छाया हुआ है। शहर-गांव और अमीर-गरीब से लेकर समाज में व्याप्त हर किस्म का श्रेणीभेद होली के मौके पर मिट जाने को तैयार है। लोक-जीवन में व्याप्त समस्त राग-रंगों की प्रत्यक्ष उपस्थिति होली के दो दिनों के दौरान नजर आएगी। रविवार को दिनभर बाजारों में रंग-गुलाल से लेकर खाने-पीने के सामान की खरीदारी में लोग उमड़े रहे। वहीं चारों ओर होली के गीतों और भजनों की धूम मची है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति की सुदीर्घ परम्परा वाले जैसलमेर में मथुरा, वृंदावन, गोकुल और बरसाना की भांति मंदिरों में भक्ति भाव से ओत प्रोत होकर अबीर-गुलाल उड़ाकर भगवान के साथ फाग खेला जाता है।
गैरों की मस्ती में डूबे लोग
गत एकादशी के दिन से लक्ष्मीनाथ मंदिर में फाग खेलने के बाद पुष्करणा समाज की विभिन्न जातियों की गैरों ने होली की मस्ती को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। अन्य समाजों के लोग भी अपने तौर पर होली स्नेह मिलन जैसे कार्यक्रम कर रहे हैं। पिछले दो दिनों के दौरान ये गैरें सजातीय भाई-बंधुओं के शहर भर में अवस्थित घरों तक पहुंची तो पूरा शहर एक तरह से नाप लिया गया। वहीं मरुप्रदेश के लोक जीवन में विभिन्न पर्वों, त्योहारों और मेलों की भांति होली पर गीत-संगीत की सरिता प्रवाहित होती रही। होली की पूर्व संध्या पर रविवार को पुष्करणा ब्राह्मणों की परंपरागत गोठों का आयोजन हुआ। गड़ीसर तालाब की पाल पर स्थित विभिन्न बगेचियों में शाम ढलने से देर रात तक बड़ी तादाद में स्त्री-पुरुषों के साथ बच्चों ने इन सामूहिक गोठों में हर्षोल्लास के साथ शिरकत की। गड़ीसर तालाब की पाल पर व्यास, पुरोहित, बिस्सा व वृहतेश्वरी समाज की बगेचियों में सुबह से ही पकवान बनाने वाले रसोइयों के साथ व्यवस्थाओं में जुटे लोग पहुंच गए। गोठों के कारण गड़ीसर तालाब क्षेत्र में देर रात तक चहल-पहल रही। लोगों ने एक-दूसरे को होली की अग्रिम शुभकामनाएं दी।
आज होगा होलिका दहन
जैसलमेर में प्रमुख तौर पर होली और धुलंडी का पर्व क्रमश: सोम व मंगलवार को मनाया जा रहा है। ऐसे में सोमवार को नगरभर सहित ग्रामीण इलाकों में शुभ मुहूर्त में होलिका दहन के कार्यक्रम होंगे। गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में होली-धुलंडी मंगलवार व बुधवार को मनाई जाएगी।
सजेगा बादशाह-शहजादे का दरबार
सोनार दुर्ग के बिल्ला पाड़ा में धुलंडी के दिन यानी मंगलवार को व्यास जाति के बादशाह और शहजादा का स्वांग जैसलमेर की परम्परा का निर्वहन किया जाएगा। रियासतकाल से चल रही यह परम्परा आज भी बरकरार है। इसमें व्यास जाति के एक शादीशुदा व्यक्ति को बादशाह व पास में एक या दो बालकों को शहजादों के रूप में बिठाया जाता है। दूसरी ओर पुरोहित कुंड पाड़ा से गैर लेकर मंदिर पैलेस की तरफ जाते हैं तो बीच में ही चूड़ीघरों के आस पास चैनपुरा से शिव पार्वती के स्वांग के रूप में आई गैरों का आपस में मिलन हो जाता है।
Published on:
06 Mar 2023 10:25 am
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