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सब्जियों में लगा है ‘महंगाई’ का तडक़ा, महिलाएं परेशान

बरसाती सीजन से सब्जियों के भावों में शुरू हुई बढ़ोतरी अब तलक कायम होने से थाली का बजट बढ़ गया है और कुछ सब्जियां तो आम आदमी की पहुंच से ही बाहर हो गई है।

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बरसाती सीजन से सब्जियों के भावों में शुरू हुई बढ़ोतरी अब तलक कायम होने से थाली का बजट बढ़ गया है और कुछ सब्जियां तो आम आदमी की पहुंच से ही बाहर हो गई है। जैसलमेर के खुदरा बाजार में लगभग प्रत्येक सब्जी के भाव आसमान छू रहे हैं। सबसे ज्यादा बिकने वाले आलू और प्याज के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। दोनों सब्जियां खुदरा बाजार में क्रमश: 40 और 70-80 रुपए प्रति किलो के भाव में बेची जा रही है। कभी सब्जी के साथ नि:शुल्क लिया जाने वाला हरा धनिया तो 400 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। चाय के साथ सब्जियों का जायजा बढ़ाने में काम आने वाली अदरक के भावों में भी तेजी बरकरार है। मानसूनी बारिश की वजह से सब्जी बाजार में मांग की तुलना में आपूर्ति कम होने से भावों में उछाल जारी है। माना जा रहा है कि सर्दी का मौसम शुरू होने के बाद सब्जियों के आसमान चढ़े हुए भाव जमीन पर आएंगे। तब तक लोगों को विशेषकर रसोई का बजट संभालने वाली महिलाओं को भाव वृद्धि से जूझता रहना होगा। आम आदमी की रसोई का बजट बढऩे से थाली में हरी और सीजनल सब्जी की जगह दाल व घरों में तैयार होने वाली सब्जियां ले रही हैं।

बाहर से आती हैं सब्जियां

स्वर्णनगरी जैसलमेर सहित आसपास के गांवों-कस्बों में सब्जी जोधपुर और अहमदाबाद से मुख्यत: पहुंचती हैं। स्थानीय स्तर पर सब्जी का उत्पादन नगण्य मात्रा में होता है। भिंडी, करेला, टिंडा, गवार फली, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, लौकी, अरबी, तुरई, टमाटर व अन्य सब्जियां गुजरात से मुख्य रूप से आ रही हैं। हरी मिर्च भी गुजरात से लाई जा रही है। इस वजह से उसके भावों में भारी तेजी है। हरी मिर्च व शिमला मिर्च के भावों में बढ़ोतरी का रुख है।

इन भावों में बिक रही सब्जियां

आलू - 40 रुपए किलो
प्याज - 70 से 80 रुपए किलो
टमाटर - 60 रुपए किलो
हरी मिर्ची - 50 से 60 रुपए किलो
पालक - 80 रुपए किलो
भिंडी - 40 से 50 रुपए किलो
शिमला मिर्च - 100 से 120 रुपए किलो
अदरक - 100 रुपए किलो
लहसुन - 400 रुपए किलो
लौकी - 40 रुपए किलो
गाजर - 80 रुपए किलो
नींबू - 160 रुपए किलो
ककड़ी - 50 रुपए किलो
फूल गोभी - 120 रुपए किलो
पत्ता गोभी - 60 रुपए किलो
करेला - 50 से 60 रुपए किलो
टिंडा - 50 से 60 रुपए किलो

बिगड़ रहा रसोई का बजट

सब्जियों के दामों में तेजी के कारण रसोई का बजट बिगड़ रहा है। सब्जी बिना भोजन की कल्पना नहीं की जा सकती। कई सब्जियों के दाम तो पिछले कई महीनों से कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
मोहिनी देवी, गृहिणी

सर्दी में कम होंगे भाव

तेज गर्मी और बरसात की वजह से सब्जियों के भावों में तेजी रहती है। मांग की तुलना में आपूर्ति ज्यादा है। इस वजह से सब्जियों के भाव बढ़े हुए हैं। आगामी समय में सर्दी का मौसम शुरू होने पर सब्जियों के भाव कम हो जाएंगे। वैसे कुछ सब्जियां पहले की तुलना में कम भावों पर भी बिक रही हैं। यहां अधिकांश माल जोधपुर व अहमदाबाद से आता है।

  • अजय माली, थोक विके्रता