
Video: चिंकारा शिकार प्रकरण में एसआइटी गठित, शिकार की घटनाओं की रोकथाम पर भी करेगी मंथन
जैसलमेर वन रेंज में चिंकारा हरिण शिकार मामले की जांच अब विशेष जांच दल एसआइटी की ओर से की जाएगी। इस संबंध में अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा की ओर से वन एवं पर्यावरण मंत्री को ज्ञापन दिया गया था। जिस पर एसआइटी गठित की गई है। गौरतलब है कि पश्चिमी राजस्थान में लगातार चिंकारा शिकार की घटनाएं हो रही है। जिसके कारण प्रदेशभर केे वन्यजीवप्रेमियों में रोष व्याप्त है। इसी के अंतर्गत सरहदी जिले के नेहड़ाई गांव में गत दिनों हरिण का शिकार हुआ था। जिसके बाद बड़ी संख्या में विश्नोई समाज के लोगों व वन्यजीवप्रेमियों की ओर से कलेक्ट्रेट के आगे धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्नोई सभा ने हरिण शिकार में वन विभाग की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई थी। साथ ही सभा के पदाधिकारियों व वन्यजीवप्रेमियों ने राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवराज विश्नोई के नेतृत्व में जयपुर में वन एवं पर्यावरण मंत्री संजीव शर्मा से मिलकर एक ज्ञापन सुपुर्द करते हुए हरिण शिकार की घटनाओं की जांच के लिए एसआइटी गठन की मांग की थी।
चार सदस्यों की एसआइटी गठित
वन एवं पर्यावरण मंत्री ने इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों को एसआइटी गठन के निर्देश दिए। प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुनीशकुमार गर्ग ने गुरुवार को चार सदस्यों की एसआइटी गठित की। जिसके अंतर्गत जयपुर के मुख्य वन संरक्षक राजीव चतुर्वेदी को अध्यक्ष, जोधपुर वन्यजीव के उपवन संरक्षक सुनीलकुमार गौड़ को सदस्य सचिव, मुख्य वन संरक्षक बेगाराम जाट व जयपुर वन्यजीव के वन संरक्षक टी.मोहनराम को सदस्य मनोनीत किया गया। आदेश में बताया गया है कि वन मंडल इंगानप स्टेज द्वितीय जैसलमेर की रेंज इकाई पंचम 58 आरडी एसएमजीएस मुख्यालय नेहड़ाई में गत 23 जनवरी को हुए चिंकारा हरिण शिकार प्रकरण में इस एसआइटी का गठन किया गया है।
एक माह में रिपोर्ट करेगी पेश
आदेश के अनुसार एसआइटी की ओर से नेहड़ाई में चिंकारा हरिण शिकार के प्रकरण की विस्तृत जांच कर घटना में लिप्त व्यक्तियों/संस्थाओं को चिन्हित कर कार्रवाई के प्रस्ताव अपने प्रतिवेदन के साथ शिकार के प्रकरण में अधिकारी या कर्मचारी की ओर से लापरवाही व उदासीनता पाए जाने पर दायित्व का निर्धारण कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। साथ ही भविष्य में वन्यजीव के शिकार के घटनाओं के नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए सुझाव भी दिए जाएंगे। एसआइटी अपनी रिपोर्ट एक माह में पेश करेगी।
Published on:
17 Feb 2024 07:35 pm
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