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ग्रामीण बोले- खनन परियोजना से सामाजिक-सांस्कृतिक ढांचा होगा ध्वस्त

निजी कंपनी को खनन के लिए भूमि आवंटन निरस्त करने की मांग को लेकर रामगढ़ के ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना आरंभ किया। प्रस्तावित खनन परियोजना का स्थानीय आबादी व क्षेत्रवासियों में विरोध तेज है।

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निजी कंपनी को खनन के लिए भूमि आवंटन निरस्त करने की मांग को लेकर रामगढ़ के ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना आरंभ किया। प्रस्तावित खनन परियोजना का स्थानीय आबादी व क्षेत्रवासियों में विरोध तेज है।

ग्रामवासियों का कहना है कि प्रस्तावित भूमि ग्राम रामगढ़ की आबादी विस्तार क्षेत्र, खातेदारी भूमि, गोचर भूमि, सपोल कमियों की ढाणी, विभिन्न ढाणियां, रहवासी घर, धार्मिक स्थल, देवस्थान, समाधियां तथा वर्षों पुराने जल स्रोतों — नदियां, तालाब और प्राचीन जलधाराओं के बीच स्थित है। ऐसी स्थिति में खनन परियोजना से ग्राम रामगढ़ की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

ग्रामीणों ने बताया कि चूना पत्थर व पत्थर आधारित क्रशिंग, क्रिस्टलाइजेशन एवं पाउडर उत्पादन से उठने वाली सूक्ष्म और भारी धूल वायु प्रदूषण को कई गुना बढ़ा सकती है। इससे सिलिकोसिस, टीबी, दमा और अन्य घातक श्वसन रोगों का खतरा बढ़ेगा। ग्रामीणों के अनुसार यह स्थिति महिलाओं, बच्चों और वृद्धों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत संकटपूर्ण है।

कहा गया कि खनन गतिविधियों से जल स्रोतों का क्षरण, भूजल स्तर में गिरावट, कृषि भूमि को नुकसान, पशुपालन पर प्रतिकूल प्रभाव और प्राकृतिक पारिस्थितिकी को स्थायी हानि होने की संभावना है। ग्रामीणों ने धरनास्थल पर बताया कि यह परियोजना ग्रामवासियों के शांतिपूर्ण जीवन, आजीविका और पर्यावरण के मूल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

जनहित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने भूमि आवंटन निरस्त करने की मांग उठाई और चेताया कि मांगों पर यथाशीघ्र निर्णय नहीं होने पर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।

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