6 हजार गुरुजी लगा रहे खाली स्कूल के चक्कर!

शिक्षक वर्ग में भी स्वास्थ्य पर कोरोना के मंडरा रहे खतरे को देखते हुए विरोध के स्वर

By: Deepak Vyas

Published: 26 Aug 2020, 01:02 AM IST

दीपक व्यास
जैसलमेर. वैश्विक महामारी कोविड.19 के बढ़ते प्रकोप के बावजूद मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइडलाइन में शिक्षा विभाग से जुड़े दिशा निर्देशों की सरकारी तंत्र की ओर से कितनी पालना की जा रही है, इसकी बानगी कोरोना संकट में बिना विद्यार्थियों के खाली पड़े स्कूल जा रहे शिक्षकों के रूप में देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि सरहदी जैसलमेर जिले का गांव हो या शहर, कोई भी कोना कोराना से अछूता नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों को कोरोना से बचाने के लिए अवकाश के बीच शिक्षकों को विद्यालयों में तय समय में रहने के फरमान से जिम्मेदारों की लापरवाही सामने आ रही है। इन सबके बीच शिक्षक वर्ग में भी स्वास्थ्य पर कोरोना के मंडरा रहे खतरे को देखते हुए विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं। केन्द्र की गाइडलाइन के विरुद्ध शिक्षकों को वर्क फ्रॉम होम की बजाय स्कूल बुलाया जा रहा है। केन्द्र की गाइड लाइन में 31 अगस्त तक सभी स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थाएं आदि बंद है। राज्य सरकार ने सभी शिक्षण संस्थानों को 31 अगस्त तक बंद रखने को कहा है, लेकिन शैक्षणिक स्टाफ को लगातार बुलाया जा रहा है। केन्द्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार शैक्षणिक स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम के जरिए काम करवाने को कहा गया है। राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ का कहना है कि इस संबध में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि जिन शिक्षकों ने मार्च से लगातार कोराना संकट के दौर में ड्यूटी की, चाहे नाके पर गश्त हो, कोविड.19 के तहत राशन वितरण हो या फिर घर-घर जाकर सर्वे...। कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी शिक्षकों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है।
रूट चार्ट के बाहर जाकर संभाली आपातकाल की स्थिति
शिक्षकों की मानें तो उनके रूट चार्ट के बाहर जाकर आपातकाल की जिम्मेदारी उन्होंने निभाई। सरकार ने बिना बालकों के बंद स्कूलों में शिक्षकों को बुलाया। विद्यालय खुले रखने के आदेश हो तो कोई भी एक शिक्षक अपनी रोटेशन प्रणाली से विद्यालय को खुला रख सकते थे, शिक्षा विभाग सर्वाधिक महिला कर्मचारी वाला विभाग है। प्रदेश भर में 4. 50 लाख के लगभग शिक्षक कार्यरत है और जब नौनिहालों के साथ महिला शिक्षक विद्यालय आते जाते हैं तो यह संख्या 5 लाख से ज्यादा हो जाती है, जो विद्यालय के नाम पर बिना काम के संक्रमण के खतरे में दिखाई दे रहे हैं। शिक्षक संघ के अनुसार राजस्थान सरकार केंद्र की भांति गाइडलाइन के अनुरूप ही शैक्षणिक स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम के आदेश शीघ्र करें, क्योंकि जब छात्र-छात्राएं विद्यालय नहीं आ रहे हैं, तो शैक्षणिक स्टाफ को बुलाना कतई उचित नहीं है।
क्या कहती है गाइड लाइन
-गत 29 जुलाई को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एडवाइजरी जारी कर 31 अगस्त तक सभी शिक्षण संस्थाएं बंद रखते हुए शैक्षणिक स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम के कार्य करवाने का कहा गया है।
-इस आदेश पर प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों के आने पर तो रोक लगा दी गई, लेकिन कार्यरत शिक्षक व स्टाफ को लगातार विद्यालय बुलाया जा रहा है।
-मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर केंद्रीय गाइडलाइन के मुताबिक सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखते हुए स्टाफ को भी नहीं बुलाते हुए वर्क फ्रॉम होम से ही कार्य संपादन के लिए कहा है।

राजकीय विद्यालयों में 4 लाख से अधिक गुरुजी
गौरतलब है कि राज्य में सरकारी स्कूलों में चार लाख से ज्यादा स्टाफ है। इन दिनों कोरोना संकट में बिना विद्यार्थियों के ही स्कूल जा रहा है, हालांकि 13 जुलाई को शिक्षा ग्रुप .6 की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मिले निर्देशों पर प्रारंभिक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान, राजस्थान शिक्षा परिषद से जुड़े अधिकारियों से टिप्पणी मांगी है। बताया जा रहा है कि उच्च अधिकारियों ने इस संबंध में आज दिनांक तक कोई निर्देश जारी नहीं किया है।

फैक्ट फाइल
721 राजकीय प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहेे हैं जैसलमेर में
-255 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे है सरहदी जिले में
-6068 के करीब शिक्षक व मंत्रालय कर्मचारी सहित सेवाएं दे रहे हैं जैसलमेर में

वर्क फ्रॉम होम ही बेहतर उपाय
प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए 31 अगस्त तक अवकाश है तो शैक्षणिक स्टाफ को विद्यालय नहीं बुलाकर वर्क फ्रॉम होम के जरिए काम करवाया जा सकता है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक स्टाफ तथा कार्यालयी स्टाफ भी पॉजिटिव आने के प्रकरण भी सामने आए हैं। स्टाफ को आवागमन में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिना बच्चों के शिक्षकों का विद्यालय में कोई काम ही नहीं है।
-प्रकाश विश्नोई, प्रदेश मंत्री, राजस्थान शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ

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