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जल संरक्षण : खड़ीन, टांका, नाड़ी जैसी संरचनाओं को मिलेगा बढ़ावा

जैसलमेर जिले में जल संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है।

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जैसलमेर जिले में जल संरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के दूसरे चरण की जिला स्तरीय बैठक मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में चयनित परियोजनाओं की विस्तृत योजना को मंजूरी दी गई और पहले चरण की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रश्मि रानी ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण और वर्षा जल संचयन को लेकर गंभीर है। खड़ीन, टांका, नाड़ी, एनिकट, तालाब और फार्म पोण्ड जैसी संरचनाओं का पुनरुद्धार अभियान का अहम हिस्सा है।

सभी विभागों की संयुक्त कार्ययोजना तैयार

दूसरे चरण में विभिन्न विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार जल संरक्षण कार्यों को चिह्नित कर डीपीआर में शामिल किया है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी कार्य मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे किए जाएं।

बैठक में मुख्य बिंदु

-पारंपरिक संरचनाओं के जरिये जल संकट का समाधान

  • खड़ीन, टांका, नाड़ी जैसी तकनीकों को प्राथमिकता
  • द्वितीय चरण की डीपीआर को मिली स्वीकृतिप्रथम चरण की प्रगति की भी हुई समीक्षा

अधिकारियों को मिले निर्देश

रश्मि रानी ने कहा कि जल संरक्षण केवल एक विभाग की नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्यों को पूरा करने को कहा गया है।
बैठक में उपखण्ड अधिकारी सक्षम गोयल, नगर परिषद आयुक्त लजपालसिंह सोढ़ा सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।