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शादियां हुई सादी, धन की रुकी बर्बादी, कोरोना काल का सकारात्मक पक्ष

-पुलिस-प्रशासन भी कर रहा निगरानी

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शादियां हुई सादी, धन की रुकी बर्बादी, कोरोना काल का सकारात्मक पक्ष

शादियां हुई सादी, धन की रुकी बर्बादी, कोरोना काल का सकारात्मक पक्ष

जैसलमेर. कोरोना के कारण चारों तरफ भय का वातावरण है और संक्रमण के लगातार बढऩे से सीमावर्ती जैसलमेर के शहरी इलाकों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों तक में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। बाजार बंद हैं तथा हजारों की तादाद में लोग एक तरह से बेरोजगारी का दंश भुगतने के लिए मजबूर हैं। इस बीच एक सकारात्मक पक्ष के तौर पर इन दिनों शहर व गांवों में होने वाली थोकबंद शादियों में आई सादगी और कम खर्च को देखा जा सकता है। शहरी क्षेत्र में लाखों के खर्च से होने वाली शादियां मेहमानों की संख्या में एकदम से कटौती कर दिए जाने से करीब एक चौथाई खर्च में होती नजर आ रही है। पहले वाला धूम-धड़ाका सिरे से गायब है और न ही दर्जनों कामगारों की अब जरूरत रह गई है। हालांकि इससे शादी जैसे इवेंट से रोजगार पाने वाले लोगों की रोजी पर भी संकट खड़ा हुआ है।
सीमित लोग, सिमटा खर्च
जिले में शादियों का सीजन गत 21 तारीख से शुरू हुआ है। यह आगामी मई माह में अक्षय तृतीया तक अनवरत चलेगा। गत रविवार को जहां शादी समारोह थेए वहां मेहमानों की संख्या 50-60 से ज्यादा नहीं थी। कुछ जगहों पर सौ-डेढ़ सौ लोगों ने भोजन भी किया तो गाइडलाइन की पालना करते हुए टुकड़ों-टुकड़ों में। ऐसे में हजार-आठ सौ लोगों के लिए बनने वाले पकवानों का सीधा खर्च बच गया। इससे रसद के साथ कारीगरों, श्रमिकों, टेंट, लाइटिंग, साउंड आदि पर होने वाला खर्च बहुत कम हो गया। कोरोना प्रसार की वजह से एक तो आयोजकों ने कम लोगों को निमंत्रित किया और उस पर जिन्हें बुलावा भी भेजा गयाए वे भी पूरी संख्या में नहीं पहुंच रहे हैं। पुलिस तथा प्रशासन की ओर से पहले से ही शादी वाले आयोजन स्थलों पर संबंधित आयोजकों से गाइडलाइन की पालना करने की ताकीद की जा रही है। बारातों का अनिवार्य हिस्सा बन चुके डीजे का शोर-शराबा कहीं से सुनाई नहीं दिया। घोड़ी पर दूल्हे के साथ गिनती के बाराती अधिक से अधिक ढोल और ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने दिनों की भांति हारमोनियम की स्वर लहरियों के बीच निकले।
उलझनें भी आ रही पेश
वर्तमान में शादी समारोहों के लिए अधिकांश व्यवस्थाएं अग्रिम तौर पर की गई। मसलन टेंट, डीजे, डेकोरेशन, हलवाई आदि की बुकिंग सामान्य समय में की गई और अधिकांश मामलों में पेशगी के तौर पर अग्रिम भुगतान भी किया गया। संबंधित लोगों ने बुकिंग के मद्देनजर साधन भी जुटा लिए। ऐसे मामलों में गाइडलाइन के चलते कटौती करने पर भी राशि खर्च में ज्यादा अंतर नहीं आया है। इसके अलावा पिछले साल भर से शादी सीजन की बाट जोह रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठान वालों को कोरोना की गाइडलाइन ने बहुत बड़ा झटका दिया है।

कर रहे समझाइश
शादी जैसे मांगलिक कार्यों पर कोरोना गाइडलाइन की पालना करवाने के लिए संबंधित लोगों से समझाइश की गई है। वर्तमान समय में न तो भीड़ इक_ी की जा सकती है और न ही ऐसा करना चाहिए। बड़े पैमाने पर सेलिब्रेशन पहली सालगिरह या अन्य किसी अवसर पर किया जा सकता है।
-अनुराग भार्गव, जिला कोविड प्रभारी, जैसलमेर

समझदारी से काम लेना जरूरी
अभी देश-प्रदेश की भांति जैसलमेर में भी कोरोना बहुत फैला हुआ है। ऐसे में समझदारी बरतना जरूरी है। पुलिस किसी की खुशियों के बीच नहीं आना चाहतीए लेकिन सरकारी दिशा निर्देशों की पालना तो सभी को करनी ही चाहिए।
-बलवंतराम, शहर कोतवाल, जैसलमेर