
ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में गुरुवार देर रात हुई सनसनीखेज घटना ने न सिर्फ शहर को दहला दिया, बल्कि जैसलमेर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल सीधा है—जब शहर की महज पांच किलोमीटर की परिधि में अकेले अभय कमांड सेंटर के अंतर्गत 272 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और जब रात्रिकालीन गश्त और नाकाबंदी का दावा किया जाता है, तब आखिर काले रंग की एसयूवी और उसमें सवार युवक कहां और कैसे गायब हो गए?
घटना सोनार दुर्ग के भीतर अखे प्रोल घाटी क्षेत्र की है, जहां देर रात एक काली एसयूवी में आए कुछ युवाओं ने खुलेआम उत्पात मचाया। स्थानीय लोगों ने जब संदिग्ध आवाजाही पर सवाल उठाया, तो वाहन सवार युवाओं ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने हथियार होने का दावा करते हुए फायरिंग की धमकी भी दी। यह सुनते ही क्षेत्र में दहशत फैल गई। गौरतलब है कि अभय कमांड सेंटर के सीसीटीवी कैमरे शहर के सभी प्रमुख चौराहों और बाहरी क्षेत्र के मुख्य मार्गों पर लगे हुए हैं।
स्थिति तब और बिगड़ गई, जब बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। खुद को घिरा देख युवाओं ने भीड़ पर वाहन चढ़ाने का प्रयास किया और उसके बाद तेज रफ्तार में वाहन को भगाते हुए दुर्ग से बाहर निकल गए। इस दौरान वाहन की चपेट में आने से तीन नवजात श्वानों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक नवजात श्वान गंभीर रूप से घायल हो गया। यह दृश्य न सिर्फ क्रूरता की हदें पार करता दिखा, बल्कि यह भी बताता है कि कानून का डर इन लोगों के मन से पूरी तरह खत्म हो चुका है।
घटना के बाद से पूरे सोनार दुर्ग क्षेत्र में भय, रोष और असुरक्षा का माहौल है। तीसरे दिन भी दुर्गवासी डरे हुए दिखे, साथ में उनमे रोष देखने को मिला। दुर्गवासी आशीष व्यास के अनुसार यदि समय रहते भीड़ हट नहीं जाती, तो वाहन के कारण बड़ा जनहानि का हादसा हो सकता था।
जिस दुर्ग को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है, जहां हर वक्त पर्यटकों की आवाजाही रहती है, वहां ऐसी घटनाएं होना किसकी नाकामी है? सबसे बड़ा सवाल किले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। शहर में लगे सीसीटीवी कैमरे आखिर किस काम के हैं? क्या कैमरे सिर्फ शो-पीस और हैं? वाहन दुर्ग से बाहर निकलने के बाद किन रास्तों से गया, किस नाके से गुजरा, और किसकी निगरानी में यह सब हुआ, इन सवालों का जवाब अब तक नहीं मिल पाया है। दुर्गवासियों का आरोप है कि रात्रिकालीन गश्त सिर्फ दिखावे तक सीमित है। रात के समय दुर्ग क्षेत्र में न तो नियमित पुलिस उपस्थित रहती है और न ही प्रभावी निगरानी। घटना के बाद भी यदि आरोपी खुलेआम फरार हैं, तो यह व्यवस्था की नाकामी ही मानी जाएगी।
इस घटना ने प्रशासनिक दावों की भी पोल खोल दी है। हर बड़े आयोजन और पर्यटन सीजन से पहले सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सोनार दुर्ग जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह की वारदात यह बताने के लिए काफी है कि निगरानी तंत्र में गंभीर खामियां हैं। स्थानीय लोगों और दुर्गवासियों ने एक स्वर में आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग उठाई है। इसके साथ ही रात्रिकालीन प्रवेश पर सख्त नियंत्रण, सीसीटीवी कैमरों की वास्तविक निगरानी, कंट्रोल रूम की जवाबदेही तय करने और दुर्ग क्षेत्र में स्थायी गश्त व्यवस्था लागू करने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि इस घटना को हल्के में लिया गया, तो भविष्य में इससे भी बड़ी वारदात से इनकार नहीं किया जा सकता।
Published on:
04 Jan 2026 11:37 pm
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