
60 फीसदी महिलाओं को पढऩा होगा क ख ग घ... दिखाना होगा निरक्षरता को 'अंगूठा'
दीपक व्यास
जैसलमेर. विगत एक दशक में पाक सीमा से सटे जैसाण में कई विकासात्मक बदलाव हुए , बावजूद इसके वृहद रूप से फैले जिले में शत प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य अभी दूर है। देश-दुनिया में हवा की ताकत हो सूर्य के प्रकाश की क्षमता, औद्योगिक क्षेत्र या फिर पर्यटन... हर किसी क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे सरहदी जिले के साथ एक निराशाजजनक तथ्य जुड़ा हुआ है कि यहां की आधी आबादी यानि महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी पीछे हैं। करीब 17 किलोमीटर घनत्व वाले सरहदी जिले में शिक्षा का उजियारा अभी तक उम्मीदों के अनुरूप प्रसारित नहीं हो पाया है। विशेषकर महिलाओं को साक्षरता के लिहाज से सरहदी जिले को आज भी बेहतर प्रयास करने की दरकार है।
फैक्ट फाइल
-3 लाख के करीब महिलाएं शामिल है कुल जनसंख्या में
-7 लाख के करीब आबादी है सरहदी जैसलमेर जिले की
-32 फीसदी बढ़ी है आबादी गत एक दशक में
-50.97 प्रतिशत साक्षरता की दर जैसलमेर में थी वर्ष 2001 में
-58 .04 प्रतिशत साक्षरता दर पहुंच चुकी है गत दशक में
वर्ष 2011 जनगणना के आंकड़ों की जुबानी
-वर्ष 2011 में जिले में साक्षर लोगों की संख्या रही 3 लाख 14 हजार 345
-वर्ष 2001 में यह संख्या आंकी गई थी 2 लाख 1 हजार 96 0
-पुरुष साक्षरता 73.09 प्रतिशत है, वहीं महिला साक्षरता केवल 40.23 प्रतिशत ही है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता का प्रतिशत 54.6 1 रहा।
-शहरी क्षेत्र में साक्षरता 78 .91 प्रतिशत दर्ज की गई।
-ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष साक्षरता का प्रतिशत 70.47 रहा।
-जैसलमेर शहर मेंं साक्षरता का प्रतिशत 8 0.47 प्रतिशत है।
-महिला साक्षरता का प्रतिशत 66 . 81 आंका गया है।
-ग्रामीण क्षेत्र में केवल 36.06 ही साक्षरता का प्रतिशत है।
-गत वर्षों में साक्षरता अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद भारत साक्षरता मिशन का आगाज हुआ।
-50 फीसदी से कम महिला साक्षरता वाले जिलों के तौर पर इस अभियान में जैसलमेर जिला शामिल किया गया।
-तीन वर्ष पहले केन्द्रसरकार ने पढऩा-लिखना अभियान चलाने का निर्णय लिया, लेकिन कोरोना बाधक बना।
-दो वर्ष पूर्व जुलाई महीने में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में साक्षरता से जुड़ी 11 बुनियादी परीक्षाएं हुई।
-बुनियादी परीक्षा में 14417 महिलाओं को चिह्नित किया गया।
हकीकत यह भी
-पूर्व में लोक जुम्बिश, आखर कोटड़ी, सहज शिक्षा केन्द्र सहित कई कार्यक्रम संचालित होते थे।
-मौजूदा समय में आंगनबाड़ी केन्द्रों व सर्वशिक्षा अभियान के माध्यम से आमजन को शिक्षा के प्रति जागरुक किया जा रहा है।
-अलग-अलग माध्यमों व मंचों से बालिका विद्यालयों की स्थापना कर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
-जानकारों की मानें तो जिले के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां रुढ़ीवादी परंपराओं के कारण सरकार के प्रयास पूरे होते नजर नहीं आ रहे है।
पत्रिका व्यू: अलग से हो अधिकाधिक बालिका विद्यालय
सुखद बात यह है किम गत वर्षों में बालिकाएं आगे आकर शिक्षा में रुचि ले रही है, लेकिन साक्षरता दर में आज भी महिलाएं पिछड़ी हुई है। सरकार की ओर से प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय व गांवों में बालिका शिक्षा के लिए अलग से बालिका विद्यालयों, जहां प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च माध्यमिक तक की पढ़ाई की की सुविधा हो, स्थापित करें तो सकारात्मक परिणाम मिल सकेंगे। शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जोर देकर बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
Published on:
07 Sept 2022 09:18 pm
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