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आजाद भारत में भी नहीं मिली थी आजादी, देनी पड़ी थी 11 लोगों की कुर्बानी, पढ़े ये खबर

भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी लेकिन जालौन की बाबनी स्टेट उस समय आजाद नहीं हो पाई थी.

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जालौन. भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी लेकिन जालौन की बाबनी स्टेट उस समय आजाद नहीं हो पाया था। आज़ादी के लिए यहां के लोगों को आजाद भारत में भी आजादी के लिए जलियावाला कांड की तरह कुर्बानी देनी पड़ी थी। 25 सितम्बर 1947 को जब यहां के लोगों ने तिरंगा लेकर ग्राम हरचंदपुर में राष्ट्रगान गाया तो बाबनी स्टेट के नवाब मुहम्मद मुश्ताक उलहसन ने अपने सैनिको को वहाँ पर भेजकर निहत्थे आजादी के दीवानों पर गोलिया चलवा दी थी। जिससे 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौके पर ही शहीद हो गए थे और 26 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। तब प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियो ने प्रयास किया जिसके बाद यह क्षेत्र आजाद हो सका था। बाद में इसे 25 जनवरी 1950 में उत्तर प्रदेश में विलय कर लिया गया था। लेकिन यह क्षेत्र अभी भी उपेक्षा क़ा दंश झेल रहा है और न ही किसी प्रकार की कोई मूलभूत सुविधा शहीदों के परिजनों को दी जा रही है।

देश को आजाद कराने के लिए बुंदेलखंड की वीरांगना लक्ष्मीबाई, भगत सिंह , राजगुरु, सुखदेव, चन्द्र शेखर आजाद, सुभाष चन्द्र बोस से लेकर अनेक दीवानों ने अपने प्राण निछावर कर दिए थे, और उनके इस बलिदान से देश को आजादी मिल सकी थी और तब कंही जाकर देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हो सका था| लेकिन जालौन जनपद के बाबनी स्टेट को आजादी नहीं मिल पाई थी जिसके लिए बाबनी स्टेट के लोगो ने आजादी के लिए बिगुल फूंका था और इस बिगुल में 50 से अधिक लोगों को पुलिस की गोली क़ा शिकार होना पड़ा था जिसमें 11 लोगों की मौत हुयी थी। तब कहीं जाकर इस राज्य को आजादी मिल पाई थी।

बाबनी स्टेट के नाम से जाना जाता था यह राज्य


घटना के विषय में बता दें की जालौन जनपद में 52 ग्रामों क़ा एक छोटा सा राज्य था जिसे बाबनी स्टेट के नाम से जाना जाता था। इस राज्य के नबाब मुहम्मद मुश्ताक उलहसन थे जो हैदराबाद के निजाम के भाई बंधू थे। देश को आजादी 15 अगस्त को मिल गई थी और छोटे-छोटे राज्य जो राजाओं के अधीन थे। उनका विलय हो गया था और इन राज्यों को राज्य प्रजा मंडल के प्रधानमंत्री के सुपुर्द कर दिया गया था। लेकिन जालौन के बाबनी राज्य को आजादी नहीं मिल पाई थी। इस राज्य को विलय करने के लिए देश के गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने नबाब से कहा था लेकिन उनकी इस बात को माना नहीं गया था।

आजाद होने के बाद भी नहीं मना पाये थे आजादी


जब पूरा देश आजादी क़ा जश्न मना रहा था तब बाबनी स्टेट नबाब के अधीन था। नबाब द्वारा इस राज्य में आजादी का जश्न मनाने के लिए मना किया गया था और इस राज्य की प्रजा आजादी का जश्न नहीं माना पायी थी। तो इस राज्य के आजादी के दीवानों ने एक बैठक की और उन्होंने तिरंगा झंडा फहराने के लिए निर्णय लिया और झंडा फहराने के लिए तिथि और स्थान निश्चित किया गया और उसी के अनुसार आजादी के दीवानों ने 25 सितम्बर 1947 को ग्राम हरचंद्रपुर पहुंचकर झण्डा फहराने की पहुंचे थे।

तिरंगा न फहरा पाये तो चलवा दी गोलियां


तिरंगा फहराने की जानकारी जब बाबनी स्टेट के नबाब मुहम्मद मुश्ताक उलहसन को मिली तो उन्होने झंडा न फहरने के लिये राज्य के कोतवाल अहमद हुसैन को अनुमति दी कि वह हरचंद्रपुर में आजादी के दीवानों को झंडा न फहराने दे। इस आदेश पर कोतवाल अपने सैनिकों को लेकर हरचंद्रपुर पहुंचे जहां उन्होंने आजादी के दीवानों को रोकने क़ा प्रयास किया। जिस पर कोतवाल और सिपाहियों से आजादी के दीवानों क़ा झगड़ा हो गया जिस पर कोतवाल ने आजादी के दीवानों पर गोलियां चलावा दी। गोलिया चलते ही आजादी के दीवाने यहाँ-वहाँ भागने लगे लेकिन चारों तरफ से मकान होने के कारण वह भाग नहीं पाए जिस कारण इस गोली कांड मे 11 लोगों की मौत हो गयी थी और 26 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस नरसंहार से पूरे स्टेट में सनसनी फ़ैल गई थी। इस घटना की जानकारी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल को हुयी तो उन्होंने नबाब मुहम्मद मुश्ताक उलहसन से बात की तब कही जाकर इस राज्य को आजादी मिल पाई थी और बाद मे इस राज्य को भारत में विलय कर लिया गया था।

1950 में इस राज्य को उत्तर प्रदेश में किया गया था शामिल


25 सितंबर 1947 के बाद इस राज्य को आजादी तो मिल गई लेकिन इसका अधिकार नवाब के राज्य प्रजामंडल के प्रधानमंत्री विश्वनाथ व्यास को दे दिये गए थे। बाद में जब देश क़ा संविधान 1950 में बना तब इस राज्य को उत्तर प्रदेश में शामिल कर लिया गया था। उस समय बाबनी स्टेट को नबाब के शासन से आज़ादी तो मिल गई यही और पूरी सत्ता राज्य प्रजा मंडल के प्रधानमंत्री विश्वनाथ व्यास को सौंप दी गई थी।

उपेक्षा क़ा दंश झेल रहा ग्राम हरचंदपुर


बाबनी स्टेट को आजादी मिल गई और इस राज्य के जिस ग्राम हरचंदपुर में जो दूसरा जालियावाला कांड हुआ वह ग्राम आज भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस ग्राम में शहीदों के नाम पर एक पार्क बनवाकर उसमें शहीदों के नाम जरूर लिखवा दिये गये लेकिन आज उस पार्क की हालत बद से बदत्तर है और वहां पर किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है जिससे उसकी सही प्रकार की सुरक्षा की जा सके। यह ग्राम अभी भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है।

शहीदों के परिजनों को नहीं मिल रही सरकार की तरफ से कोई सुविधा


इस घटना मे शहीद हुये आजादी के दीवानों के परिवार वालों को सरकार की तरफ से किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिल रही है। इसके लिए शहीदों के परिजनों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कई बार केंद्र व प्रदेश सरकार को इसके बारे में लिखा लेकिन शासन ने बाबनी स्टेट के ग्राम हरचंद्रपुर में जहां दूसरा जलियांवाला कांड हुआ था के परिजनों को भूलती जा रही है और उन शहीदों को कोई भी आर्थिक मदद नहीं दे रही है जिस कारण शहीदों क़ा इससे विश्वास उठता जा रहा है।







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