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राजस्थान में डिग्रियों का ‘काला सच’: जल गया रिकॉर्ड या बुनी गई झूठी कहानी? 25 हजार फर्जी डिग्रियां अब भी रहस्य

राजस्थान में फर्जी डिग्री मामलों ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओपीजेएस विश्वविद्यालय में बीपीएड रिकॉर्ड जलने का दावा जांच में झूठा मिला और 47 अभ्यर्थियों पर केस दर्ज हुआ। वहीं, जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी की 25 हजार डिग्रियों का रहस्य अब भी बरकरार है।

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जालोर

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Arvind Rao

Feb 24, 2026

Black Truth of Degrees in Rajasthan Burnt Records or Fabricated Cover-Up 25000 Fake Degrees Still a Mystery

SOG की रेड में खुला राजस्थान की यूनिवर्सिटीज का बड़ा खेल (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

जालोर: प्रदेश में पीटीआई भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री की जांच के दौरान एसओजी के सामने नित नए खुलासे हो रहे हैं। मामले में एसओजी ने ओपीजेएस विश्वविद्यालय चूरू से वर्ष 2018 और 2019 के बीपीएड रिकॉर्ड मांगे तो प्रबंधन ने रिकॉर्ड रूम में लगी आग में तमाम दस्तावेज जल जाना बताया।

वहीं, इस मामले में एसओजी ने जांच की तो पता लगा कि आग रिकॉर्ड रूम के स्थान पर विवि के गेट पर लगना पाया गया। अब एसओजी यूनिट राजगढ़ (चूरू) की ओर से ओपीजेएस यूनिवर्सिटी, चूरू के प्रबंधन समेत 47 अभ्यर्थियों के खिलाफ 20 फरवरी, 2026 को मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट एसओजी मुख्यालय भेजी है।

एसओजी राजगढ़ यूनिट ने मुख्यालय को दी जानकारी में बताया कि ओपीजेएस यूनिवर्सिटी चूरू ने बार-बार पत्राचार के बावजूद वर्ष 2018 और 2019 का बीपीएड रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के स्थान पर रिकॉर्ड रूम में आग लगने के कारण उक्त रिकॉर्ड नष्ट होना बताया। जबकि छात्रों का दस्तावेज सत्यापन विवि की ओर से ही किया गया था।

यदि रिकॉर्ड नष्ट हुआ तो सत्यापन किस आधार पर किया। इसका कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दिया गया। सत्यापन के लिए अनुसंधान किया तो ओपीजेएस विवि में 28 दिसंबर 2019 को रिकॉर्ड रूम के स्थान पर विवि के मुख्य द्वार के पास बने बुक स्टोर में आग लगने की घटना सामने आई। जांच में सामने आया कि बुक स्टोर से ओपीजेएस विवि की मुख्य बिल्डिंग करीब 50 मीटर दूर है।

ऐसे हुआ गड़बड़ी का खुलासा

जांच में सामने आया कि क्रम संख्या 39, 51, 56, 58, 61, 63, 64, 65, 67, 68, 69, 71 व 78 पर नामित अभ्यर्थियों की ओर से आवेदन पत्र में भिन्न-भिन्न विवि की डिग्री का उल्लेख है। जबकि दस्तावेज सत्यापन में ओपीजेएस विवि, चूरू की डिग्री जमा करवाई। जो बिना किसी नियमित प्रक्रिया के बैक डेट में जारी की गई।

अनेक अभ्यर्थी जिन्होंने ओपीजेएस विवि चूरू की डिग्री के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है, जबकि विवि की ओर से एसओजी को पेश रिकॉर्ड के अनुसार उक्त छात्रों का कहीं उल्लेख नहीं है। विवि की ओर से जारी एक ही वर्ष की अंकतालिका/डिग्री में परीक्षा परिणाम की तिथियों में भी भिन्नता मिली है।

पढ़ाया 500 को, डिग्री 1359 को

शारीरिक शिक्षा अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में आवेदन करने वाले ओपीजेएस विवि चूरू से प्राप्तशुदा बीपीएड की डिग्रीधारक 1359 अभ्यर्थियों की ओर से आवेदन करना पाया। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद नई दिल्ली और ओपीजेएस विश्वविद्यालय चूरू से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार ओपीजेएस विवि, रावतसर कुंजला, जिला चूरू को बीपीएड के द्विवर्षीय पाठ्यक्रम के लिए मान्यता शिक्षा सत्र 2016 से प्रत्येक के लिए 100-100 सीटों की मिली थी।

वास्तविक रूप से तृतीय श्रेणी शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में परीक्षा तिथि 25 सितंबर 2022 तक सत्र 2022 तक की डिग्री ही मान्य थी, जो ओपीजेएस से बीपीएड की अधिकतम 500 (शिक्षा सत्र 2016-18 में 100, 2017-19 में 100, 2018-20 में 100, 2019-21 में 100 व 2020-22 में 100) अभ्यर्थी ही हो सकते थे।

ओपीजेएस के मालिक और प्रबंधन से जुड़े लोग जांच के दायरे में

एसओजी की ओर से दर्ज मामले में चूरू की ओपीजेएस यूनिवर्सिटी के प्रबंधन से जुड़े लोगों को नामजद तो नहीं किया है, लेकिन हरियाणा का जोगेन्द्र दलाल, सरीता कड़वासरा, संगीता कड़वासरा, रमन नांदल, सुमित सहित आठ लोगों को जांच के दायरे में लिया है। इनमें से जोगेन्द्र दलाल अभी वर्तमान में जेल में हैं। वहीं, हरियाणा का रमन नांदल मामला सामने आने के बाद से ही फरार है।

इन्होंने कहा…

पीटीआई भर्ती परीक्षा 2022 को लेकर जारी की बीपीएड की डिग्रियों की जांच की है। गड़बड़ी पर 47 अभ्यर्थी व यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर मामला दर्ज करवाया है। अग्रिम कार्रवाई और जांच मुख्यालय स्तर से होगी।
-धर्माराम गिला, एएसपी, एसओजी, यूनिट राजगढ़

25 हजार फर्जी डिग्रियों का रहस्य बरकरार

जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी का बहुचर्चित डिग्री कांड, जिसने एक दशक पहले राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया था, आज भी रहस्य के घेरे में है। एसओजी की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों और विधानसभा में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बावजूद, करीब 25 हजार फर्जी डिग्रियां आज कहां हैं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हैरानी की बात यह है कि ये डिग्रियां न तो वापस ली गईं और न ही नष्ट की गईं, जिससे इनके दुरुपयोग का खतरा आज भी बना हुआ है।

जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्रियों का मामला वर्ष 2015-16 में उजागर हुआ था। इस प्रकरण को लेकर 21 मार्च 2016 को विधानसभा परिसर में एक कक्ष में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री एवं उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति की बैठक हुई थी।

बैठक में उस समय अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के संबंध में निर्णय लिया गया था। एसओजी जयपुर ने ही पूरे मामले में कार्रवाई की, जोधपुर में इस संबंध में कोई पत्रावली उपलब्ध नहीं है।

तत्कालीन संभागीय आयुक्त एवं प्रशासक रतन लाहोटी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उन्हें मामले की कोई विशेष जानकारी नहीं है तथा उनका दायित्व केवल विश्वविद्यालय से अंतिम छात्र के पास आउट होने तक प्रशासक की भूमिका निभाने तक सीमित था।

एसओजी जयपुर ने फर्जी डिग्रियां जारी करने के मामले में विवि के कर्मचारियों व अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि अन्य राज्य के कॉलेज के नाम से बीएड की फर्जी डिग्रियां दिलाने का झांसा देकर छात्र छात्राओं से लाखों रुपए लिए गए थे।

बिना कार्रवाई 282 'अवैध' डिग्रियों पर लगाई मुहर

जगदगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के संबंद्ध कॉलेजों में तय सीटों से अधिक छात्रों को परीक्षा में बैठाने का फर्जीवाड़ा सामने आया था। सत्र 2023-24 में विश्वविद्यालय के संबंद्ध कॉलेजों ने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन (पीजीडीसीए) और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा योग थेरपी (पीजीडीवाईटी) कोर्स में 400 सीटों पर 682 छात्रों को बैठा दिया।

यूनिवर्सिटी ने इन छात्रों को डिग्रियां भी दे दी। ऐसे में 282 डिग्रियां छात्रों को गलत तरीके से दी गई। यूनिवर्सिटी ने इन दोषी कॉलेजों से जुर्माना लेकर इतिश्री कर ली, लेकिन कॉलेजों पर कार्रवाई नहीं की गई न ही छात्रों से डिग्रियां वापस ली गई।