
अमरनाथ से लाइव रिपोर्ट : दुर्गम यात्रा होने के बाद भी भोलेनाथ के दरबार में देशभर में पहुंचते हैं श्रद्धालु
अमरनाथ से खुशालसिंह भाटी
जालोर. भगवान शिव भोले हैं और महाकाल का रूप भी। यह बात बचपन से सुनता आया हूं, लेकिन इसका वास्तविक ज्ञान खुद मुझे बाबा बर्फानी (अमरनाथ) की यात्रा के दौरान देखने को मिला। यहां भगवान शिव की ही परम सत्ता है और उनकी कृपा के बिना दर्शन तो दूर यहां तक कोई पहुंच तक नहीं सकता। मैं मेरे साथियों के साथ इसी महीने की 24 जुलाई को बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रवाना हुआ। श्रीनगर पहुंचे, उससे पहले ही हमें जानकारी मिली की इस बार बाबा बर्फानी समय से पहले ही विलुप्त हो गए। मैं और मेरे साथी यह बात सुनकर कुछ मायूस हो गए और वापस लौटने का विचार घर कर गया। तभी श्रीनगर टैक्सी यूनियन के जोनल सेक्रेटरी से मुलाकात हुई। वे मुस्लिम थे और उम्र 55 से बाहर की होगी। उनका कहना था बाबा के दर्शन बड़ी बात है, लेकिन उससे काफी बड़ी बात उस दिव्य स्थान तक पहुंचने में है। फिर क्या था हिम्मत और होसला मिला तो अगले दिन हम नीलग्रंथ पहुंचे और वहां से हेलिकॉप्टर में सवार होकर पंचतरणी पहुंचे तो लगा अब आगे का सफर आसान होगा। यहां से अमरनाथ यात्रा ८ किमी की है। करीब 500 मीटर दुर्गम चढ़ाई के बाद ही सांस फूलने लगी और लगा कि ८ किमी की चढ़ाई हमारे लिए सम्भव नहीं है। इस बीच लौटने वालों ने हौंसला बढ़ाया और हम भी बाबा के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते गए। कुछ ही देर में सारी थकान काफूर हो गई। बाबा में अटूट विश्वास और श्रद्धा के साथ सफर शुरु किया तो ऐसा महसूस हुआ कि शिव खुद हमारे साथ चल रहे हैं और हमें सम्बल दे रहे हैं। 3 घंटे की चढ़ाई के बाद हम बाबा के दरबार पहुंच गए। यहां का नजारा कुछ अलग ही था। शिवलिंग जरूर पिघल गया था, लेकिन बड़े हिस्से में बर्फ जमा थी। दर्शन के दौरान इतना भावुक हो गया कि बाबा से कुछ मांग न सका। सोचा वे भोले हैं भक्त के मन की बात सब जानते हैं। दर्शन के बाद हम फिर पंचतरणी पहुंचे, लेकिन वहां मौसम खराब हो गया और रात में यहीं रुकना पड़ा। सर्द, बर्फीले और बारिश के मौसम में हमने रात एक टेंट में गुजारी। यहां तापमान करीब 5 डिग्री से कम था।
11 हजार फीट पर मैच
मौसम खराब होने पर रास्ते और हेलिकॉप्टर सेवा भी बंद हुई तो 11 हजार फीट की ऊंचाई पर क्रिकेट मैत्री मैच खेला गया। जिसमें देश के कोने-कोने से आए दर्शनार्थियों ने हिस्सा लिया। मैच में मैंने भी हाथ आजमाया। कोलकाता से आए शिव नारायण भट्टाचार्य बंगाली टच की टूटी फूटी हिंदी में बतिया रहे थे, विशाखापतम के नारायण स्वामी और जम्मू के राजकुमार समेत कई लोग भी मैच में शामिल थे। सभी का यही कहना था कि क्षेत्रवाद से बढ़कर देश है।
चप्पे चप्पे पर सुरक्षा
यात्रा में सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध थे। सशस्त्र बल हर जगह तैनात था। पहाड़ी पर जगह जगह बर्फ की मोटी परतें जमा थी और उस पर से पैदल और घोड़े-खच्चर पर सवार लोग यात्रा के लिए आगे बढ़ते नजर आए। सफर में बाबा के दरबार में खतरा बौना नजर आया। अलबत्ता मंगल कामना के साथ ये धार्मिक और दुर्गम यात्रा पूरी हुई। जय बाबा बर्र्फानी-जय भोले नाथ।
Published on:
29 Jul 2018 11:36 am
