
जसवंतपुरा में नियम विरुद्ध कर दिया भूमि का नियमन, अब माना प्रभाव शून्य माना
जालोर. जसवंतपुरा तहसील क्षेत्र में वर्ष 2015 के एक मामले में राजस्व मंडल की एकल पीठ ने गैर मुमकिन क्षेत्र में एक भूमि आवंटन के मामले पर निर्णय देते हुए उसे अवैध और प्रभाव शून्य माना है। 18 सितंबर को शिखर अग्रवाल की एकल पीठ में सरकार बनाम मोतीराम के मामले में सुनवाई के बाद यह निर्णय पारित किया गया। प्रकरण में रेफरेंस जिला कलक्टर जालोर ने राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 82 के अंतर्गत अपने निर्णय दिनांक 2 जून 2015 को अनुशंषा करते हुए मंडल को प्रेषित किया। इस मामले में तहसीलदार जसवंतपुरा ने अधीनस्थ न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर निवेदन किया कि अप्रार्थी को खतौनी बंदोबस्त संवत 2066-69 जसवंतपुरा के खाता संख्या 313 में 99 वर्ष की लीजधारक बनाया गया। वहीं कलक्टर के आदेश 7 मई 2003 के जरिये जसवंतपुरा के खसरा नंबर 233 रकबा 0.07 हैक्टेयर धर्मशाला एवं छात्रावास निर्माण के लिए आंजणा समाज देवलाटी परगना जसवंतपुरा को 99 साल की लीज पर आवंटन किया गया। आदेश की पालना में नामांतरण संख्या 411 दायर किया गया, जिसे तहसीलदार भीनमाल द्वारा 7 नवंबर 2003 को स्वीकृत किया गया। जिसके बाद यह भूमि छात्रावास आंजणा समाज के नाम जमाबंदी में दर्ज है। जबकि यह भूमि प्रथम सेटलमेंट के समय से ही राजस्व अभिलेष में गैर मुमकिन वाला दर्ज थी। मामले में विवादित भूमि को लेकर की गई इस कार्रवाई में राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 16 के विपरीत होने से अवैध व प्रभाशून्य है। बहन सुनने के बाद विवादित भूमि को सिवाय चक दर्ज कर उसकी किस्म गैर मुमकिन वाला के रूप में राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने के आदेश हुए।
Published on:
25 Sept 2019 07:46 am
