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भाई की गाड़ी छुड़ाने के लिए किए थे फर्जी हस्ताक्षर, मिली दो साल की सजा

19 साल पुराने मामले में न्यायालय के साथ छल करने के आरोपी को दो वर्ष का कारावास
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भाई की गाड़ी छुड़ाने के लिए किए थे फर्जी हस्ताक्षर, मिली दो साल की सजा

सांचौर. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट सांचौर ने न्यायालय के साथ छल करने के 19 साल पुराने मामले में आरोपी को दो वर्ष के कारावास व 5 हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। मामले के अनुसार कच्छ गुजरात निवासी रणजीतसिंह पुत्र मानसिंह ने हरिपुरा कच्छ निवासी शेरसिंह पुत्र मानसिंह के जब्त वाहन की सुपुर्दगी को लेकर पुलिस थाना सांचौर में आवेदन किया। जिस पर आवेदनकर्ता के हस्ताक्षर आरसी बुक से मिलान किए गए, लेकिन दोनों में अंतर था। इसके बाद आवेदनकर्ता को तसल्ली के लिए दोबारा पूछा गया तो उसने अपना नाम रणजीतसिंह पुत्र मानसिंह चौधरी व शेरसिंह का भाई होना बताया। उस समय न्यायालय में मौजूद अधिवक्ताओं व कर्मचारियों की मौजूदगी में उसने यह स्वीकार किया कि वह शेरसिंह बनकर न्यायालय से सुपुर्दगीनामे पर वाहन लेने आया था।
जिस पर तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सांचौर थानाप्रभारी ने मामला दर्ज कर बाद अनुंसधान आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मामले पर गंभीर विचार करने के बाद न्यायालय का मत रहा कि ऐसे मामलों में आरोपितों के विरुद्ध नरमी का रुख अपनाने पर अपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों में न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की भावना प्रबल होगी। साथ ही आमजन का न्यायालय व कानून पर से विश्वास समाप्त हो जाएगा जो किसी ना किसी रूप में समान प्रकृति के अपराधों को बढ़ावा देने वाला होगा। इस पर मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य से आरोपित रणजीतसिंह के विरुद्ध अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सांचौर जितेन्द्र गोयल ने दो वर्ष के कारावास व 5 हजार रुपए के अर्थदण्ड की सजा सुनाई।