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रोडवेज बसों में कन्डक्टर से लेकर ड्राइवर तक करते हैं माल की डिलीवरी, अधिकारी बेपरवाह

निजी ट्रावेल्स की बसों में भी हर रोज बाहरी राज्यों से आ रहा माल
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Delivery of the goods in Rajasthan Roadways buses

Delivery of the goods in Rajasthan Roadways buses

जालोर. यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई जाने वाली राजस्थान रोडवेज की अधिकतर बसों में कन्डक्टर से लेकर बस चालक लम्बे समय से माल की डिलीवरी का काम धड़ल्ले से कर रहे हैं। इसके बावजूद ना तो रोडवेज के आला अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई की जा रही है और ना ही परिवहन विभाग की ओर से। और तो और शहर से गुजरने वाली निजी ट्रावेल्स की बसों में भी ट्रांसपोर्टेशन का खेल खुले आम चल रहा है। अधिकतर निजी बसों में ऐसे खांचे बना रखे हैं, जिनमें काफी मात्रा में माल भरकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा है, लेकिन वाणिज्यिक कर विभाग व परिवहन विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक तक
नहीं लग पाती है। हालांकि मुखबीर की सूचना पर विभाग की ओर से कभी कभार कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन रोडवेज व निजी बसों में माल की डिलीवरी का खेल हर रोज चल रहा है।
लेते हैं डिलीवरी चार्ज
रोडवेज बसों में ड्राइवर या कण्डक्टर के जरिए माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की एवज में बाकायदा डिलीवरी चार्ज भी दिया जाता है। छोटी से छोटी चीज के लिए कम से कम पचास रुपए, जबकि पार्सल बड़ा होने पर चार सौ से पांच सौ रुपए भी लिए जाते हैं। अधिकतर बसों में इस तरह के पार्सल ड्राइवर की सीट के पास या बस के केबिन में ही रखे जाते हैं।
इसलिए बच जाते हैं कार्रवाई से
जालोर डिपो से चलने वाली अधिकतर रोडवेज बसों में कैमरे तो लगा रखे हैं, लेकिन इनमें से कई कैमरे खराब हो चुके हैं। जिसके कारण बस में ड्राइवर व कण्डक्टर की ओर से ले जाए जाने वाले सामान के बारे में अधिकारियों को जानकारी तक नहीं मिलती और वे कार्रवाई से बच जाते हैं।
यह है नियम...
नियमों के मुताबिक रोडवेज बसों में सिर्फ यात्री के साथ ही सामान लाया या ले जाया जा सकता है और सामान अधिक होने पर रोडवेज इसका शुल्क भी वसूल सकता है। कई बार यात्रियों के साथ सामान अधिक होने पर इसका अलग से टिकट भी बनाया जाता है, लेकिन कई बार इसका टिकट तक काटा नहीं जाता और राशि ड्राइवर या कण्डक्टर की जेब में चली जाती है। इसके अलावा इन बसों में पार्सल मंगवाया या भेजा नहीं जा सकता। इसके बावजूद ड्राइवर व कण्डक्टर ये काम धड़ल्ले से कर रहे हैं।
निजी ट्रावेल्स में...
शहर से गुजरने वाली अधिकतर निजी ट्रावेल्स की बसें या तो देर रात को पहुंचती है या फिर अलसुबह तीन से छह बजे के बीच में। ऐसे में रात के समय अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंच पाते। जिसके कारण माल की डिलीवरी का काम आसानी से किया जा रहा है। इनके कई बार बिना बिल-बिल्टी का सामान भी शामिल होता है। जिससे टैक्स की चोरी भी हो रही है।
उडऩदस्ते की कार्रवाई भी फोरी
जालोर से चलने वाली रोडवेज बसों में उडऩदस्ते की ओर से भी कार्रवाई के दौरान बस में सवार यात्रियों और उनकी संख्या के मुताबिक काटे गए टिकट की ही जांच की जाती है। ऐसे में बस की डिग्गी या केबिन में रखे सामान पर कोई ध्यान तक नहीं दिया जाता है। जिसकी एवज में मिलने वाली राशि कण्डक्टर और ड्राइवर की जेब में ही जा रही है।