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यहां मरने लगे बंदर, जानिए क्यों

मानसून की बेरुखी से वन्य क्षेत्र में आई भोजन पानी की कमी, मर रहे जीव जंतु- सुंधा माता कंजर्वेशन रिजर्व एरिया में हालात विकट, भालू अभयारण्य में भी पानी की कमी से मर रहे जीव जंतु, गर्मी के मौसम में हालात होंगे विकट
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मानसून की बेरुखी से वन्य क्षेत्र में आई भोजन पानी की कमी, मर रहे जीव जंतु - सुंधा माता कंजर्वेशन रिजर्व एरिया में हालात विकट, भालू अभयारण्य में भी पानी की कमी से मर रहे जीव जंतु, गर्मी के मौसम में हालात होंगे विकट

जसवंतपुरा. पिछले साल मानसून की बेरुखी के बाद सर्दी के मौसम में ही वन क्षेत्र में आई भोजन और पानी की कमी से वन्य जीवों पर संकट के बादल गहरा गए हैं और जीव जंतुओं की मौत हो रही है। सुंधा माता कंजर्वेशन रिजर्व एरिया के रूप में पहचान हासिल कर चुके इस क्षेत्र में भालू और बंदर काफी तादाद में है। लेकिन पिछले साल बारिश की कमी के चलते हालात विकट हो चुके हैं और अब यहां जीव जंतुओं के कंगाल देखने को मिल रहे हैं। सीधे तौर पर यहां भोजन और पानी की कमी के चलते ये हालात पैदा हो रहे हैं। इससे पूर्व वर्ष 2013 में भी इसी तरह के हालात पैदा हो चुके हैं। जब विभाग की लापरवाही और अनदेखी के चलते वन क्षेत्र मुख्य रूप से भालुओं की मौत हुई।
लाखों खर्च के बाद भी ये हाल
कंजर्वेशन रिजर्व एरिया और भालू अभयारण्य के रूप में पहचान रखने वाले इस क्षेत्र के लिए सालाना लाखों रुपए सरकार की ओर से आवंटित किए जाते हैं, लेकिन विभाग की ओर से लचर मॉनिटरिंग और अनदेखी के चलते बजट का सही रूप में उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर सवालिया निशान है। जंगलों पर लाखों रुपए के बजट खर्च कर चार दीवारी पेड़ पौधों आदि पर खर्च कर किया जाता है।
वैकल्पिक व्यवस्थाओं की अनदेखी
भालुओं और अन्य वन्य जीवों के लिए मुख्य रूप से पेयजल के लिए झरने और शिखर पर बना तालाब मुख्य स्रोत हैं, लेकिन पिछले साल कम बारिश से ये सभी स्रोत सूखे हैं। क्षेत्र में कुएं जरुर है, जिससे पेयजल की व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन विभाग की ओर से पहल नहीं की जा रही। क्षेत्र में लाखों रुपए खर्च कर करीब 5 साल पूर्व यहां गलजर (टांके) भी बनवाए गए थे, जिन्हें ट्यूबवैल के पानी से भरा जाना था, लेकिन विभाग की अनदेखी से यह कार्य भी नहीं हो पा रहा है। हर साल जसवंतपुरा के राबडऩाथ पहाडी व जाबुओं झरनों, माताजी में बारिश के दौरान झरनों का बहाव होता है, लेकिन इस पानी के संरक्षण की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में जब कभी कम बारिश होती है तो वन्य जीवों पर संकट खड़ा हो जाता है।
बढ़ेंगे हमले
जब भी कम बारिश होती है तो वन क्षेत्रों में भोजन और पानी की कमी के चलते वन्य जीवों का आबादी क्षेत्र में रुख होता है। इसमें मुख्य रूप से भालू होते हैं। अल सवेरे पानी की तलाश में आबादी की तरफ पहुंचने पर लोगों का इन वन्य जीवों का सामना होता है। हर साल भालुओं के हमले से ग्रामीण घायल होते हैं और मुख्य रूप से गर्मी के मौसम में ऐसे हालात होते है। लेकिन इस बार पानी और भोजन की कमी से ऐसे हालात पहले ही देखने को मिल सकते हैं।
इनका कहना
जसवंतपुरा लोहियागढ़ व राबडऩाथ पहाडिय़ों में पानी की किल्लत से जंगली जानवर मर रहे है। वन विभाग की ओर से मामले में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गर्मी में हालात विकट होंगे।
- विक्रम पुरोहित, वन्य जीव पर्यावरण समिति सदस्य
पानी की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई बजट नहीं आया है। हमारे द्वारा दानदाता के सहयोग से गलजरों में पानी भरा जाएगा।
- प्रवीणसिंह, क्षेत्रीय वन अधिकारी, जसवंतपुरा