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RTI में चौकाने वाला खुलासा : … तो कहां से आई इन दफ्तरों में AC

आरटीआई के तहत पुलिस महकमे ने दी चौंकाने वाली जानकारी
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जालोर

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Dinesh kumar Mali

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Updated: 21 Nov 2017, 11:10 AM IST

Jalore News

AC in Police Deputy Office

सरकारी दफ्तरों में एसी का खेल : आरटीआई में जवाब-नहीं किया गया एसी का आवंटन

जालोर. जिला मुख्यालय पर स्थित पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों में लगाए गए एसी के मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है।

जालोर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता हीराचंद भंडारी की ओर से गत ६ सितम्बर को लोक सूचना अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पीडी धानिया से पुलिस कोतवाली थाना और वृत्ताधिकारी के कार्यालय में लगाए गए एसी से संबंधित सूचना मांगी थी। इस पर गत ५ अक्टूबर को पेश किए गए जवाब में पुलिस अधीक्षक कार्यालय सामान्य शाखा प्रभारी की ओर से यह सूचना दी गई कि पुलिस कोतवाली थाना और वृत्ताधिकारी के कार्यालय में उनकी ओर से किसी प्रकार का एसी आवंटित ही नहीं किया गया है।

वहीं पुलिस मुख्यालय जयपुर की ओर से भी इस जिले को एक भी एसी आवंटित नहीं किया गया है। इसके अलावा जवाब में यह भी कहा गया कि पुलिस मुख्यालय के एसपी मुकुट बिहारी की ओर से इस संबंध में जारी किया गया पत्र उन्हें मिला ही नहीं है। जबकि इसकी एक प्रति खुद आरटीआई कार्यकर्ता भंडारी ने विभाग को उपलब्ध कराई थी। जिसमें एसी से संबंधित गाइडलाइन का उल्लेख किया गया है। गौरतलब है कि प्रदेश भर के सरकारी दफ्तरों में कार्यरत अधिकारी लम्बे समय से लेखा नियमों का उल्लंघन कर जनता के पैसों से मौज उड़ा रहे हैं।

...आखिर कहां से आए एसी

आरटीआई में मांगी गई सूचना के जवाब में पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सामान्य शाखा से यह जवाब मिला है कि ना तो उनकी ओर से एसी का आवंटन किया गया है और ना ही जयपुर पुलिस मुख्यालय से कोई एसी प्राप्त हुए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि पुलिस कोतवाली थाना और डीएसपी कार्यालय समेत अन्य जगहों पर लगाए गए एसी आखिर कहां से आए। अगर इन्हें खरीदा भी गया है तो किस बजट मद और किस नियम के तहत। ऐसे में जब मुख्यालय की ओर से एसी प्राप्त ही नहीं हुआ है तो नियमविरुद्ध इन्हें लगाकर बेवहज हर साल लाखों रुपए का बिजली खर्च भी बढ़ाया जा रहा है। जिससे राजकोष को भी चूना लग रहा है।

पत्रिका ने प्रकाशित किया था समाचार

सरकारी दफ्तरों में बिना नियम कायदों के लगा रखे एसी को लेकर पत्रिका ने गत ७ जुलाई के अंक में 'राजकोष को चूना लगाकर दफ्तर में साहब ले रहे हैं एसी का आनंदÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया गया था कि राजधानी को छोड़कर करीब-करीब हर जिले में ऐसे १५ से २० अधिकारी ही हैं जो इसके लायक हैं। जबकि हकीकत में अधिकतर अधिकारियों ने विभागीय बजट मंगवाकर कक्ष में एसी लगवा लिए।

ये ही लगा सकते हैं कार्यालय में एसी

आरटीआई के तहत मिली सूचना में बताया गया था कि लेखा नियमों के तहत 76 00 ग्रेड पे वेतनमान वाले सीनियर आरएएस व आरपीएस, मुख्य लेखाधिकारी, एसई, संयुक्त निदेशक कृषि, निदेशक संस्कृत शिक्षा, अपर निदेशक आयुर्वेद/ आबकारी/ बीमा/ जनसंपर्क, उपायुक्त वाणिज्यिक कर, संयुक्त निदेशक शिक्षा (रेंज), उप सचिव (सचि.), उप रजिस्ट्रार (उच्च न्यायालय), सीएमएचओ, संयुक्त निदेशक उद्योग, संयुक्त श्रम आयुक्त, वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सा, औषधि नियंत्रक, एसोसिएट प्रोफेसर, अधीक्षण खनन अभियंता, संयुक्त परिवहन आयुक्त, वरिष्ठ नगर नियोजक, निदेशक प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी, एसीईओ ग्रामीण विकास, महानिरीक्षक कारागार, डिप्टी कमाण्डेंट जनरल, होमगार्ड (२३.९.१४) व संयुक्त आयुक्त खाद्य (०१.७.१३) के कक्ष में एसी लगाया जा सकता है।

इनका कहना है...

आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी, जिसमें लोक सूचना अधिकारी ने जो जवाब दिए गए हैं उसके अनुसार एसी खरीद में पूरी तरह अनियमितता सामने आ रही है। वहीं नियम विरुद्ध लगे एसी की वजह से राजकोष को भी चूना लगाया जा रहा है।

- हीराचंद भंडारी, आरटीआई कार्यकर्ता