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परिषद का फरमान, वसूलेगी जुर्माना, कचरा संग्रहण वाहनों में ही नहीं व्यवस्था, फिर कैसी कार्रवाई!

घर-घर कचरा संग्रहण वाहनों में नहीं है गीला और सूखा कचरा डालने की व्यवस्था
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door to door Garbage Storage Vehicles

door to door Garbage Storage Vehicles

धर्मेन्द्र रामावत
जालोर. देश भर में स्वच्छता को लेकर केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत नगर निकायों को भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जिला मुख्यालय पर ही नगरपरिषद के अधिकारी इसको लेकर गम्भीर नजर नहीं आ रहे हैं। दरअसल, राज्य भर के नगर निकायों में कचरा निस्तारण को लेकर घर-घर कचरा संग्रहण वाहनों का संचालन किया जा रहा है। जिला मुख्यालय पर भी ये वाहन डोर-टू-डोर जाकर कचरा संग्रहित कर रहे हैं। घरों से इक_ा किए जाने वाले कचरे के निस्तारण के लिए हाल ही में नए निर्देश जारी किए गए हैं। जिसके तहत सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रंग की बाल्टी में इक_ा करना जरूरी है। वहीं कचरा संग्रहण वाहनों में भी इस कचरे को डालने के लिए अलग-अलग रंग के केबिन होने जरूरी हैं, लेकिन शहर में चलाए जा रहे कचरा संग्रहण वाहनों में गीला और सूखा कचरा डालने के लिए अलग-अलग केबिन नहीं बने हैं। ऐसे में शहरवासी गीला और सूखा कचरा एक साथ ही इन वाहनों में डाल रहे हैं। जबकि नगरपरिषद ने इसके लिए गत 18 दिसम्बर को एक दैनिक समाचार पत्र में हजारों रुपए का विज्ञापन लगाकार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन में जारी किए फरमान
गत 18 दिसम्बर को नगरपरिषद की ओर से एक दैनिक समाचार पत्र में जारी किए विज्ञापन में शहरवासियों को सख्त हिदायत दी गई है। इसमें बताया गया है कि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रंग की बाल्टी में इक_ा नहीं करने पर संबंधित के खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं दोबारा जांच के दौरान ऐसा पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। जबकि हकीकत पर गौर करें तो नगरपरिषद की ओर से शहर में चलाए जा रहे कचरा संग्रहण वाहनों में गीला और सूखा कचरा डालने के लिए अलग-अलग केबिन तक नहीं है।
परिषद को हो सकती है आय
नगरपरिषद की ओर से चलाए जा रहे कचरा संग्रहण वाहनों में सूखा और गीला कचरा इक_ा करने की योजना से परिषद आय भी कमा सकती है। गीले कचरे में फल, सब्जी व अन्य खाने-पीने की वस्तुएं इक_ा कर इससे जैविक खाद तैयार की जा सकती है। वहीं सूखे कचरे को री साइकिल किया जा सकता है। परिषद इसकी व्यवस्था करती है तो इसके बाद टेंडर जारी कर इससे अच्छा-खासा मुनाफा भी कमाया जा सकता है।
दर्जन भर हैं वाहन
नगरपरिषद क्षेत्र के कुल तीस वार्डों में रोजाना कचरा संग्रहण के लिए करीब दर्जन भर वाहन चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से करीब-करीब सभी वाहनों में गीला और सूखा कचरा इक_ा करने के लिए अलग-अलग रंग के केबिन की कोई व्यवस्था ही नहीं है। जबकि विज्ञापन में बताया गया है कि नगरपरिषद की इन गाडिय़ों में दो हरे व नीले रंग के केबिन हैं। गीला कूड़ा हरे, जबकि सूखा कूड़ा नीले रंग के केबिन में डालने के निर्देश दिए गए हैं।
शुरू हुई स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की कार्यवाही
गौरतलब है कि राज्य भर में स्वच्छता सर्वेक्षण २०१९ को लेकर कार्यवाही शुरू हो चुकी है। यह बात भी इसी विज्ञापन में बताई गई है। इसके तहत स्वच्छता के मामले में नगर निकायों की रेंकिंग की जानी है। ऐसे में यह साफ है कि अधिकारी स्वच्छता के प्रति महज औपचारिकता बरत रहे हैं। इससे जालोर नगरपरिषद क्षेत्र की रेंकिंग पर भी काफी विपरीत असर पड़ेगा।
विज्ञापन में ये भी निर्देश
नगरपरिषद की ओर से पखवाड़े भर पहले जारी किए गए इस विज्ञापन में प्रतिबंधित पॉलीथिन या प्लास्टिक के सामान का उपयोग व बिक्री करते पाए जाने पर भी कार्रवाई के अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान है। वहीं नगरपरिषद क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति या एजेंसी किसी भी प्रकार के निर्माण में 25 या इससे अधिक मजदूर लगाता है तो इसके लिए शौचालय की व्यवस्था अपने स्तर पर करनी होगी। वहीं मोबाइल शौचालय के लिए नगरपरिषद से संपर्क करना होगा। अगर उसकी ओर से लगाए गए मजदूर खुले में शौच करते पाए जाते हैं तो जुर्माना वूसला जाएगा। इसके अलावा वाणिज्यिक, रिहायशी भवन, मिष्ठान भंडार, डेयरी, दुकान व कारखाना से निकला कचरा या मलबा सड़क पर या गलियों में डालने पर नोटिस की 24 घंटे में पालना नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई व जुर्माना वसूला जाएगा।