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किसानों को चाहिए यूरिया, सहकारी समितियों ने हाथ झटके

रबी की फसल को यूरिया (उर्वरक) की जरूरत है, लेकिन सहकारी समितियों में उपलब्ध ही नहीं है। उर्वरक कंपनियों को डिमांड भेजी है, लेकिन कब तक उपलब्ध हो पाएगा यह नहीं कहा जा सकता। एक तरह से समितियों ने मानों हाथ ही झटक दिए हैं।
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jalore#sanchore#yurea

किसानों को चाहिए यूरिया, सहकारी समितियों ने हाथ झटके

जीतेश रावल @ जालोर. इन दिनों रबी की फसल को यूरिया (उर्वरक) की जरूरत है, लेकिन सहकारी समितियों में उपलब्ध ही नहीं है। अधिकारी बताते हैं कि उर्वरक कंपनियों को डिमांड भेजी गई है, लेकिन कब तक उपलब्ध हो पाएगा यह नहीं कहा जा सकता। ऐसे में एक तरह से सहकारी समितियों ने मानों हाथ ही झटक दिए हैं। उधर, किसान सहकारी समितियों के चक्कर दर चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन यूरिया उपलब्ध नहीं हो पा रहा। इससे किसान निजी दुकानों पर जाने को मजबूर है। दुकानदार भी ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में यूरिया के साथ अन्य चीजें पकड़ा रहे हैं। यूरिया की जरूरत होने से किसान मन मसोसकर अनचाही चीजें भी लेने को विवश हैं।

https://www.patrika.com/jalore-news/urea-of-rs-1-5-crore-borrowed-in-cooperatives-3841712/
यूरिया चाहिए तो हुमीक एसीड भी लो
किसानों ने बताया कि सहकारी समिति में जाने पर उसे बताया गया कि यूरिया नहीं है। इस पर उसने निजी दुकान से यूरिया खरीदा, लेकिन दुकानदार ने उसे दस कट्टे हुमीक एसीड भी थमा दिया। यह लेने से मना करने पर यूरिया देने से भी इनकार कर दिया। हालांकि हुमीक एसीड को भी फसल में डाल सकते हैं, लेकिन यूरिया लेने की खातिर बगैर जरूरत खरीदने की मजबूरी बन रही है।
आहोर में अर्से से नहीं, जालोर में भी खत्म
जालोर व आहोर में उपखंड मुख्यालय पर स्थित होलसेल मार्केटिंग सोसायटी में ही कई दिनों से यूरिया उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि आहोर में पिछले कुछ माह से यूरिया आया ही नहीं। जालोर में पड़े यूरिया को दोनों ब्लॉक के किसान ले गए, जिससे जल्द ही खत्म हो गया। माल नहीं मंगवाने से सोसायटी तक आने वाले किसान निराश लौट रहे हैं। तीखी, पहाड़पुरा, सांफाड़ा, बागरा, नारणावास समेत जालोर, आहोर व सायला ब्लॉक के विभिन्न गांवों के किसान चक्कर काट रहे हैं।
फसलों को यूरिया की जरूरत
- कृषि विशेषज्ञ फूलाराम मेघवाल बताते हैं रबी की फसल में किसान दो फेज में यूरिया डालते हैं। बुवाई के बाद अब दूसरी बार यूरिया की जरूरत है। इन दिनों खेतों में खड़ी सरसो, जीरा, इसबगोल, गेहूं आदि की फसलों में पाण के बाद व कई जगह पाण के साथ-साथ यूरिया डाला जा रहा है।
मांग बढ़ी पर नहीं मंगवाया
- बताया जा रहा है कि होलसेल मार्केटिंग सोसायटी में आने बाद ही गांवों में स्थित सोसायटी तक माल पहुंचता है। आहोर व जालोर सहकारी समिति में यूरिया नहीं होने से गांव स्तर तक भी नहीं पहुंच रहा। मांग बढऩे के बावजूद सोसायटियों में यूरिया नहीं आने से किसान निजी दुकानों में जा रहे है।
डिमांड भेजी है...
सोसायटी में यूरिया पड़ा था, जिसे बेचा जा चुका है। कुछ दिन पहले ही दो हजार मीट्रिक टन यूरिया व सौ मीट्रिक टन डीएपी की मांग भेजी गई है। माल आने पर वितरित करेंगे।
- गेनाराम,मैनेजर, को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी, जालोर

गुणवत्ता युक्त उर्वरक खरीदें...
किसानों को सोसायटी के जरिए भी यूरिया मिलना चाहिए, ताकि समितियों के सदस्य किसान लाभान्वित हो सके। इसके लिए अधिकारियों को लिखा गया है। वैसे यूरिया की कमी नहीं है। किसानों को लाइसेंसी दुकानों से गुणवत्ता युक्त उर्वरक खरीदना चाहिए।
- डॉ. आरबी सिंह,कृषि उप निदेशक, जालोर