16 जून 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जोगेश्वर गर्ग के समर्थन में बोले थे अटल, बड़ी से छोटी दाढ़ी को लड़ा रहा हूं…

जालोर में लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए 1991 में आए थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

2 min read
Google source verification
Atal Bihari Vajpayee

in support of Jogeshwar Garg Atal Bihari Vajpayee had spoken

जालोर. अस्पताल चौराहे पर आज से करीब 27 साल पहले भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी। वाजपेयी 1991 के लोकसभा चुनाव के लिए तत्कालीन प्रत्याशी जोगेश्वर गर्ग के समर्थन में सभा को सम्बोधित कर रहे थे। गर्ग के सामने पूर्व केन्द्रीय गृह मंत्री सरदार बूटासिंह थे। बूटासिंह बड़ी दाढ़ी रखते थे और भैरोसिंह शेखावत की सरकार में आयुर्वेद राज्यमंत्री रह चुके गर्ग छोटी दाढ़ी रखते थे। वाजपेयी अपने भाषण में गुरु गोविंदसिंह महाराज के प्रसिद्ध वाक्य चिडि़य़ां नाळ बाज लड़ाऊं... को याद करते हुए बोले जालोर वासियों! मैं बड़ी दाढ़ी से छोटी दाढ़ी को लड़ाने आया हूं आप लाज रखना। हालांकि बाद में राजीव गांधी की हत्या के चलते कांग्रेस के पक्ष में लहर चली और बूटासिंह चुनाव जीत गए थे। उस वाकये को याद करते हुए जोगेश्वर गर्ग बताते हैं कि वाजपेयी को सुनने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ी थी। भाजपा जिलाध्यक्ष रविन्द्रसिंह बालावत बताते हैं कि जालोर के उस कार्यक्रम में मंच संचालन का मौका मिला था और वाजपेयी उनके हीरो थे। वाजपेयी का छोटी दाढ़ी-बड़ी दाढ़ी का कथन आज भी राजनीतिक चर्चा का विषय होता है।
ग्रेनाइट से एक्साइज ड्यूटी हटाई
पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग बताते हैं कि बीजेपी सरकार के वक्त ग्रेनाइट पर जब एक्साइज ड्यूटी लगी तो यहां के उद्यमी उनके साथ प्रधानमंत्री से मिलने गए थे। उन्होंने सभी को बिठाकर बात सुनी और ड्यूटी को हटा दिया। यहां से ग्रेनाइट एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष नरेन्द्र बालू और बीजेपी के मौजूदा प्रदेश कोषाध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा भी साथ थे। गर्ग के अनुसार 1995 में एससी मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान वाजपेयी माउंट आबू आए थे। गर्ग उस समय प्रदेशाध्यक्ष थे और बंगारू लक्ष्मण राष्ट्रीय अध्यक्ष। सम्मेलन का शुभारंभ सुंदरसिंह भंडारी ने किया था और समापन वाजपेयी ने। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर राजपुरोहित बताते हैं कि 1971 में भारत-पाक युद्ध के बाद शिमला समझौते के विरोध में वाजपेयी के साथ जालोर से वे गए थे। वहां पर उन्हें गिरफ्तार किया गया और वे वाजपेयी के साथ गडरासिटी की जेल में रहे। वहां उन्हें अटलजी के व्यक्तित्व से रूबरू होने का अवसर मिला। वे बहुत संजीदा और प्रभावी व्यक्तित्व थे।

वाजपेयी के निधन पर जताया शोक
जालोर. भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्रसिंह बालावत ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर श्रद्धांजलि प्रकट करते हुए कहा कि देश ने एक विराट व्यक्तित्व के धनी महापुरुष को खोया है। जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। वाजपेयी के व्यक्तित्व से वे भी भाजपा से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि वाजपेयी हमेशा देश के लिए जिए और उनकी कविताओं में भी उनका व्यक्तित्व झलकता था। इधर, भाजपा कार्यालय में जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में भाजपा नगर मण्डल जालोर के कार्यकर्ताओं ने वाजपेयी की तस्वीर पर पुष्पांजलि देकर उन्हें याद किया। इसी तरह वाजपेयी के निधन पर जिला प्रमुख डॉ. वन्नैसिंह गोहिल ने संवेदना व्यक्त की। गोहिल ने वाजपेयी को अनुकरणीय व्यक्तित्व का धनी, कवि व ओजस्वी वक्ता बताया। उनका नेतृत्व और प्रखरता वाला कार्यकाल पार्टी और देश के लिए विस्मरणीय रहेगा। जिला प्रमुख ने शोक के कारण लगातार तीन दिन तक कार्यालय के बजाय क्षेत्र में ही जनता के बीच कार्य करने की बात कह कर देशहित में श्रद्धांजलि दी।