तालाब में ही हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन, प्रशासन ने गड्ढा खोद कर की अलग से व्यवस्था

तालाब में ही हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन, प्रशासन ने गड्ढा खोद कर की अलग से व्यवस्था

Dharmendra Kumar Ramawat | Publish: Sep, 05 2018 10:45:53 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

जन्माष्टमी के दूसरे दिन कान्हा की प्रतिमाओं का गाजों-बाजों संग हुआ विसर्जन

जालोर. शहर सहित जिले भर में सोमवार को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। देर रात कृष्ण के जन्म पर घर-घर बधाइयां दी गई। डीजे संग महिलाओं व युवतियों ने कन्हैया की मिट्टी की प्रतिमा के सामने नृत्य भी किया और बाद में पंजरी का भोग लगाकर प्रसाद भी बांटा गया। जिला मुख्यालय पर भी गली-मौहल्लों में तालाब की माटी से कान्हा की प्रतिमाएं बनाई गईं। वहीं महिलाओं ने पूजा अर्चना के बाद रात भर भजन-कीर्तन भी किए। राधा और कृष्ण की प्रतिमा के समक्ष डांडिया रास भी खेला गया। वहीं अलगे दिन मंगलवार को कान्हा की प्रतिमाएं विसर्जित की गई। इस दौरान कान्हा के बिछोह में जहां युवतियों और महिलाओं के चेहरे उदास नजर आए। वहीं अगले बरस फिर से कन्हैया के जन्मोत्सव के इंतजार के साथ ही प्रतिमाओं का धूमधाम से विसर्जन किया गया। शहर में कन्हैया की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए मंगलवार सुबह से ही सुंदेलाव तालाब परिसर पर महिलाओं और युवतियों का तांता लगा रहा, लेकिन यहां प्रशासन की ओर से बेरिकेट्स लगाकर विसर्जन पर रोक लगा दी गई। ऐसे में महिलाओं और युवतियां काफी देर तक प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए परेशान नजर आई। इसके बाद तालाब के ओवरफ्लो के निकट ही एक गड्ढे में भरे पानी में कान्हा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। ताकि तालाब का पानी प्रदूषित नहीं हो।

प्रशासन ने की व्यवस्था

शहर स्थित सुंदेलाव तालाब में ही मंगलवार को राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया, लेकिन इससे तालाब के सौंदर्य और इसके पानी पर कोई असर नहीं पड़ा। वजह थी प्रशासन की ओर से इसके लिए अलग से की गई व्यवस्था। प्रशासनिक निर्देशों के तहत नगरपरिषद की ओर से तालाब परिसर में ही ओवरफ्लो के निकट एक गड्ढे में पम्प सेट से पानी भरा गया। इसी गड्ढे में भरे पानी में एक-एक कर कान्हा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

पहली बार की ऐसी व्यवस्था

सुंदेलाव तालाब पर इससे पहले हर साल विभिन्न पर्वों पर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता रहा है, लेकिन इस बार प्रशासन ने पारम्परिक रूप से तालाब परिसर में ही विसर्जन हो इसके लिए यहां अलग से गड्ढा खोदकर उसमें पंप सेट से पानी भरा गया। इसी गड्ढे में महिलाओं व युवतियों ने प्रतिमाओं का विसर्जन किया। साथ ही पूजन सामग्री भी इसी में डाली गई।

विसर्जन पर है रोक

हर साल कृष्ण जन्माष्टमी व गणेश चतुर्थी समेत अन्य पर्वों पर देवी-देवताओं प्रतिमाओं का पानी में विसर्जन किया जाता है, लेकिन केमिकल युक्त रंगों के प्रयोग से बनी प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगा रखी है। ऐसे में मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का ही पानी में विसर्जन किया जा सकता है। मगर इन प्रतिमाओं में भी केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। इसको लेकर तालाब पर भी प्रशासन ने बेरिकेट्स व नोटिस बोर्ड चस्पा कर प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगा रखी है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

Ad Block is Banned