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अनुबंध की बैसाखी के सहारे रोडवेज, बिन इलाज रोडवेज खुद भी है बीमार

रोडवेज ने सुविधा के लिए लगाया था अनुबंधित बसों को, लेकिन अब सुविधा के बजाय दुविधा बनी ये बसें
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Roadways contracted buses

Make Dissolved roadways contracted buses in Jalore

फैक्ट फाइल
65 बसें रोडवेज की संचालित होती हैं जालोर से
21 बसें अनुबंध पर चल रही
30 मई तक का भुगतान ही हुआ
2 माह का भुगतान अभी अटका
जालोर. खटारा बसों का बोझ झेल रहे राजस्थान रोडवेज की हालात अब और ज्यादा खस्ता हो चली है। हालात ये हैं कि अनुबंध पर लगी बसों से भी अब राजस्थान रोडवेज को किसी तरह की राहत नहीं मिल पा रही है।
जालोर डिपो की ही बात करें तो कुछेक लंबे रूट को छोड़ दे तो हर लंबे रूट पर अनुबंधित बसें लगी है, लेकिन अनुबंध पर लगी इन बसों के मालिकों को रोडवेज की ओर से समय पर भुगतान नहीं होने से अब इन बसों के पहिए भी थमने लगे हैं।
भुगतान नहीं होने पर इन बसों की मरम्मत तक नहीं हो पा रही है।यहां तक की बस की मुख्य जरुरत टायर तक बसों में पुराने हो चुके हैं और इन्हें नहीं बदलने से बसें केंसिल करनी पड़ रही है। जिससे एक तरफ यात्रियों को परेशानी का सामना तो करना पड़ ही रहा है। दूसरी तरफ रोडवेज डिपो को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। इन हालातों में जालोर डिपो की ओर से फिलहाल कई मौकों पर एवजी खटारा बसें भी चलानी पड़ी।
केस-1
जालोर से उदयपुर को चलने वाली अनुबंधित बस पिछले दो दिन से जालोर में ही खड़ी है, टायर खराब होने से ये हालात बने हैं, रोडवेज को प्रतिदिन १५ हजार का नुकसान
केस-2
जयपुर को चलने वाली अनुबंधित बस के पहिए भी कई बार थम चुके हैं। पिछले साल लेटा के पास डीजल टैंक खाली होने और करीब 3 माह पूर्व सांडेराव में तकनीकी गड़बड़ी।
केस-3
जालोर-बीकानेर और जालोर सूरत को चलने वाली अनुबंधित बसों के भी यही हाल है। इन दोनों रूट पर रोडवेज की आय बहुत ज्यादा है। बसें नहीं चलने पर एक बस से लगभग 30 हजार का नुकसान रोडवेज को
उदयपुर नोन स्टॉप पर लगा बे्रक
जालोर से सवेरे चलने वाली जालोर-उदयपुर वाया सिरोही रूट की अनुबंधित बस पिछले दो दिन से बस स्टैंड पर ही खड़ी है। यह बस जालोर से सवेरे चलकर सिरोही होते हुए दोपहर में उदयपुर पहुंचती है और शाम को करीब साढ़े छह बजे जालोर पहुंचती है। इसमें यात्री भार काफी अच्छा रहता है और रोडवेज की आय भी अच्छी है। लेकिन बस अनुबंध पर है और बस के टायर पुराने हो चुके हैं। ऐसे में संभावित हालातों को देखते हुए बस के चालक ने इसे रूट पर चलाने से इनकार कर दिया है। ऐसे में इस रूट पर अनुबंध के तहत चलने वाली यह बस दो दिनों से बंद है। ऐसे में यात्री इस नॉन स्टॉप बस को जल्द शुरू करने की मांग कर रहे है।
यूं समझें मामले को
रोडवेज स्टाफ की मानें तो मुख्य रूप से पंजाब की फर्म की अनुबंध पर लगी बसों से दिक्कत आ रही है।इनके संचालक पंजाब में है और पीछे कोई व्यवस्थापक तक नहीं है। भुगतान में थोड़ी देरी जरुर है, लेकिन उससे कई अधिक गड़बड़ी बेहतर कोर्डिनेशन की कमी से हो रही है। इन बसों के टायर पुराने हैं।साथ ही स्टेपनी और अन्य जरुरी औजार तक बसों में नहीं है। इधर, भुगतान की बात करें तो बिल पेश करने के बाद डिपो के स्तर पर किलोमीटर वेरिफिकेशन होता है। उसके बाद डीजल का खर्च का आंकलन होने के बाद एकाउंट्स के मार्फत डिमांड जयपुर हैडक्वार्टर को जाती है और वहां से इनका भुगतान होता है।
इनका कहना
अनुबंध की बसों का कई बार नहीं हो पाता है, जिससे दिक्कत आ रही है। बस चालकों को भुगतान नहीं होने व भुगतान समय पर नहीं होने से कई बार अनुबंधित बसों की रिपेयरिंग नहीं होने से भी संचालन प्रभावित हो रहा है।
- योगेंद्रसिंह, मैनेजर, ऑपरेशन, जालोर डिपो
देखरेख की कमी
मुख्य रूप से पंजाब के संचालक की अनुबंधित बसों से दिक्कत आ रही है। देखरेख के अभाव में बसों के टायर तक खराब हो चुके हैं। बसों में स्टेपनी और औजार तक न हीं है। बसों के ब्रेक डाउन होने पर रोडवेज को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- ओम प्रकाश लीलावत, एओ, जालोर डिपो