नर्मदा अधिकारी : धरनार्थी हमें गालियां दे रहे हैं... विधायक: पूरा पानी नहीं मिला तो आंदोलन होगा उग्र

नर्मदा अधिकारी : धरनार्थी हमें गालियां दे रहे हैं... विधायक: पूरा पानी नहीं मिला तो आंदोलन होगा उग्र
Narmda water supply in Sanchore area

Dharmendra Ramawat | Updated: 20 Aug 2018, 10:24:58 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

अधिकारियों ने धरनार्थियों पर अशोभनीय टिप्पणियां करने का लगाया आरोप, सरकारी परिसर से धरना नहीं हटाने पर सोमवार से सामूहिक रूप से कार्य के बहिष्कार की दी चेतावनी

नर्मदा चीफ इंजीनियर ने धरने को बताया गलत
सांचौर. नर्मदा नहर की वितरिकाओं में पानी छोडऩे की मांग को लेकर पिछले तीन दिन से धरने पर बैठे विधायक सुखराम बिश्नोई का आंदोलन सियासी रूप लेता जा रहा है। शनिवार को नर्मदा विभाग के अधिकारी व विधायक आमने-सामने हो गए।
विभाग जहां नहर में 500 क्यूसेक पानी छोडऩे का दावा कर रहा है, वहीं विधायक सुखराम बिश्नोई ने 600 क्यूसेक पानी छोडऩे के वादे का हवाला देते हुए पूरा पानी नहीं छोडऩे तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। साथ ही शनिवार से 53 लोग नर्मदा मुख्यालय के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठ गए।
विधायक ने मांगें नहीं मानने पर आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी दे डाली। विधायक ने आरोप लगाया कि 3 अगस्त को एसडीएम कार्यालय के समक्ष आयोजित धरने में विभाग के मुख्य अभिन्ता सहित आला अधिकारियों की मौजूदगी में 600 क्यूसेक पानी छोडऩे की बात हुई थी, लेकिन विभाग महज 250 क्यूसेक पानी छोड़ रहा है, जो वादाखिलाफी है। उन्होंने शनिवार को 300 लोगों के क्रमिक अनशन पर रहने का दावा करते हुए कहा कि नर्मदा अधिकारियों की हठधर्मिता की बदौलत वितरिकाएं सूखी पड़ी है। वहीं बारिश के अभाव में फसलें सूख रही है। नर्मदा विभाग समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। जिससे लोगों में रोष है जो कभी भी उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
विभाग ने यह दिया स्पष्टीकरण
नर्मदा नहर के मुख्य अभियंता गिरीश लोढा ने विधायक की ओर से दिए जा रहे धरने को अवैध बताते हुए बेवजह राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखित में स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि क्षेत्र में बारिश नहीं होने से सूखे की की आंशका, बाजरे की फसलें नहीं जले व पशुओं के हरे चारे के लिए वितरिकाओं में पानी देने को लेकर गुजरात सरकार से वार्ता के बाद सहमति बनी है। जिसके तहत सरदार सरोवर बांध का जल स्तर 110.95 होने पर औसतन 350 से 400 क्यूसेक पानी प्राप्त किया जा रहा है। वर्तमान में 500 क्यूसेक पानी प्राप्त करने की सहमति हो चुकी है व 477 क्यूसेक पानी प्राप्त हो गया है। 19 अगस्त को 500 क्यूसेक पानी लगातार प्राप्त करने के लिए गुजरात सरकार ने सहमति दे दी है। इस जल से सभी नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने के लिए चक्रीय पद्धति अपनाई जाएगी। जिसमें प्रत्येक सप्ताह समूह-ब 3.5 दिन इशरोल, रतौड़ा, केरिया, गांधव, भीमगुड़ा व माणकी वितरिका व समूह-अ 3.5 दिन सांचौर लिफ्ट, वांक, जैसला, बोलरा व भदरई लिफ्ट वितरिकाएं चला कर संम्पूर्ण कमांड में पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।
धरनार्थियों पर गालियां देने का आरोप
नर्मदा नहर परियोजना के मुख्य अभियन्ता के आवास के बाहर विधायक के नेतृत्व में दिए जा रहे धरने को लेकर जल संसाधन अभियंता संघ राजस्थान शाखा सांचौर ने शनिवार को आपात बैठक बुलाई। साथ ही धरनार्थियों पर मुख्य अभियन्ता, विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर व्यक्तिगत और परिवार पर अशोभनीय भाषा में टिप्पणीयां करने की निंदा की। वहीं विभागीय कार्मिकों के आवागमन में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया। संघ ने सरकारी परिसर में धरने की अनुमति नहीं देने की मांग करते हुए कहा कि सरकारी भवन से धरना नहीं हटाने पर सोमवार से सामूहिक रूप से कार्य का बहिष्कार किया जाएगा।
दो बार बुलाया, विधायक नहीं आए
नर्मदा मुख्य अभियन्ता लोढा ने विधायक पर धरने के नाम पर बेवजह अव्यवस्था पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन व विभाग ने दो बार वार्ता के लिए उन्हें बुलाया, लेकिन विधायक नहीं आए। जबकि प्रशासनिक टीम में एसडीएम व नर्मदा विभाग के अधिकारी सहित प्रशासनिक लवाजमा होने के बावजूद वार्ता के लिए विधायक नहीं आए।
इनका कहना...
नर्मदा विभाग के अधिकारी जानबूझकर मामले को उलझाना चाहते हैं। बारिश के अभाव में फसलें जल रही है। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन उग्र होगा। धरनार्थियों की ओर से अधिकारियों के प्रति किसी प्रकार की गलत भाषा का प्रयोग करने का आरोप गलत है।
- सुखराम बिश्नोई, विधायक, सांचौर
नर्मदा विभाग की गुजरात सरकार से वार्ता के बाद ५०० क्यूसेक पानी के लिए सहमति बनी है। ४७७ क्यूसेक पानी मिलना शुरू हो गया है। विधायक बेवजह धरना दे रहे हैं। चारे के लिए पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है। अब धरना देने का कोई औचित्य ही नहीं है।
-गिरीश लोढा, मुख्य अभियंता, नर्मदा नहर परियोजना, सांचौर
परियोजना के सरकारी कार्यालय परिसर व मुख्य अभियन्ता के आवास के समक्ष धरना देकर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर धरनार्थी पारिवारिक व व्यक्तिगत टिप्पणी कर रहे हैं जो गलत है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी परिसर में धरना देना भी गलत है। अगर धरने की इजाजत दी गई तो कार्मिक सामूहिक रूप से कार्य का बहिष्कार करेंगे।
- वासुदेव चारण, महासचिव, जल संसाधन अभियंता संघ, सांचौर

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