
जालोर के इस मंदिर में ऐसे मनाते हैं नृसिंह चतुर्दशी
जालोर. शहर समेत जिले भर में शुक्रवार को नृसिंह चतुर्दशी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के खरतरावास स्थित घनश्याम मंदिर में मंदिर के बाहर शाम के समय श्रद्धालुओं की लम्बी कतार लगी नजर आई। यहां हर कोई मंदिर के बाहर हाथ जोड़ नृसिंह भगवान के प्रकटीकरण का इंतजार कर रहा था। कतार में खड़े महिला-पुरुष व बच्चे नृसिंह भगवान के जयकारे लगा रहे थे। शुक्रवार देर शाम जैसे ही घनश्याम मंदिर में कृत्रिम खम्भा चीरकर भगवान का रूप धरे ७२ वर्षीय हुकमीचंद शर्मा मंदिर परिसर से बाहर निकले, जयकारे लगाते हुए श्रद्धालुओं की भीड़ आशीर्वाद लेने के लिए उनकी ओर उमड़ पड़ी।
काफी देर के इंतजार के बाद भगवन नृसिंह का मुखौटा पहने शर्मा जैसे ही कागज से बने कृत्रिम खम्भे को चीरकर प्रकट हुए, लोग उनके आशीर्वाद के लिए ऐसे उमड़े कि पैर रखने तक की जगह नहीं मिली। प्रकटीकरण के बाद यहां पहुंचे शहरवासियों ने नृसिंह भगवान का मुखौटा पहने शर्मा से आशीर्वाद लिया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी के रूप में ठंडा शर्बत, बिस्कीट व शक्कर के लड्डू वितरित किए गए। इस मौके गोविंद शर्मा, अम्बालाल सोनी, पंडित चंद्रप्रकाश शर्मा, लालकृष्ण सोनी, विनोद शर्मा, जयंतीप्रसाद शर्मा, देवेंद्र शर्मा, राकेश बंसल, रमेश अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल व तरुण सिद्धावत समेत कई जनों का सहयोग रहा।
हर साल निभाते हंै परम्परा
स्वर्णगिरी की तलहटी से महज थोड़ी दूर आबादी में स्थित घनश्याम मंदिर में नृसिंह चतुर्दशी के पर्व पर हर साल ऐसा ही आयोजन होता है। भगवान नृसिंह का मुखौटा पहनकर कृत्रिम खम्भा चीरने की यह परम्परा अभी से नहीं, बल्कि पिछले 9 दशकों यानी करीब 90 साल से चली आ रही है। यह आयोजन आजादी से पहले राजा-महाराजों के समय से चला आ रहा है। इस मंदिर का निर्माण भी उसी समय हुआ था।
50 किलो वजनी है मुखौटा
हर साल नृसिंह चतुर्दशी पर घनश्याम मंदिर के पट पर गत्ते से कृत्रिम खम्भा तैयार कर दरवाजे को बंद किया जाता है। इसके बाद निर्धारित समय पर भगवान नृसिंह का रूप धरकर व्यक्ति इसे चीरकर प्रकट होता है। इसमें भगवान नृसिंह का रूप धरे व्यक्ति करीब सवा मण यानी 50 किलो वजनी मुखौटा धारण करता है। मान्यता है कि भगवान का रूप धरे इस व्यक्ति से आशीर्वाद लेने पर घर में सुख-शांति के अलावा बीमारी का प्रकोप मिट जाता है।
यह भी है मान्यता...
नृसिंह चतुर्दशी पर भगवान के प्रकटीकरण के इस आयोजन के दौरान यह भी मान्यता है कि कृत्रिम रूप से बनाए गए इस खम्भे का कागज घर में या पास में रखने से किसी प्रकार का दोष, विकार या अशांति पास नहीं आती है।
Updated on:
18 May 2019 04:36 pm
Published on:
18 May 2019 04:36 pm
