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रामा व कोमता गांव में बिना मतदान ही चुन लिए पंच व सरपंच

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रामा व कोमता गांव में बिना मतदान ही चुन लिए पंच व सरपंच

रामा व कोमता गांव में बिना मतदान ही चुन लिए पंच व सरपंच

नामजदगी पर्चा वापसी के दिन स्थिति हुई साफ, दोनों जगह निर्विरोध निर्वाचन


जालोर. जिले के आहोर पंचायत समिति की रामा व सायला समिति की कोमता ग्राम पंचायत में पंच व सरपंच का निर्विरोध निर्वाचन किया गया।
जिला निर्वाचन अधिकारी महेंद्र सोनी ने बताया कि रामा व कोमता में एक-एक ही उम्मीदवार मैदान में रहने से निर्विरोध निर्वाचित किया गया। रामा में रिटर्निंग अधिकारी भंवरलाल विश्नोई व कोमता ग्राम पंचायत में रिटर्निंग अधिकारी पोपटलाल मेघवाल ने चुनाव प्रक्रिया करवाई।


भाद्राजून. आहोर पंचायत समिति की रामा ग्राम पंचायत में पंच व सरपंच पद के लिए निर्विरोध निर्वाचन किया गया। पंचायतीराज के तृतीय चरण के चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल होने के समय ही रामा गांव के लोगों ने सर्वसहमति से सरपंच व कुल 11 वार्डों से सभी पंचों को निर्विरोध निर्वाचन के लिए ही माला पहना दी थी। प्रक्रिया के बाद मंगलवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।
रामा पंचायत में सरपंच पद के लिए यशवंत कंवर व ग्यारह वार्ड के लिए एक-एक ही नामांकन दाखिल किया गया था। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान एक-एक ही उम्मीदवार रहने से निर्विरोध निर्वाचन किया गया। रिटर्निंग अधिकारी ने इन सभी को निर्विरोध निर्वाचन का प्रमाण-पत्र सौंप दिया। इसके बाद समर्थकों ने विजयी घोषित उम्मीदवारों को मालाओं से लाद दिया। इस मौके पर वार्डपंच अखाराम, केलमदेवी, प्रतापराम, रूपीदेवी, कानाराम, अमृतलाल, शमशुदेवी, चेनाराम, मोहनीदेवी, हुकमाराम, सुरेन्द्रसिंह रावणा राजपूत, श्रवणसिंह आदि मौजूद थे।

ग्रामीणों ने किया स्वागत
निर्विरोध निर्वाचन से लोगों में खुशी रही। रामा में यशवंत कंवर को सरपंच व सभी वार्डपंचों के निर्विरोध होने पर स्थानीय ग्रामीणों ने गाजे-बाजे के साथ जोरदार स्वागत किया। वही पूरी ग्राम पंचायत में मंगलवार को हर्ष व उल्लास का माहौल रहा।


बिना तामझाम ही हो गया चुनाव
आमतौर पर सरपंच चुनाव के लिए प्रत्याशी लाखों रुपए खर्च कर देते हैं। प्रचार-प्रसार में बैनर, पर्चे, सभा व बड़े-बड़े कटआउट लगाए जाते हैं। जनसम्पर्क के दौरान घर-घर दस्तक दी जाती है। चुनाव मैदान में प्रतिद्वंद्वी से तगड़ा मुकाबला होता है। चुनावी रंजिश भी बन जाती है, लेकिन रामा गांव में अलग ही नजारा दिखा। बिना तामझाम ही चुनाव हो जाने से प्रत्याशियों का खर्च बच गया, वहीं गांव विकास में भी राशि मिल सकेगी।