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राजस्थान की पहली इमरजेंसी एयर स्ट्रिप का राजनाथ व गडकरी करेंगे उद्घाटन, उतारे 3 फाइटर प्लेन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी गुरुवार को जालोर-बाड़मेर जिले की सीमा पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) का उद्घाटन करेंगे।

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Rajasthan first emergency air strip inaugurate

जालोर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी गुरुवार को जालोर-बाड़मेर जिले की सीमा पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) का उद्घाटन करेंगे। वे बाड़मेर के दक्षिण में गांधव-बाखासर सेक्शन (राष्ट्रीय राजमार्ग-925) पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड पर वैमानिक गतिविधियों का अवलोकन करेंगे। यह पहली बार है जब राजस्थान में किसी राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग भारतीय वायुसेना के विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग के लिए किया जाएगा।

इधर, बुधवार को यहां रिहर्सल के तौर पर 3 फाइटर प्लेन उतारे गए। एयरफोर्स अधिकारियों की निगरानी में सुबह सबसे पहले हरक्यूलिस प्लेन को उतारा गया। इसके बाद सुखोई और मिग के साथ अगस्ता हेलिकॉप्टर की भी लैंडिग हुई। यहां दोपहर 2 बजे तक आवागमन को भी बंद कर दिया गया। लैंडिंग के पहले से ही एयरफोर्स और पुलिस के अधिकारी पहुंच गए थे। राजस्थान की पहली आपातकालीन हवाई पट्टी पर गुरुवार को करीब तीन घंटे तक वायुसेना के बेड़े में शामिल कई लड़ाकू विमान तेज गर्जना के साथ उतरेंगे और उड़ान भी भरेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी इस हवाई पट्टी पर लड़ाकू विमानों के ट्रायल के साक्षी बनेंगे। इस दौरान सुखोई एसयू-30, मिग और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान तेज गर्जना के साथ आपातकालीन हवाई पट्टी पर लैंडिंग करेंगे।

भारतमाला प्रोजेक्ट का हिस्सा
इसे भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। यह पाकिस्तान से 40 किलोमीटर दूर है। इसे वायुसेना के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। 32.95 करोड़ रुपए की लागत से बनी यह हवाई पट्टी 3 किमी लंबी और 33 मीटर चौड़ी है। इसके दोनों तरफ 2 पार्किंग बनाई गई हैं, ताकि लैंडिंग के बाद विमानों को पार्क किया जा सके। इसके अलावा एटीसी प्लिंथ का डबल मंजिला एटीसी केबिन के साथ निर्माण किया गया है, जो पूरी तरह से वॉशरूम सुविधायुक्त है। इमरजेंसी हवाई पट्टी के पास 3.5 किमी लंबी और 7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी बनाई गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग-925ए पर सत्ता-गांधव के 41/430 किमी से 44/430 किमी के तीन किलोमीटर लंबे हिस्से को भारतीय वायु सेना के लिये एमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) के रूप में तैयार किया है। लैंडिंग सुविधा, अभी हाल में विकसित खंड़जे से बने ऊंचे किनारे वाले (फुटपाथ के रूप में) दो लेन के गगरिया-भाखासर तथा सत्ता-गांधव सेक्शन का हिस्सा है। इसकी कुल लंबाई 196.97 किमी है और इसकी लागत 765.52 करोड़ रुपये है। भारतमाला परियोजना से बाड़मेर और जालौर जिले के सीमावर्ती गांवों के बीच संपर्कता में सुधार होगा। यह हिस्सा पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है और इससे भारतीय सेना की सतर्कता बढ़ेगी और देश की अधोसंरचना भी मजबूत होगी।

तीन हैलीपेड बनाए
इस एमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप के अलावा वायुसेना/भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुये कुंदनपुरा, सिंघानिया और भाखासर गांवों में तीन हेलीपैड भी बनाये गये हैं। ईएलएफ का निर्माण 19 महीनों के भीतर कर लिया गया था। निर्माण की शुरूआत जुलाई 2019 में हुई थी।