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Rajasthan Monsoon: जालोर जिले में पिछले 10 में से 7 साल डबल बारिश, जानिए कब-कब बने बाढ़ के हालात

Rajasthan Monsoon: मानसून में जालोर जिले में पिछले 10 साल में औसत बारिश का ग्राफ 12 फीसदी से अधिक बढ़ा है। यह स्थिति पिछले 10 साल में से 7 साल में औसम से अधिक या दोगुनी बारिश से बनी।

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Rain File Photo

Rajasthan Monsoon: जालोर। मौसम विभाग की ओर से इस मानसून सीजन पर अल नीनो के प्रभाव से कम बारिश की भविष्यवाणी चिंता का कारण जरूर है। लेकिन जालोर जिले की बात करें तो पिछले 10 साल में जालोर जिले का औसत बारिश का ग्राफ 12 फीसदी से अधिक बढ़ा है। यह स्थिति पिछले 10 साल में से 7 साल में औसम से अधिक या दोगुनी बारिश से बनी।

2016 से 2025 तक के मानसून में जिले की औसत बारिश की बात करें तो हालात काफी सुधरे है। जिले की औसत बारिश दो साल पूर्व 566 मिलीमीटर थी, लेकिन 2023 में बिपरजॉय के बाद से लगातार औसत से अधिक बारिश के बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे है। जिले में पिछले 10 साल की औसत बारिश 645 मिलीमीटर है। इसी तरह पिछले साल भारी बारिश के चलते जालोर जिले में 785 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की गई।

64 साल में 250 एमएम से बारिश वाले साल

1961 से वर्ष 2025 में कई ऐसे साल रहे, जिसमें औसत से कम बारिश हुई। इन 64 साल के मानसून में 1962 में 207 मिलीमीटर, 1966 में 214, 1968 में 101, 1974 में 138, 1980 में 181, 1985 में 230, 1986 में 184, 1987 में 91, 1991 में 154, 1999 में 145, 2002 में 171, 2009 में 189, 2018 में 146 मिलीमीटर बारिश हुई।

औसत बारिश का ग्राफ 110 एमएम तक बढ़ा

वर्ष 2016 से 2025 के मानसून सीजन की बात करें तो अच्छी बारिश जारी रही। केवल 2018 में 146, 2021 में 345 मिलीमीटर बारिश हुई। शेष वर्ष में क्रमश: अच्छी बारिश जारी रही। वर्ष 2016 में सर्वाधिक 999 मिलीमीटर, 2020 में 752, 2022 में 601, 2023 में बिपरजॉच के दौरान 787, 2024 में 692 और वर्ष 2025 में 785 मिलीटर बारिश हुई। इसके परिणाम स्वरूप जिले में औसत बारिश का ग्राफ सुधरा। वर्तमान में जिले की औसत बारिश 645 मिलीटर है। जबकि पूर्व में 561 मिलीमीटर थी।

इन वर्ष में जालोर में बने बाढ़ के हालात

1961 से 2025 तक जिले में 11 बार बारिश भारी से अतिभारी बारिश के प्रभाव से बाढ़ के हालात बने। लगभग इन वर्षों में जवाई बांध के गेट भी खुले और नदी में वेग से प्रवाह भी हुआ। विभागीय जानकारी के अनुसार 1973, 1975, 1990, 1992, 1994, 2006, 2015, 2016, 2017, 2023, 2024 व 2025 से भारी बारिश वाले वर्ष रहे।

भारी बारिश से नुकसान कम फायदा ज्यादा

मानसून सीजन में भारी से अतिभारी बारिश के दौरान त्वरित रूप से जिलेवासियों को दिक्कतें होती है। जवाई नदी उफान पर होने से गांवों का संपर्क कट जाता है। जबकि दीर्घकालिक फायदा ही होता है। पिछली सीजन भी इसी तरह की स्थिति बनी, जिससे रास्ते बंद रहे। लेकिन दो माह से अधिक समय तक पानी का बहाव रहने से नदी प्रवाह के कृषि कुएं पूरी तरह से रीचार्ज हो गए। इन कुओं में 3 साल तक पानी उपलब्ध हो गया। जिसका नतीजा यह रहा कि इस साल सर्वाधिक गेहूं, चना, सरसों की उपज हुई।

2.95 मीटर तक जलस्तर सुधरा

सीजन में भारी बारिश जालोर जिलेवासियों के लिए न केवल राहतभरी साबित हुई, बल्कि इससे भूजल स्तर में 2.95 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया। यही नहीं नदी नालों में पानी की पर्याप्त आवक से सिंचाई को भी भरपूर पानी नसीब हुआ।

इन्होंने कहा

अच्छी बारिश होने के साथ नदी नालों में पानी की भरपूर आवक से जलस्तर में सुधार होता है। जितने अधिक दिनों तक पानी का बहाव रहता है, उतना ही जलस्तर सुधरता जाता है। पिछले साल अच्छी बारिश के बाद जवाई नदी में दो माह के बहाव से हालात सुधरे।

  • गणपत राणा, भूजल वैज्ञानिक