
जालोर. मोहनजी प्याऊ से आगे बागरा रोड पर सड़क दायरे में लगे बिजली के पोल। फोटो पत्रिका
जालोर। जालोर-बागरा फोरलेन प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने का मूल उद्देश्य इस व्यस्त मार्ग पर लगातार हो रहे सडक़ हादसों को रोकना और सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध कराना था। मार्ग की कम चौड़ाई, अपर्याप्त सुरक्षा मानकों और बढ़ते यातायात दबाव के कारण यहां दुर्घटनाएं आम हो गई थीं। 53.22 करोड़ रुपए खर्च कर करीब 18 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को फोरलेन में बदला गया, लेकिन परियोजना अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
बुधवार देर रात आशापूर्णा लॉ कॉलेज के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की मौत के बाद राजस्थान पत्रिका ने जालोर-बागरा मार्ग की जमीनी हकीकत को खंगाला। पड़ताल में सामने आया कि सड़क चौड़ी होने के बावजूद कई स्थानों पर सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी हुई है। कई हिस्सों में अधूरा निर्माण, सडक़ की जद में खड़े बिजली पोल, असुरक्षित मोड़ और चेतावनी संकेतों की कमी आज भी राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं।
फोरलेन निर्माण में देरी के पीछे एजेंसी लगातार बिजली और पेयजल लाइनों की शिफ्टिंग को बड़ा कारण बताती रही है। पिछले छह माह से यही तर्क दिया जा रहा है कि पोल और लाइनें हटने के बाद ही अंतिम कार्य पूरा हो सकेगा। लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। मोहनजी प्याऊ मोड़ से बागरा तक करीब पांच ऐसे स्थान मिले, जहां बिजली के पोल सडक़ की जद में ही खड़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई पोल पुराने स्थानों से हटाकर नए सिरे से लगाए गए हैं, लेकिन उन्हें भी सुरक्षित दूरी पर स्थापित नहीं किया गया। नतीजतन पोल सीधे सडक़ किनारे या यातायात क्षेत्र में मौजूद हैं।
मार्ग पर कई स्थानों पर सडक़ की चौड़ाई बढ़ाई गई है, लेकिन बीच में खड़े पोल वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। विशेषकर रात के समय या तेज गति में ओवरटेक करते वक्त वाहन सीधे इन पोलों की चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार फोरलेन मार्गों पर किसी भी स्थायी संरचना को सुरक्षित क्लियर जोन से बाहर रखना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां इसका पालन नहीं दिख रहा।
पत्रिका की पड़ताल में मार्ग पर कम से कम छह ऐसे स्थान सामने आए, जहां पूर्व में गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं और कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन स्थानों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता थी, लेकिन अधिकांश जगहों पर स्थिति यथावत है। निर्माणाधीन हिस्सों में पर्याप्त रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा बैरिकेड्स भी नजर नहीं आए।
फोरलेन प्रोजेक्ट को सुरक्षित और सुगम यातायात का समाधान बताया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति में सडक़ की चौड़ाई बढऩे के बावजूद सुरक्षा संबंधी कमियां लोगों की जान पर भारी पड़ रही हैं। निर्माण एजेंसी की ओर से कार्य शीघ्र पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब तक सडक़ की जद में मौजूद अवरोध नहीं हटते और सभी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होता, तब तक हादसों की पुनरावृत्ति पर रोक लगना मुश्किल दिखाई देता है।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन शंकरलाल सुथार ने बताया कि डिस्कॉम की ओर से शट डाउन मिलने पर पोल शिफ्टिंग का कार्य करवाया जा रहा है। जहां पर भी पोल दायरे में है, उन्हें हटवाया जा रहा है। धानपुर के पास 33 केवी के पोल है, उनकी शिफ्टिंग के लिए शटडाउन नहीं मिल रहा।
पीडब्ल्यूडी एक्सईएन धर्मेंद्र प्रजापति ने बताया कि की विंग ही फोरलेन पर पोल शिफ्टिंग का कार्य कर रही है। डिस्कॉम के स्तर पर तो कार्य के लिए शट डाउन मांगने पर पॉवर कट किया जाता है।
Published on:
13 Jun 2026 02:29 pm
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