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अब 300 खान मालिकों का सवा करोड़ सर्विस टैक्स बकाया, होगी वसूली

रिवर्स चार्ज पर सेवा कर के तहत चुकाने होंगे करीब 1 करोड़ 10 लाख, विभाग ने खान मालिकों को लिखे पत्र, समय पर जमा नहीं कराया तो लगेगी 100 प्रतिशत पैनल्टी

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अब 300 खान मालिकों का सवा करोड़ सर्विस टैक्स बकाया, होगी वसूली

जालोर. जिले में चल रही करीब 300 ग्रेनाइट खदानों के मालिकों के बकाया सर्विस टैक्स की वसूली को लेकर सैंट्रल जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने उन्हें पत्र लिखा है। फिलहाल यह पत्र उन्हें खुद के स्तर पर कार्यालय में संपर्क कर नियत अवधि में रिवर्स चार्ज पर सर्विस टैक्स जमा कराने के लिए भेजा गया है, लेकिन खान मालिकों ने यह बकाया टैक्स समय पर जमा नहीं कराया तो विभाग उनसे सौ प्रतिशत पैनल्टी मय ब्याज यह टैक्स वसूल करेगा। इसके लिए दूसरे चरण में खान मालिकों को नोटिस भी भेजे जाएंगे। गौरतलब है कि जून 2017 के बाद सर्विस टैक्स खत्म होने पर इन खान मालिकों ने बकाया करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपए चुकाए ही नहीं। वर्ष 2017 के बाद से खान विभाग ने सीजीएसटी विभाग को आंकड़े भी उपलब्ध नहीं कराए। जिससे बकायादारों की पहचान नहीं सकी थी। अब मुख्यालय से सभी खान मालिकों की पहचान कर प्रारंभिक तौर पर उन्हें करीब 20 दिन पूर्व पत्र भेजे गए हैं।
भरनी पड़ेगी 100 प्रतिशत पैनल्टी
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नोटिस भेजने से पहले ही संबंधित खान मालिक बकाया सर्विस टैक्स जमा करवाते हैं तो उन्हें टैक्स के अलावा 15 प्रतिशत ब्याज व 15 प्रतिशत पैनल्टी अदा करनी होगी। वहीं नोटिस जारी करने के बाद तय अवधि गुजर जाती है तो उन्हें टैक्स के साथ 15 प्रतिशत ब्याज तो भरना ही पड़ेगा। साथ ही साथ उन्हें 15 के बजाय 100 प्रतिशत पैनल्टी अदा करनी होगी।
सवा साल का टैक्स बकाया
विभागीय जानकारी के अनुसार राज्य में जीएसटी लागू होने से पहले 1 अप्रैल 2016 से 30 जून 2017 तक जिले के ३०० खान मालिकों का करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपए बकाया था। इसके बाद जीएसटी लागू होने पर भी कुछेक को छोड़कर अन्य खान मालिकों की ओर से सेवा कर जमा ही नहीं कराया जा रहा है। ऐसे में विभिाग की ओर से पहले इस सवा साल के बकाया टैक्स, ब्याज और पैनल्टी की वसूली की जाएगी। इसके बाद जीएसटी लागू होने के बाद की बकाया राशि वसूल की जाएगी।
यह है रिवर्स चार्ज पर सर्विस टैक्स
जानकारी के अनुसार पूर्व में सरकार की ओर से खान मालिकों को लीज का आवंटन करने के बाद उन्हें रॉयल्टी, डेड रेंट व डीएमएफ चार्जेज जमा कराना होता था। वहीं उनकी ओर से खनन किए गए खनिज को उपभोक्ता तक पहुंचाना सर्विस टैक्स की श्रेणी में शामिल नहीं था, लेकिन 1 अप्रैल 2016 से खनिज पर रिवर्स चार्ज पर सर्विस टैक्स अदा करने का नियम लागू किया गया। यानी लीज होल्डर को यह टैक्स अदा करने का उत्तरदायी माना गया। ऐसे में इसके बाद से खान मालिकों ने सेवा कर राजकोष में जमा ही नहीं कराया। अब विभाग की ओर से खान मालिकों से यह राशि वसूल की जाएगी।