
हड़ताल के पांचवे दिन सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति के खिलाफ दिखा आक्रोश, निकाली विरोध रैली, रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से निजी बस संचालकों की मनमानी पड़ रही भारी
जालोर. अब तक पांच दिन से शांतिपूर्ण चल रहे रोडवेज कर्मियों का धरना प्रदर्शन शनिवार को पांचवे दिन सड़कों तक पहुंच गया। आक्रोशित रोडवेज कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री राजस्थान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इससे पूर्व सवेरे से ही रोडवेज डिपो के बाहर रोडवेजकर्मी एकत्रित होने शुरू हो गए। दोपहर करीब 12 बजे रोडवेजकर्मी समूह में विरोध तख्तियां हाथ में थामे मुख्य मार्ग की तरफ रवाना हो गए। आम दिनों में जिस मार्ग से रोडवेज बसों का परिवहन होता है।उसी मार्ग पर अचानक रोडवेज स्टाफ का पैदल हुजूम देख एकबारगी आमजन भी अचंभित हो गए। इसके बाद रोडवेज स्टाफ यहां से बस स्टेंड तक पहुंचे।
पहली बार पूरा स्टाफ पैदल पहुंचा बस स्टैंड
रोडवेज स्टाफ डिपो से करीब 70 जनों का पैदल समूह डिपो के बाहर से पैदल ही करीब 2.5 किमी दूरी पर स्थिति रोडवेज स्टैंड तक पहुंचा। इन स्टाफ के हाथों में सरकार के खिलाफ नारे लिखे हुए थे।समूह में कार्मिक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चल रहे थे। कार्मिकों ने रोडवेज बस स्टैंड पर नारेबाजी करते हुए सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया।
निजी संचालकों को भी अवगत करवाया
रोडवेज बसों का संचालन पिछले पांच दिन से प्रभावित है। रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से लोगों को गंतव्य स्थान तक पहुंचने में खासी दिक्कत हो रही है। लेकिन निजी वाहनों में मुख्य रूप से टे्रवल्स संचालन से लोग इसमें सफर कर रहे हैं। चक्काजाम कर रहे कार्मिकों ने शनिवार को निजी बस संचालकों से भी समझाइश कर अपने विरोध प्रदर्शन में समर्थन मांगा।
बढ़ता किराया पड़ता जा रहा भारी
रोडवेज चक्काजाम से आमजन आहत है, लेकिन इस मामले में जिला प्रशासन मौन है। प्रशासन आमजन की समस्या की तरफ बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। जबकि निजी बसों व वाहनों में अधिक किराया की वसूली हो रही है। प्रशासन को इस मामले में जानकारी है, लेकिन प्रशासन इस संबंध में आमजन की परेशानी को गंभीरता से लेने की बजाय शिकायत अपने टेबल तक पहुंचने का इंतजार कर रही है। अलबत्ता इन हालातों में आमजन भी प्रशासन की नींद के चलते इन हालातों में बेबसी को स्वीकार कर लिया है।
घाटा 40 लाख पार
***** जाम से रोडवेज डिपो की आय पूरी तरह से प्रभावित हुई है। पिछले पांच दिन से रोडवेज को 40 लाख के लगभग नुकसान हो चुका है और यदि हड़ताल और आगे बढ़़ती है तो नुकसान भी बढ़ता जाएगा।
हड़ताल ने आमजन की कमरतोड़ी
रानीवाड़ा. रोडवेज ***** जाम का असर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पड़ा है।रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से गंतव्य स्थानों तक पहुंचने में खासी दिक्कत हो रही है।वहीं दूसरी तरफ निजी बस संचालक मजबूरी का फायदा उठा रहे है और अधिक किराया वसूल रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ये मांगें, जिन पर सरकार का मौन
- रोडवेज कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ
- खटारा बसों से परेशानी, रोडवेज के बेड़े में नई बसें शामिल हो
- रोडवेज में नई कार्मिकों की भर्ती की जाए, जिससे कार्य की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
- सेवानिवृत्त कार्मिकों के बकाया वेतन का भुगतान
- अवैध वाहनों की भरमार से आय प्रभावित, अवैध परिवहन बंद हो
Published on:
23 Sept 2018 10:40 am
