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भीनमाल. विद्युत निगम की उदासीनता के चलते भीनमाल के ग्रामीण क्षेत्र में स्वीकृत १० जीएसएस का कागजों में ही निर्माण हो रहा है। इन जीएसएस की तीन साल पूर्व डिस्कॉम ने तकनीकी स्वीकृति जारी कर दी, लेकिन वित्तीय स्वीकृति के अभाव में यह जीएसएस का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के ग्रामीणों को निर्बाध व गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध होने के सपने दम तोड़ रहे है।
करीब 15 किलोमीटर 11 केवी विद्युत लाइन सेे होती है सप्लाई
ग्रामीणों व किसानों को सीजन के समय कम वॉल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके अलावा बार-बार फॉल्ट की वजह से दर्जनों बार विद्युत गुल होने की समस्या भी झेलनी पड़ रही है। थूर के किसान उकाराम घांची ने बताया कि गांव में आए दिन कम वॉल्टेज की समस्या झेलनी पड़ती है। दांतीवास के किसान करसनराम का कहना है कि दूर की ढाणियों में 10 किलोमीटर दूरी से विद्युत आपूर्ति होती है। रामाराम का कहना है कि सीजन में पूरी बिजली नहीं मिलने से सिंचाई के अभाव में फसलें जलने लगती है। ऐसे में बार-बार बिजली गुल होने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने कई बार स्वीकृत जीएसएस को शुरू करवाने के लिए विधायक पूराराम चौधरी व डिस्कॉम के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा, लेकिन जीएसएस की वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल रही है।
यहां-यहां बनने है जीएसएस
क्षेत्र के बोरटा, निंबोड़ा, लेदरमेर, कावाखेड़ा, कोरा, नया चैनपुरा, कोरी ध्वेचा, लाखनी, गांवड़ी, थूर व डुंगरवा गांवों में 33 केवी के सब ग्रिड स्टेशन के लिए 2013 में प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी, लेकिन उसके बाद डिस्कॉम की उदासीनता के चलते इन जीएसएस का निर्माण ठण्डे बस्ते में डाल दिया है। इन गांवों व आस-पास की ढाणियों में आस-पास के करीब 15 किलोमीटर 11 केवी लंबी विद्युत लाइन से विद्युत आपूर्ति होती है। ऐसे में खासकर किसानों को रबी की सीजन में कम वॉल्टेज की समस्या झेलनी पड़ती है। इसके अलावा बार-बार फॉल्ट के समय सीजन में किसानों को काफी मुश्किलें खड़ी होती है।
प्रयास कर रहे है
&कावाखेड़ा व सहित ग्रामीण क्षेत्र के दस जीएसएस स्वीकृति के लिए विधायक पूराराम चौधरी के नेतृत्व में ऊर्जा मंत्री से मुलाकात की है। जीएसएस की स्वीकृति के लिए प्रयास कर रहे है। इससे गांवों में खासकर किसानों को फायदा होगा।
चैनराज चौधरी, अध्यक्ष, सरपंच संघ-भीनमाल
प्राथमिकता के अनुसार बनेंगे
सरकार की ओर से हर साल पांच-छह जीएसएस स्वीकृत होते है। इस बार चार जीएसएस स्वीकृत हुए है। भीनमाल क्षेत्र में 10 जीएसएस की तकनीकी स्वीकृति जारी हो चुकी है। प्राथमिकता के हिसाब से जीएसएस का निर्माण होगा। लाखणी में जीएसएस की वित्तीय स्वीकृति के लिए भी उच्चाधिकारियों को लिखेंगे।
बीएल दहिया, अधीक्षण अभियंता, डिस्कॉम-जालोर
Published on:
13 Sept 2017 10:29 am
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