नेहड़ में दशकों बाद भी वैसे ही हालात, कच्ची बेरियों का पानी पीने की मजबूरी

नेहड़ में दशकों बाद भी वैसे ही हालात, कच्ची बेरियों का पानी पीने की मजबूरी
नेहड़ में दशकों बाद भी वैसे ही हालात, कच्ची बेरियों का पानी पीने की मजबूरी

Dharmendra Ramawat | Publish: Feb, 24 2019 07:52:33 PM (IST) | Updated: Feb, 24 2019 07:52:34 PM (IST) Jalore, Jalore, Rajasthan, India

यहां के लोगों को पेयजल के लिए कच्ची बेरियों से रिसने वाला पीना पड़ रहा है पानी

हाड़ेचा. गर्मी की दस्तक के साथ ही नेहड़ के ग्रामीणों को पेयजल संकट की चिंता सताने लगी है। क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीणों को पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए ना तो जलदाय विभाग कुछ कर पाया है और ना ही सरकार। ऐसे में यहां के ग्रामीण बूंद-बूद के लिए मोहताज हैं। इसके बावजूद पेयजल संकट दूर करने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। नेहड़ के इन गांवों में दशकों से पेयजल की कोई स्कीम भी नहीं है। जिससे यहां के लोगों को पेयजल के लिए कच्ची बेरियों से रिसने वाला पानी पीना पड़ रहा है।हालांकि नेहड़ के गांवों में जलदाय विभाग की ओर से बोर बाढ़ के दौरान आपदा के तहत बोरवेल खुदवाए थे और सभी पर विद्युत कनेक्शन भी करवाया गया, लेकिन अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद खारे पानी वाले क्षेत्र में ये बोरवेल खुदवाए गए। जिसके कारण ये बोरवेल किसी काम नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों ने जलदाय विभाग व उच्चाधिकारियों को भी इस बारे में अवगत करवाया, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इधर, नेहड़ के लोगों ने पेयजल संकट दूर करने के लिए विभागीय अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधियों को भी अवगत करवाया गया। फिर भी नेहड़ के तीन दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल संकट दूर करने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जिससे ग्रामीणों को कच्ची बेरियों का दूषित व मटमैला पानी पीना पड़ रहा है।
यहां नहीं है जल स्रोत
नेहड़ के नलदरा, भाटकी, जोरादर, धींगपुरा, कुकडिय़ा, मंडाली, खेजडिय़ाली, मीठाखागला, सांकरिया, सूंथड़ी, उमरकोट, सुराचंद, भवातड़ा, गलीफा, मरटवा, दूठवा, ईसरोल, वरणवा, सुजानपुरा, प्रतापनगर व खासरवी सहित तीन दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल के कोई स्रोत नहीं है। ऐसे में यहां के अधिकतर ग्रामीण नर्मदा की माइनरों के पास व लूनी नदी के बहाव क्षेत्र सहित मीठे पानी की संभावना वाले इलाकों में कच्ची बेरियां खोदकर हलकतर करते हैं।
20 किमी दूर से मंगवाते हैं टैंकर
नेहड़ के इन कई गांवों में जलदाय विभाग की उदासीनता के चलते ग्रामीण नर्मदा मुख्य नहरों या २० किमी से भी अधिक दूरी से टैंकरों के माध्यम से पानी मंगवाते हैं। इसके लिए उन्हें हजार रुपए से अधिक दाम चुकाना पड़ता है। इसके बावजूद जलदाय विभाग के अधिकारियों की ओर से यहां पेयजल संकट दूर करने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
इनका कहना...
नेहड़ के कई गांवों में पेयजल के कोई स्रोत नहीं है। जिससे यहां के ग्रामीण पेयजल संकट के दौर से गुजर रहे हैं। आजादी के बाद से यहां कोई पेयजल स्रोत नहीं होने से लोग पेरशान हैं।
- अरविंदकुमार पुरोहित, मीठाखागला खेजडिय़ाली
क्षेत्र में विभाग की ओर से खारे पानी वाले इलाकों में बोरवेल खुदवाए गए थे। जिसके कारण ये किसी काम नहीं आ रहे हैं। ठेकेदारों व अधिकारियों ने सांठ-गांठ कर लाखों के राजकोष को चूना लगाया है। इसके बावजूद नेहड़ में पेयजल संकट छाया हुआ है। जिससे ग्रामीणों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
- जीतूसिंह, ग्रामीण, मरटवा
जलदाय विभाग की ओर से गर्मी के मौसम को देखते हुए नेहड़ क्षेत्र में पेयजल संकट को दूर करने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। बाकी नर्मदा परियोजना के तहत गांवों में पेयजल संकट दूर करने के प्रयास किए जाएंगे। फिलहाल पेयजल संकट दूर करने के लिए स्कीम नहीं है।
- जयंत कंकेडिय़ा, एक्सईएन, पीएचईडी, सांचौर

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