सब्सिडी के लिए सत्यापन : किसानों से वसूले जा रहे एक हजार रुपए

सब्सिडी के लिए सत्यापन : किसानों से वसूले जा रहे एक हजार रुपए
File photo

Dharmendra Ramawat | Publish: Jun, 09 2018 10:41:44 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

किसानों को नहीं मिल रही है सब्सिडी...फाइल स्वीकृति व सत्यापन के लिए बिचौलिए वसूल रहे राशि

तुलसाराम माली
भीनमाल. खेती-बाड़ी को बढ़ावा देेने के लिए सरकार की ओर से किसानों को कई योजनाओं में सब्सिडी देकर सम्बल दिया जा रहा है, लेकिन उद्यान विभाग के कारिंदों की कारस्तानी से किसानों को मिलने वाले अनुदान में बंदरबाट हो रहा है। किसानों से पंप, पाइप सामान व फव्वार सामग्री लेेने के बाद अनुदान पास करवाने के नाम पर 1000 रुपए की वसूली हो रही है। यह राशि बिचौलिए किसानों के खरीदे सामान के फाइल पास करवाने व थर्ड पार्टी इस्पेक्शन के नाम पर गटक रहे हैं। यह खेल विभाग व बिचौलिए की सांठ-गाठ से चल रहा है। इतना कुछ होने के बाद भी कृषि विस्तार व उद्यान विभाग के अधिकारी अनभिज्ञ बने हुए है। ऐसे में किसानों को मिलने वाले अनुदान पर भी बिचौलिए कैंची लगा रहे हंै। नियमानुसार पंप, पाइप, फव्वारा सामग्री जिस कंपनी की खरीदी है, सत्यापन की राशि भी उसी कंपनी को चुकानी है, लेकिन बिचौलिए किसानों से वसूल रहे हैं। सरकार की ओर से फव्वारा व मिनी फव्वारा संयंत्र खेतों में लगाने पर लघु सीमांत किसान को 6 5 प्रतिशत व सामान्य किसान को 50 प्रतिशत लागत मूल्य का अनुदान दिया जा रहा है। पिछले सात माह से किसानों को इन आवेेदनों के अनुदान के लिए भटकना पड़ रहा है। अब बिचौलिए व विभाग दोनों ही बजट नहीं होने का बताकर टरका रहे है।
सत्यापन के बाद तय करते है प्राथमिकता
सरकार ने भले ही अनुदान योजनाओं में पारदर्शिता के लिए आवेदनों को ऑनलाइन किया है, लेकिन उद्यान विभाग की कारस्तानी से किसानों को आठ-दस माह तक अनुदान नसीब नहीं हो रहा है। उद्यान विभाग के अधिकारी थर्ड पार्टी इस्पेक्शन करवाने के बाद भी फाइल को अनुदान के लिए प्राथमिकता में डालते है, ऐसे में 1000 रुपए नहीं चुकाने वाले किसान को अनुदान के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। इतना कुछ होने के बाद भी किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है।
जिलेभर के गांव व शहरों में बने दर्जनों एजेंट
किसानों को खेती कार्य सम्बंधी सामग्री की खरीद के लिए जिले के हरेक गांव व शहरों में दर्र्जनों एजेंट बने हुए है। खासकर सामग्री आपूर्ति करने वाले फर्मों के मालिक ही एजेंट की भूमिका निभा रहे है। एक तरफ तो सरकार की ओर से अनुदान के लिए निर्धारित की कंपनियों के दाम भी बाजार के मूल्य से काफी अधिक होते है, इसके अलावा उसे अनुदान के लिए अतिरिक्त राशि देनी पड़ती है। यह सब विभाग व बिचौलिए की सांठ-गाठ से हो रहा है। किसानों का कहना है कि अनुदान के लिए कई तरह की कागजी कार्यवाही करनी पड़ती है, इसके अलावा अनुदान पास करवाने के लिए राशि भी चुकानी पड़ती है।
फिर कोईनहीं सुन रहा...
किसानों को अनुदान की फाइल जमा करवाने, पास करवाने व इस्पेक्शन के नाम पर लोग 1000 रुपए लेते है। इसके बाद भी किसानों को अनुदान नहीं मिलता है। किसान अनुदान के लिए दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर बने हुए है। किसानों को कोई सुनने वाला नहीं है।
- मंगलाराम व दानाराम, किसान
मेरी जानकारी में नहीं है...
किसानों से सब्सिडी की फाइल पास करवाने व सत्यापन के नाम पर वसूली हो रही है यह मेरी जानकारी में नहीं है। मैने एक माह पहले ही यहां पर ज्वाइन किया है। बजट के अभाव में सबसिड़ी की कई फाइले अटकी हुई है। फाइल को प्राथमिकता थर्ड पार्टी इस्पेक्शन के बाद ही तय करते है। इस्पेक्शन की राशि जिस कंपनी का सामान खरीदा है उसे ही चुकानी पड़ती है।
- रामचन्द्र आर्य, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग, जालोर

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