
katra insect attack on crop in jalore
जीतेश रावल @ जालोर. बारिश की सीजन शुरू होते ही किसानों ने खेत तैयार कर बुवाई तक कर दी। अब सिंचाई के लिए अच्छी बारिश का इंतजार था, लेकिन बारिश के बदले 'कातरा' आ गया, जो खेतों में तबाही मचा रहा है। बारिश की बेरूखी झेल रहे किसानों के लिए यह बुरी खबर है। कई हैक्टेयर में बोई गई फसल कातरा लट की चपेट में आने से किसान जार-जार रोने को विवश है। बताया जा रहा है कि यह लट एक खेत को चट कर दूसरे खेत में जाती है। इस प्रवृत्ति के चलते आसपास के अन्य खेतों में भी तबाही मचने का अंदेशा बना हुआ है। समय पर रोकथाम के प्रयास नहीं होने पर किसानों के पास हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं रहेगा। कृषि अधिकारी बताते हैं कि मुख्यत: दलहनी फसलों पर कातरा का ज्यादा प्रकोप रहता है। इससे बचाव के उपाय भी किसानों को बता रहे हैं, लेकिन अभी तक उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही।
क्या है कातरा
लाल-भुरे रोये वाली इस लट को आम बोलचाल की भाषा में कातरा कहते हैं। कृषि अधिकारी इस लट को रेड हेयरी कहते हैं। संभवतया लाल-भुरे बालों के कारण इसका नामकरण किया है।
... नहीं तो पार पाना मुश्किल
अपेक्षाकृत शैशवावस्था में होने पर इसका निदान संभव है। बड़ी हो जाने पर दवा के भुरकाव से भी इसे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता। अधिकारी बताते हैं कि दवा इसके बालों पर गिर जाती है, जिसे यह झटककर गिरा देती है।
कुछ गांवों की पूरी फसल चपेट में
किसानों ने बताया कि फिलवक्त जालोर तहसील क्षेत्र के नारणावास, धवला, बागरा समेत आसपास के गांवों में कातरा का प्रकोप देखा गया है। वैसे कृषि अधिकारी बताते हैं कि कम बारिश वाले क्षेत्रों में कातरा का प्रकोप रहता ही है। ऐसे में जिले के अन्य हिस्सों में भी इस लट का प्रकोप हो सकता है। सर्वे कराया जाए तो किसानों को समय पर राहत पहुंचाई जा सकती है।
कातरा लट की तादाद के आगे बौने साबित हो रहे उपाय
खेतों में खड़ी फसल को कतरा लट चट कर रही है। नारणावास इलाके की फसल लट की चपेट में है। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने के असार लग रहे हैं। क्षेत्र के नया नारणावास, नारणावास, धवला व बागरा के समीप खेतों में कातरे का प्रकोप ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों ने दवा का छिड़काव व भुरकाव करने की सलाह दी है, लेकिन लट की तादाद के आगे यह नाकाफी साबित हो रहा है। अधिकारियों ने बताया कि मानसूनी बारिश के बाद नम मौसम में यह लट पनपती है तथा झुंड के रूप में आगे बढ़ती है, जिससे खेतों में काफी खराबा हो जाता है।
मुश्किल लग रहा पार पाना
नया नारणावास के किसान नैनाराम मेघवाल व भैराराम ने बताया कि कातर लट के कारण फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। फसलो की बढ़ोतरी देखकर खुशी हो रही थी। अच्छे जमाने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन लट ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लट दिन रात फसल चट कर रही है। बचाव के उपाय करने के बावजूद इससे पार पाना मुश्किल लग रहा है।
खेतों में नहीं आने देना ही प्रभावी उपाय
बचाव का अभी तक एक ही तरीका सामने आया है कि कातरा लट को किसी तरह खेत में आने से रोका जाए। इसके लिए खेत के किनारे खाई खोदे जाने एवं उसमें ही कीटनाशक डालकर नष्ट करने की कवायद करने का उपाय बताया जा रहा है। खेत में जगह जगह घास व कचरा जलाने से भी पतंगे आकर्षित होते हैं। यह लट बनने से पहले ही पतंगों को जला कर नष्ट करने का उपाय है। खेतों के आसपास उगे जंगली पौधें तथा खरपतवार को नष्ट करने से भी लट आगे नहीं बढ़ पाती।
बचाव के लिए समय पर नियंत्रण जरूरी
कृषि अधिकारी बताते हंै कि मानसूनी बारिश के बाद रेतीले क्षेत्र में व दलहनी फसल, बाजरा आदि में इसका प्रकोप हो सकता है। बारिश होते ही कातरा लट के पतंगे जमीन से निकलते हंै। इनके अंडों से छोटी लट निकलती है, जो बड़ी होकर पत्तियां खाकर फसल को नुकसान पहुंचाती है। नम वातावरण इसकी बढ़ोतरी के लिए अनुकूल स्थिति है। समय पर पतंगों को नियंत्रित किया जाए तो नुकसान से बच सकते हंै।
बचाव के उपाय
- फसल में लट खत्म करने के लिए क्यूनालफॉस या फैनवेलरेट का भुरकाव करना चाहिए
- खेत के चहुंओर खाई खोदकर क्यूनालफॉस भुरकने से लट नष्ट हो जाती है
- बड़ी अवस्था में मिलने वाली लटों को चुन कर मिट्टी के तेल में डालना चाहिए, ताकि नष्ट हो जाए
- पानी में मिलाकर डाइक्लोरोवॉस या क्यूनालफॉस का छिड़काव करना चाहिए
सूचना मिली है...
कुछ गांवों में कातरा लट के प्रकोप की सूचना मिली है। इन गांवों में किसानों को दवा का भुरकाव करने की सलाह दी है। निरीक्षण के लिए भी जा रहे हैं।
- मनोहर तुसावरा,कृषि उपनिदेशक, जालोर
बचाव के उपाय करे...
खेतों में कातरा लट का आवागमन रोकना बचाव का कारगर उपाय है। इसके लिए खेत के चारों तरफ लगभग एक फीट गहरी खाई खोदनी चाहिए, इसमें क्यूनालफॉस 2 प्रतिशत चूर्ण 25 किलो ग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से भूरकना चाहिए। इससे लट नष्ट हो जाती है।
- फूलाराम मेघवाल, सहायक कृषि निदेशक, जालोर
Updated on:
06 Aug 2018 04:58 pm
Published on:
06 Aug 2018 04:58 pm
