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45 किमी की रफ्तार से चली हवा, बारिश से जीरे की फसल में खराबा

जालोर शहर सहित जिलेभर में शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। वहीं जिले के कई हिस्सों में बारिश भी हुई। ऐसे में खेतों में खड़ी फसलों में भी नुकसान हुआ है। वहीं दिनभर चली तेज हवा के कारण लोग भी खासे परेशान रहे।

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जालोर शहर सहित जिलेभर में शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। वहीं जिले के कई हिस्सों में बारिश भी हुई। ऐसे में खेतों में खड़ी फसलों में भी नुकसान हुआ है। वहीं दिनभर चली तेज हवा के कारण लोग भी खासे परेशान रहे। इस दौरान शाम करीब 5.30 बजे तेज हवा का दौर शुरु हो गया जो करीब 45 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली। शहर में आसमान में बादल छाए रहे। वहीं सुबह हल्की बूंदाबांदी भी हुई। शहर में दिनभर चली तेज हवा के कारण धूल के गुबार उड़ते रहे। ऐसे में दुपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल रहगीरों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जालोर सहित सायला व आहोर में भी सुबह हल्की बूंदाबांदी हुई। तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलों के गिरने से गेहूं की फसल में नुकसान का अंदेशा बना हुआ है। इधर, मोदरा, भीनमाल और सांचौर में बारिश दर्ज की गई। ऐसे में इन क्षेत्रों में खड़ी जीरे की फसल में खराबा हुआ है। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि मौसम विशेषज्ञ आनंद कुमार शर्मा ने बताया कि शनिवार शाम को हवा 45 किलोमीटर प्रति घंट की गति से चली। वहीं शनिवार दिन का तापमान 28.4 डिग्री और शुक्रवार रात का तापमान 20.7 डिग्री दर्ज किया गया।

सियाणा क्षेत्र में शनिवार को हुई बारिश से फसलों का नुकसान पहुंचा है। वहीं दिनभर चली तेज हवाओं ने भी खासा परेशान किया। बारिश से जीरा, इसबगोल, सरसों और अरंडी की तैयार फसलों में बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। खेतों काटकर रखी फसलें भी खराब हो गई। मौसम की मार को देखते हुए किसानों के बच्चे भी स्कूल नहीं जाकर खेतों में जीरे की फसल काटते नजर आए।

हाड़ेचा कस्बे समेत क्षेत्र में बेमौसम बारिश से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। क्षेत्र के हरिपुरा हेमा की ढाणी, आमली, काछेला, जानवी, केसुरी, खासरवी, खेजडिय़ाली, सिपाहियों की ढाणी, भीमगुड़ा, सुराचन्द, टांपी, दुठवा, गोमी, डावल, पालड़ी, सांगड़वा, डबाल, बावरला, बिछावाड़ी, सरवाना, जोरादर,भाटकी, अचलपुर, सुथाना, किलवा व भड़वल सहित अन्य गांवों में शुक्रवार रात व शनिवार सुबह हुई बारिश के कारण खेतों में खड़ी जीरा, इसबगोल, रायडा, सरसों, गेहूं व अरंडी सहित अन्य फसलों में नुकसान हुआ है। खेतों में एकत्रित की गई फसल बारिश से भीग गई। पक कर तैयार खेतों में खड़ी इसबगोल की बारिश से झडऩे से किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने बताया कि बैंकों व साहूकारों से कर्ज लेकर बुवाई की थी। लेकिन बेमौसम बारिश से फसले चौपट हो गई।

हाड़ेचा ग्राम पंचायत के 40 किसान गत साल के क्लेम से आज भी वंचित है। हाडेचा ग्राम पंचायत के 40 किसानों ने बीमा क्लेम नहीं मिलने पर बीमा कंपनी के अधिकारियों, प्रशासन व जन प्रतिनिधियों को अवगत करवाया था। उस दौरान पटवारी को किसानों की जानकारी दुबारा संकलन करने के निर्देश दिए गए थे। पोपटलाल पुरोहित समेत अन्य किसानों ने बताया कि उनके खातों से बीमा प्रीमियम राशि काटने के बावजूद उन्हें मुआवजा नहीं मिल रहा है।

चितलवाना उपखण्ड क्षेत्र में शनिवार अल सुबह 4:00 बजे बारिश होने से किसानों के खेतों में कटाई की हुई फसलें बारिश व तेज हवाएं होने से खराब हो गई। किसानों का कहना है कि शुक्रवार को देर रात अचानक आई तेज हवाओं के साथ बारिश से किसानों की पकी पकाई जीरा, इसबगोल व सरसों की फसल में भारी नुक़सान हो गया है। शनिवार अल सुबह से बरसात के साथ दिनभर तेज हवा चलने से किसानों की जीरा, इसबगोल व सरसों की फसलें चौपट हो गई। किसान राणसिंह राठौड़ ने बताया कि शनिवार सुबह बारिश के बाद दिनभर तेज हवा चलने से फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। किसानों ने प्रशासन से गिरदावरी व सर्वे करवाकर मुआवजा दिलाने की मांग की। भीनमाल में पश्चिम विक्षोभ का असर देखना को मिला। सुबह से रिमझिम बारिश का दौर शुरू हुआ। दोपहर तक रूक-रूक कभी रिमझिम तो कभी बूंदाबांदी होती रही। बेमौसमी बरसात से क्षेत्र में रबी की फसल को नुकसान हुआ। खासकर जीरे व इस्बगोल की फसल को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि बेमौसमी बरसात से जीरे व इस्बगोल की फसल को नुकसान हुआ है। इसके अलावा खेतों में कटकर रखी सरसो की फसल को भी भीग गई है।


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जीरे में हुआ नुकसान
मोदरा क्षेत्र के गावों में शनिवार को बारिश के कारण खेतों में खड़ी जीरे की फसल खराब हो गई। जीरे में खराबे को लेकर बासड़ी धनजी के ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग की। बासडा धनजी के ईश्वरसिंह बालावत ने बताया कि बारिश के कारण जीरे की फसल बर्बाद हो गई, जिससे किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। पूर्व उपसरपंच महेंद्रसिंह बालावत ने बताया कि फसल के लिए कई किसानों ने बैंकों के ऋण ले रखा है।

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