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(श्रीनगर): अनंतनाग-पुलवामा संसदीय क्षेत्र में पहले चरण में हुए कम मतदान से परेशान राजनीतिक दलों की नींद शोपियां-पुलवामा के सुरक्षा परिदृश्य ने उड़ा दी है। फिलहाल, सभी राजनीतिक पार्टियां दूसरे चरण में 29 अप्रैल को शत-प्रतिशत मतदान को यकीनी बनाने के लिए जोर लगा रही हैं, ताकि किसी तरह अपनी जीत को सुनिश्चित कर सकें।
दक्षिण कश्मीर के चार जिलों अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां पर आधारित अनंतनाग-पुलवामा संसदीय क्षेत्र पूरे देश का अब तक एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां संसदीय चुनाव के लिए तीन चरणों में मतदान कराया जा रहा है। इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीए मीर समेत 18 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान हो चुका है, जबकि जिला कुलगाम में 29 व पुलवामा और शोपियां में छह मई को मतदान होगा।
चुनाव आयोग के अनुसार, 29 अप्रैल को अनंतनाग संसदीय क्षेत्र के लिए तीन चरणों के दूसरे चरण में कुलगाम जिले में 3.45 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने जा रहे हैं। यह जिला चार विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिनमें नूराबाद, कुलगाम, गृह शालिब और देवसर शामिल हैं।
दक्षिण कश्मीर जिले में 345,486 मतदाता हैं जिनमें 179,607 पुरुष, 164,604 महिलाएं, 1262 सेवा निर्वाचक (1254 पुरुष और 08 महिला) और 13 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। सुगम मतदान के लिए, एसी ने जिले भर में 433 मतदान केंद्र बनाए हैं। जिले में सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान का समय निर्धारित किया गया है।
छह विधानसभा क्षेत्रों पर आधारित जिला अनंतनाग में मात्र 13.63 फीसद मतदान हुआ है। अनंतनाग में 5.29 लाख मतदाताओं में से मात्र 71923 ने ही वोट डाले हैं। इससे सभी उम्मीदवार परेशान हैं, लेकिन पीडीपी, नेकां और कांग्रेस में ज्यादा बेचैनी है क्योंकि मुख्य मुकाबला इन्हीं तीन दलों के बीच है।
पुलवामा-शोपियां में पीडीपी को मतदान की उम्मीद
पुलवामा, शोपियां और कुलगाम में करीब 8.5 लाख मतदाता हैं। पुलवामा और शोपियां के मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य और जमात ए इस्लामी के प्रभाव को देखते हुए कोई भी दल इन दोनों जिलों में जहां 6 मई को मतदान होना है, ज्यादा उम्मीद नहीं लगाए हुए हैं। सिर्फ पीडीपी को ही इन दो जिलों में अपने लिए कुछ वोटों की उम्मीद है, क्योंकि जिला शोपियां के दोनों विधानसभा क्षेत्रों शोपियां और वाची के अलावा जिला पुलवामा के पुलवामा, राजपोरा, पांपोर और त्राल में उसने ही वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। लेकिन इन दोनों जिलों में बीते 30 सालों के दौरान अकसर मतदान का फीसद अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार से प्रभावित रहता है। कांग्रेस और नेकां का इन जिलों में ज्यादा प्रभाव नहीं हैं। इन हालात को ध्यान में रखते हुए सभी राजनीतिक दलों ने अपना पूरा ध्यान चार विधानसभा क्षेत्र कुलगाम, देवसर, नूराबाद और होमशालीबुग पर आधारित कुलगाम में मतदान को शत- प्रतिशत कराने के लिए अपना पूरा जोर लगा रखा है। लेकिन इन चार विधानसभा क्षेत्रों में सिर्फ तीन क्षेत्रों नूराबाद, देवसर और होमशालीबुग में ही ज्यादा मतदान की उम्मीद की जा रही है। इन तीनों सीटों में एक-एक जगह पीडीपी, कांग्रेस और नेकां ने पिछला विधानसभा चुनाव जीता है, जबकि कुलगाम में माकपा प्रत्याशी मोहम्मद युसुफ तारीगामी ने वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव जीता था। पूरे जिले में करीब साढ़े तीन लाख मतदाता हैं। सभी दलों ने अपना पूरा ध्यान इसी जिले पर केंद्रित कर रखा है। सभी चाहते हैं कि उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में मतदान शत प्रतिशत नहीं तो कम से 80 प्रतिशत हो, ताकि तीसरे चरण के मतदान से पहले ही वह अपनी जीत को लेकर निश्चित हो जाएं।
Published on:
28 Apr 2019 07:00 am
