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तालाबों के संवर्धन में प्रशासन उदासीन ग्रामीणों को अब निस्तारी के लिए भी होना पड़ रहा परेशान

तालाबों में पानी कहां से भरेंगे

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तालाबों में पानी कहां से भरेंगे

तालाबों में पानी कहां से भरेंगे

जांजगीर-चांपा. गर्मी में गांव-गांव में निस्तारी के लिए ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां लोग को पानी की संकट का बोझ उठा पड़ रहा है वहीं दूसरी निस्तारी के लिए लोगों परेशान होना पड़ रहा है।

तालाबों में पानी सूखने की वजह से लोगों को निस्तारी की समस्या हो रही है। सिंचाई विभाग द्वारा नहर में पानी छोड़ा गया है, लेकिन जिन गांवों में नहर की पानी नहीं पहुंच पा रही है वहां के लोगों को तालाबों में पानी कहां से भरेंगे। कई ऐसे गांव है जहां नहर नहीं गुजरी है तो वहां पानी भरने की सवाल ही नहीं पैदा होता। वहीं जिन गांवों में नहर निकली है वहां के सरपंच को तालाब को भरने के लिए यह कदम उठाना चाहिए,

लेकिन सरपंच इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। तालाबों में पानी नहीं होने से गांव के सरपंचों को कई बार बोला गया है, लेकिन सरपंच इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में कई गांव है जहां नहर में पानी छोड़े जाने के बावजूद तालाबों को भरने के लिए कदम नहीं उठा रहे है। गांव में मूलभूत की राशि से तालाबों को भरने के लिए उपयोग लाया जाना चाहिए। इस भीषण गर्मी में निस्तारी के लिए लोगों के पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं बचा है।

ऐसे में ग्रामीण अभी तो नहर में निस्तारी कर काम चला रहे है, लेकिन नहर बंद होने के बाद फिर निस्तारी की समस्या उत्पन्न होगी। गांव के सरपंचों को पानी भरने के लिए ठोस कार्रवाई सरपंचों को निर्देशित करना चाहिए। जिन गांवों में नहर नहीं पहुंची है वहां तालाबों के किनारे बोर खनन की मांग करते आ रहे है, लेकिन इस ओर शासन-प्रशासन ध्यान नहीं दे रही है। जबकि अप्रैल और मई में कई ऐसे गांव है जहां तालाब पूरी तरह से सूख गई है।