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कलेक्टर से लगाई गुहार, किया सवाल – प्रगतिशील किसानों के पुरस्कार की राशि को जमीन खा गई या फिर आसमान !

शासन द्वारा उन्नत क़ृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को हर वर्ष दिए जाने वाले पुरस्कार की राशि को जमीन खा गईं या फिर आसमान। इस मामले को लेकर सोमवार को जनदर्शन में जिले के प्रगतिशील किसानों (progressive farmers ) ने कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौपा है।

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कलेक्टर से लगाई गुहार, किया सवाल - प्रगतिशील  किसानों के पुरस्कार की राशि को जमीन खा गई या फिर आसमान !

कलेक्टोरेट पहुंचे किसान

जांजगीर/बहेराडीह. राज्य सरकार की ओर से पुरस्कार राशि घोषित की गई थी तो किसानों (progressive farmers ) के चेहरे खिल उठे थे लेकिन अब 9 माह बीत जाने के बाद भी पुरस्कार राशि इनके खातों में नहीं आई है। अधिकारी सही जवाब नहीं दे रहे हैं । ऐसे किसान परेशान हैं और वे अपनी पीड़ा लेकर कलेक्टर से मिले और उनसे सवाल पूछ लिया।

इस संबन्ध में स्व. कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव, साधना यादव और कमला कश्यप ने बताया कि आत्मा योजना अंतर्गत वर्ष 2020-21 में उन्नात कृषि पुरस्कार के लिए जिला स्तर पर सात किसानों (progressive farmers ) का चयन किया गया है। प्रत्येक किसान (progressive farmer) को 25-25 हजार रुपए की राशि और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाना है। इसी तरह ब्लॉक और राज्य स्तर पर भी चयनित किया गया है। ब्लॉक स्तर के सभी ब्लाकों के किसानों को 10-10 हजार रुपए और प्रशस्ति पत्र दिया जा चुका है।

मगर घोषणा के नौ महीने गुजर जाने के बाद भी जिला और राज्य स्तर पर प्रत्येक दस किसानों (progressive farmers ) को दी जाने वाली 50-50 हजार रुपए अभी तक नहीं मिला है। जबकि छत्तीसगढ़ के सभी जिले के जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार को 14 अप्रैल को बिलासपुर में आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेला में मुख्यमंत्री ( CM Bhupesh Baghel ) के हाथों से सम्मानित करने की बात कहते हुए कृषि विभाग के अधिकारी बाकायदा अपने साथ लेकर गए थे। मगर मुख्यमंत्री को किसानो को पुरस्कार राशि देने के लिए समय नहीं था, और वे चले गए। इससे नाराज छत्तीसगढ़ के सभी चयनित किसान सम्मान नहीं बल्कि घोर अपमान का सामना करते हुए वापस अपने घर लौटे थे। तब से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ के सभी अलग-अलग जिलों के जिला और राज्य स्तरीय पुरस्कार की राशि कहां गई। इसकी जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है।

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कलेक्टर ने डीडीए से ली मामले की जानकारी

मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा ने किसानों के सामने ही क़ृषि विभाग के डीडीए मानकर से फोन पर जानकारी लिया। जिस पर डीडीए ने कलेक्टर को एक लाईन में जवाब दिया कि चयनित किसानों (progressive farmers ) को पुरस्कार के लिए विभाग के पास इस समय बजट नहीं है। डीडीए की इस जवाब से किसान (progressive farmers ) असंतुष्ट नजर आए।

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26 जनवरी को ही किसानों का हो सम्मान

बड़ी संख्या में कलेक्टोरेट पहुंचे किसानों (progressive farmers ) ने कलेक्टर से मांग करते हुए कहा कि 26 जनवरी को ही सात किसानों (progressive farmers ) का पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मान किया जाए।