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भरभराकर गिरा डीएवी स्कूल का भवन, शुक्र है छुट्टी थी, नहीं तो बिछ जाती लाशें

DAV School: नगर के डीएवी स्कूल में फीस के नाम से अभिभावकों से लाखों रुपए वसूल रहे हैं लेकिन जर्जर भवन में क्लास लगा रहे हैं। अकलतरा स्थित डीएवी स्कूल की छत दो दिन पहले शनिवार को भरभराकर गिर गया। शुक्र है इस दौरान स्कूल की छुट्टी थी, नहीं तो कई बच्चों की जान चली जाती।

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बड़ा हादसा टला, शुक्र है छुट्टी थी, नहीं तो बिछ जाती लाशें

भरभराकर गिरा डीएवी स्कूल का भवन, शुक्र है छुट्टी थी, नहीं तो बिछ जाती लाशें

अकलतरा. अकलतरा डीएवी स्कूल में बड़ा हादसा टल गया। दो दिन पहले स्कूल भवन भराभरा गिर गया। सुखद पहलू यह रहा कि स्कूल की छुट्टी थी, नहीं तो कई बच्चे स्कूल प्रबंधन की कुप्रबंधन के शिकार हो जाते। फिलहाल स्कूल प्रबंधन ने स्कूल की अघोषित छुट्टी देकर भवन की मरम्मत कराने जुट गया है। अब ऐसे में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अकलतरा में ऊंची दुकान फीकी पकवान की तरह एक स्कूल संचालित हो रहा है।

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दो दिन पहले शनिवार को इस स्कूल की छत भरभराकर गिर गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुरानी बिल्डिंग की दो तीन कमरे जो अंग्रेज जमाने की थी वह पूरी तरह से गिर गया। शुक्र है कि उस वक्त क्लास नहीं लगी थी, नहीं तो कई बच्चे इस खंडहरनुमा बिल्डिंग के शिकार हो जाते। इसमें न केवल कई बच्चों की जान जाती बल्कि कई शिक्षकों को भी जान से हाथ धोना पड़ता। स्कूल बिल्डिंग गिरने के बाद प्रशासन हरकत में आया और भवन की मरम्मत के लिए कवायद शुरू कर दी है।

स्कूल में दिया छुट्टी
इन दिनों लंबी छुट्टी के बाद सोमवार को क्लास शुरू हुआ। इसके बाद डीएवी स्कूल की बिल्डिंग गिरने के बाद प्रबंधन ने स्कूल में अघोषित छुट्टी घोषित कर दिया है। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि परीक्षा के दिनों में उनका भविष्य भी अंधकारमय हो गया है।

पता था तो क्यों लगा रहे थे क्लास
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि स्कूल बिल्डिंग बहुत जर्जर हो चुकी थी। इसके बाद भी आखिर यहां क्लास क्यों लगा रहे थे। इस बात को प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि जर्जर भवन में क्लास लगा रहे थे, लेकिन इसे बहुत जल्द डिस्मेंटल करने की भी योजना थी। शायद उपर वाले को बच्चों की जान पर तरस आया, यही वजह है कि छुट्टी के दौरान स्कूल बिल्डिंग धंस गई।

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रसूखदारों की संस्था
नगर की यह संस्था रसूखदारों की है। स्कूल प्रबंधन का प्रत्येक सदस्य करोड़पति है। चाहते तो चुटकी में स्कूल बिल्डिंग तैयार कर सकते थे, लेकिन उन्हें बच्चों के भविष्य से कोई सरोकार नहीं था। बतौर फीस यहां लाखोंं रुपए वसूल की जाती है लेकिन सारी राशि प्रबंधन के बीच ही बंट जाती है। अधोसंरचना के पीछे ध्यान नहीं दिया जाता।

-स्कूल बिल्डिंग काफी जर्जर हो चुकी थी। उसका डिस्पेंटल कर नया भवन बनाने की योजना थी। शुक्र है छुट्टी का दौर था नहीं तो परेशानी बढ़ जाती। इस दौरान स्कूल की छुट्टी देकर भवन की मरम्मत कराई जा रही है। एसके पांडेय, प्राचार्य डीएवी स्कूल अकलतरा