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काला पत्थर का काला कारोबार, नकेल कसने पुलिस कोल तस्करों की खंगाल रही पुरानी फाइल

टीम ऐसे लोगों का पता लगा रही है कि ऐसे कितने कोल डिपो संचालक हैं जिनके खिलाफ एफआईआर दर्जन होने के बाद भी फरार हैं।

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काला पत्थर का काला कारोबार, नकेल कसने पुलिस कोल तस्करों की खंगाल रही पुरानी फाइल

काला पत्थर का काला कारोबार, नकेल कसने पुलिस कोल तस्करों की खंगाल रही पुरानी फाइल

जांजगीर-चांपा. मसनियाकला, जेठा, चांपा, सकरेली बाराद्वार सहित जिले के एक दर्जन से अधिक अवैध कोल डिपो के खिलाफ जांच के लिए जिले की पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। ऐसे कोल डिपो के कागजात खंगाले जाएंगे और जिनके पास कागजात नहीं है उनके खिलाफ चारसौबीसी की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि वर्ष 2014-15 में जिले के एक दर्जन कोल डिपो संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई थी। जिसमें तकरीबन आधा दर्जन कोल डिपो संचालकों के खिलाफ धारा 420 407, 411 के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस फिर अपने दूसरे राउंड में इसी तरह की कार्रवाई के मूड में है। क्योंकि चोरी छिपे कोयला का काला कारोबार फिर से संचालित हो रहा है। जिस पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने कोल तस्करों की पुरानी फाइल खंगाल रही है।

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हालांकि दर्जनों पेंडिंग फाइल जिले की एसआईटी ब्रांच के पास है। एसआईटी की टीम फाइल खंगाल रही है। यह टीम ऐसे लोगों का पता लगा रही है कि ऐसे कितने कोल डिपो संचालक हैं जिनके खिलाफ एफआईआर दर्जन होने के बाद भी फरार हैं। ऐसे लोगों को हिरासत में लेगी और उन्हें जेल दाखिल करेगी।

कोयले का अवैध कारोबार सक्ती क्षेत्र के मसनिया कला क्षेत्र में अधिक हो रहा है। क्योंकि कोरबा क्षेत्र से रातों रात कोयला सक्ती क्षेत्र के जंगलों में आता है। यहां से कोयला डंप किया जाता है। फिर इसके बाद यही कोयला औने-पौने दामों में खपाया जाता है। हालांकि एपी नीतु कमल ने जिले में ज्वाइन करते ही ऐसे दर्जनों कोल डिपो संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी। इसके बाद अवैध कोल डिपो संचालकों में हड़कंप मच गया था।

बीच में कार्रवाई धीमी हुई तो फिर से इस तरह का काला कारोबार संचालित होने की सूचना पुलिस को मिल रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2014.15 में मसनियाकला के पहाड़ी में कोयले की हेराफेरी की जा रही थी। वहीं बाराद्वार के जेठा में अवैध कोल डिपो संचालित हो रहा था।

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जेठा के कोल डिपो के संचालक सुनील शुक्ला सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ धारा 407, 411 के तहत जुर्म दर्ज किया गया था। वहीं, बाराद्वार क्षेत्र के जेठा में भी एक अवैध कोल डिपो संचालित हो रहा था। जिसमें पुलिस की टीम ने गणेश चंद्रा के कोल डिपो में छापामार कार्रवाई की थी। मौके पर उत्तम राठौर, जयभारत दास महंत, डिपो संचालक प्रदीप यादव के खिलाफ धारा 407, 411, 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बताया जा रहा है कि जांच में ऐसे कई प्रकरण अभी भी पेंडिंग है। जिसकी फाइल पुलिस खंगाल रही है।

नगरपालिका अध्यक्ष भी आए थे लपेटे में
चार साल पहले पुलिस ने सकरेली स्थिति एसएमजी यूनिक कोल डिपो में छापेमारी हुई थी। मौके पर बड़ी तादात पर अवैध कोयला जब्त किया था। पुलिस ने दो ट्रक से कोयला अनलोड करते दो लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले सक्ती के नगरपालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल भी लपेटे में आए थे।

हालांकि उनका कहना था कि वे अपना कोल डिपो किसी अन्य आदमी के पास बेच दिया था लेकिन नामांतरण नहीं हुआ था। यही वजह है कि पुलिस को श्याम सुंदर अग्रवाल के खिलाफ भी जुर्म दर्ज किया गया था। मामले में केस दर्ज होने के बाद श्याम सुंदर अग्रवाल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।

एक आरोपी कोरबा से गिरफ्तार
18 नवंबर 2014 को एसएमजी यूनिक कोल डिपो में कोयला के अफरा-तफरी की जानकारी मिलने पर पुलिस ने छापा मारा था। मौके पर बड़ी तादात में अवैध कोयला जब्त किया था। पुलिस ने कोल डिपो संचालक राजेश वर्मा एवं कोरबा निवासी नवनीत पलेरिया और अंशु पलेरिया के खिलाफ जुर्म दर्ज किया था। बताया जा रहा है कि राजेश वर्मा एवं राजेश पलेरिया को जमानत मिल गई थी, वहीं अंशु पलेरिया फरार था। कोरबा पुलिस ने अंशु पलेरिया को चार दिन पहले 25.27 आम्र्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था।

इन बिंदुओं पर होगी जांच
- कोल डिपो आखिर किसके नाम है
- संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं
- यदि एफआईआर दर्ज है तो गिरफ्तारी क्यों नहीं
- रसूखदार पर मेहरबानी क्यों
- यदि कोल डिपो नए नाम से है तो उस पर जुर्म दर्ज क्यों नहीं
- क्या रसूखदारों तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस
- क्या कोल डिपो संचालकों को दस्तावेज पूर्ण करने का मौका दे रही पुलिस

-कोल डिपो की पुरानी फाइल खंगाली जा रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद फरारी काट रहे आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी- विजय चौधरी, क्राइम ब्रांच प्रभारी