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लक्ष्मी जब घर आती है तो कांग्रेस का हाथ पकड़ कर नहीं आती, लक्ष्मी आती है तो कमल पर बैठकर आती है… इरानी ने और क्या कहा, पढि़ए पूरी खबर…

- केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का किया गुणगान -बोली, केंद्र की मोदी सरकार हर वर्ग के लिए किया काम

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लक्ष्मी जब घर आती है तो कांग्रेस का हाथ पकड़ कर नहीं आती, लक्ष्मी आती है तो कमल पर बैठकर आती है... इरानी ने और क्या कहा, पढि़ए पूरी खबर...

लक्ष्मी जब घर आती है तो कांग्रेस का हाथ पकड़ कर नहीं आती, लक्ष्मी आती है तो कमल पर बैठकर आती है... इरानी ने और क्या कहा, पढि़ए पूरी खबर...

जांजगीर-चांपा. केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी सोमवार की दोपहर एक बजे जांजगीर-चांपा विधानसभा क्षेत्र के चांपा में चुनावी सभा को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं को जोड़कर चुनाव प्रचार का शंखनाद करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार महिलाओं के लिए हो या किसानों के लिए व्यवसायियों के लिए हो या कन्याओं के लिए, हर वर्ग के लिए काम किया है। केंद्र की मोदी सरकार ने देश की प्रत्येक महिलाओं को उज्जवला योजना के माध्यम से स्वावलंबी बनाया है। कांग्रेस के शासन काल में महिलाएं एक ओर जहां चूल्हा फूंककर घर में खाना पकातीं थी आज उज्जवला योजना ने उन्हें समृद्ध बना दिया है और महिलाएं गैस चूल्हा से खाना बना रहीं हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। जहां प्रदेश के रमन सिंह सरकार ने और समृद्ध बनाते हुए घर-घर चावल वितरण कर चावल वाले बाबा बन गए हैं। जिसका कर्ज हमें 20 नवंबर को वोट में तब्दील कर चुकाना है।

स्मृति इरानी ने कहा कि सरकार बेटी-बचाओ बेटी-पढ़ाओ योजना की शुरूआत करते हुए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। बेटियां लक्ष्मी का रूप होती है। पहले बेटियों को पढ़ाना सपना था। जब बिटिया गरीब थी तो उसके हाथ पीला करना मुश्किल था। गरीब परिवार को संघर्ष से मुक्ति दिलाकर हमारी सरकार ने कन्या दान योजना के माध्यम से गरीब माता को समृद्ध बना दिया है।

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सरकार ने कन्यादान योजना शुरू कर प्रत्येक परिवार की बेटियों की हाथ पीले कर रही है। जिसका कर्ज हमें 20 नवंबर को कन्यादान का कर्ज चुकाना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का संस्कार होता है घर में रोटी एक हो तो परिजन को खिलाती है। त्योहार में भले ही अपने लिए नया कपड़ा न पहने लेकिन बच्चों को माता-पिता को अच्छे कपड़े मिले इसकी चिंता महिला करती है। रोजमर्रा की जिंदगी में दो वक्त की रोटी भी वहीं बनाती है और पकवान भी वहीं बनाती है। महिला समृद्धि के लिए केंद्र की सरकार ने कई योजनाएं संचालित कर रही है।

रमन सिंह के राज में कोई गरीब भूखा नहीं सोया है। आज किसान परिवार को कहते हुए हमें गर्व होता है कि भाजपा ने किसानों के फसल के संरक्षण के लिए एक लाख 36 हजार करोड़ के माध्यम से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 4 करोड़ से ज्यादा किसानों को पूरे राष्ट्र में दी गई। आज तो विधानसभा की बात करें और तुलना करें कि कांग्रेस की पिछली पांच साल की सरकार ने बजट का आवंटन था एक लाख करोड़ था। जिसे केंद्र की सरकार ने बढ़ाकर दो लाख 11 हजार करोड़ की ज्यादा की राशि कृषि उत्पादन के लिए मोदी के नेतृत्व में पूरे राष्ट्र को समर्पित किया है। इस राष्ट्र स्वायल हेल्थ कार्ड पहली बार 15 करोड़ किसानों स्वायल हेल्थ कार्ड दिलाने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है।

सरस्वती साइकिल योजना के सरस्वती का आशीर्वाद प्रयास किया जब बिटिया को पढ़ाना सपना था। महिला को यह सपना देखने की आजादी थी पति का परिवार का हाथ बांट सको, पापड़ आचार बनाती लेकिन बाजार नहीं था। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का इतिहास देख लीजिये, गरीब परिवार में उत्सव होता तो गरीब साहूकार के पास जाता था। पैसा मांगते वक्त बर्तन गिरवी रखते, आभूषण गिरवी रखते थे। मोदी ने मुद्रा योजना के तहत 50 से 10 लाख रुपए व्यवसाय करने के लिए मुद्रा योजना शुरू कर दी है। अब जेवर गिरवी रखना नहीं पड़ा और न ही घर गिरवी रखना पड़ा। गर्व की बात है मुद्रा योजना के तहत देश के एक करोड़ 80 हजार महिलाएं लोन लेकर समृद्ध हो चुकी हैं।

लक्ष्मी को घर लाना है तो कमल पर बटन दबाना है
हर नर के यहां नारायण विराजित होता है लक्ष्मी समृद्धि की कल्पना करते हैं। लक्ष्मी आती है तो कांग्रेस का हाथ पकड़ कर नहीं आती, लक्ष्मी आती है तो कमल पर बैठकर आती है। लक्ष्मी को घर लाना है तो कमल पर बटन दबाना है।

सैकड़ो महिलाओं ने किया भाजपा प्रवेश
इस दौरान कार्यक्रम के अंत में स्मृति इरानी के समक्ष भाजपा के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रवेश किया। कार्यक्रम में विधानसभा के सैकड़ों महिलाएं मौजूद रहीं। जिन्हें भाजपा का गमछा पहनाकर भाजपा प्रवेश कराया गया। जब भीड़ बढ़ गई तब स्मृति इरानी समय को देखते हुए चलती बनीं। कई कार्यकर्ताओं ने उन्हें बुके भी भेंट नहीं कर पाया। इसके चलते उनमें मायूसी देखी गई।

मीडिया से बनाई दूरी
कार्यक्रम के अंत में मीडियाकर्मी उनसे प्रेसवार्ता लेने वाले थे, लेकिन समय को ध्यान में रखकर उन्होंने प्रेसवार्ता लेने से मना दिया और चलते बने। जबकि उन्हें पहले ही आगाह कर दिया गया था कि दो मिनट के लिए मीडिया से चर्चा के लिए समय देना है, लेकिन उन्होंने समय नहीं निकाला।