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पूर्व विधायक के मद से बने चबूतरे की रंगाई पुताई करवारकर विभाग ने बता दिया वर्तमान विधायक का निर्माण, पढि़ए इस गोलमाल की पूरी दास्तान

कमीशन के लालच में किसी भी घटिया कार्य का सत्यापन

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कमीशन के लालच में किसी भी घटिया कार्य का सत्यापन

कमीशन के लालच में किसी भी घटिया कार्य का सत्यापन

जांजगीर-अकलतरा. आरईएस के इंजीनियर कमीशन के लालच में किसी भी घटिया कार्य का सत्यापन को करते ही थे, लेकिन अब उन्होंने शासकीय राशि की बंदरबाट करने की सारी हदें पार कर दी है।

इनके द्वारा अकलतरा विकासखंड अंतर्गत झलमला गांव में पूर्व विधायक सौरभ सिंह द्वारा स्वीकृत राशि से बने छतदार चबूतरा के नाम पर ही वर्तमान विधायक चुन्नीलाल साहू से भी विधायक निधि स्वीकृत करवा ली और उसके बाद इसी चबूतरे का रंग रोगन कर उसमें लगे पूर्व विधायक के सिलालेख को उखाड़कर उसकी जगह वर्तमान विधायक का सिलालेख लगा दिया। जब इस बारे में पत्रिकाकमीशन के लालच में किसी भी घटिया कार्य का सत्यापन ने खोजबीन शुरू की तो अधिकारियों ने फोन ही उठाना बंद कर दिया।


भवन निर्माण के नाम पर आरईएस विभाग द्वारा प्यापक गड़बड़ी की जा रही है। विधायक मद व छत्तीसगढ़ विकास प्रधिकरण की जो पुरानी बिल्डिंग है उसे नया बताकर लाखों की हेराफेरी की जा रही है। कुछ इसी तरह का मामला अकलतरा ब्लाक के झलमला में सामने आया है। जिसमें गांव में विभागीय अफसरों द्वारा विधायक मद से निर्मित छतदार चबूतरा निर्माण में लीपापोती की गई है। दरअसल पूर्व विधायक सौरभ सिंह द्वारा विधायक मद से छतदार चबूतरा के लिए दो लाख रुपए जारी की गई थी।

छतदार चबूतरा बन गया। सौरभ सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद मौजूदा विधायक चुन्नीलाल द्वारा भी उसी गांव में छतदार चबूतरा की घोषणा की गई। निर्माण एजेंसी आरईएस द्वारा नया छतदार चबूतरा निर्माण करने के बजाए पुराने भवन में नाम को विलोपित कर विधायक चुन्नीलाल लिख दिया गया है और राशि को ढकार लिया गया। इतना ही नहीं गांवों में चार लाख रुपए की लागत ता सामुदायिक भवन स्वीकृत करवाकर वहां भी यही किस्सा दोहराया जा रहा है।


चारसौबीसी का है मामला
आम आदमी रातों राम लखपति बनने के चक्कर में मोटी रकम के लिए चारबीसी करता है। अब विभागीय अफसरों की काली कमाई नहीं हो रही है तो चारसौबीसी करने आतुर हो रहे हैं। जबकि इस तरह का कृत्य कूट रचना यानी चारसौबीसी की श्रेणी में आता है। दिलचस्प बात यह है कि भवन निर्माण के लिए स्थान, जमीन के कागजात, बी-वन नक्शा, खसरा सहित सारे रिकार्ड की जरूरत पड़ती है। वहीं आरईएस के अफसर लाखों की राशि को ढकारने के लिए सारी हदें पार कर रहे हैं।


विधायक हो रहे बदनाम
भवन निर्माण को लेकर पूर्व विधायक व वर्तमान विधायकों में मन मुटाव बढ़ रहा है। क्योंकि जिस भवन को पूर्व विधायक सौरभ सिंह ने बनवाया है, बाकायदा भवन में उनका नाम दर्ज है।

अब उसी भवन में लिखे नाम को हटाकर वहां वर्तमान विधायक अपना नाम लिखवा दिया गया है। जबकि इस तरह के काले कारोबार में दोनों विधायकों को कोई जानकारी ही नहीं है। इसके पीछे आरईएस के अफसरों का नाम सामने आ रहा है। वर्तमान विधायक ने इस तरह के काले कारोबार की जानकारी लेने की बात कही है। वहीं पूर्व विधायक ने भी इस गंभीर मसले पर उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है।


आरईएस अफसर ने नहीं उठाया फोन
आरईएस अफसर को पत्रिका ने मंगलवार की दोपहर उनके मोबाइल नंबर 9424304506 में 10 बार फोन लगाया। ताकि उनके मातहत अफसरों की करतूतों से उन्हें अवगत करा सकें, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। कई बार उनके मोबाइल में पूरा रिंग गया, लेकिन उन्होंने फोन काट दिया। बाद में उन्होंने कॉल बैक भी नहीं किया।