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छत्तीसगढ़ के इस गांव में आज भी नहीं मुक्तिधाम, 75 साल बाद भी खुले आसमान के नीचे हो रहा अंतिम संस्कार

Kesla Village Muktidham: छत्तीसगढ़ के केसला गांव में आज भी अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम नहीं है। बरसात के मौसम में खुले आसमान के नीचे चिता जलाने की मजबूरी ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या को उजागर कर रही है।
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Chhattisgarh Muktidham

75 साल बाद भी बिना मुक्तिधाम का गांव (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Chhattisgarh News: जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम केसला में मुक्तिधाम के अभाव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के चलते अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। शनिवार को ग्राम केसला के खोलबहरा साहू पिता स्व. बट्टू लाल साहू के निधन के बाद एक बार फिर यह संवेदनशील समस्या सामने आई, जब परिजनों को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ा।

बरसात के मौसम में बारिश की आशंका के बीच चिता जलानी पड़ी। इससे शोकाकुल परिवार को अत्यंत कठिन परिस्थतियों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को सक्ती जिले के ग्राम सोंठी में ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई थी जो सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी थी। ठीक इसी तरह शनिवार को ग्राम केसला में देखने को मिला।

दरअसल, गांव में आज भी एक भी मुक्तिधाम नहीं है। आज भी ग्रामीण खुले में शव का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। इस संबंध में गांव की सरपंच अंबिका यादव ने बताया कि केसला में वर्षों से एक भी मुक्तिधाम नहीं है। बारिश के दिनों में खुले मैदान में शव अंतिम संस्कार करना न केवल कष्टदायक होता है, बल्कि कई बार जलभराव, तेज हवा और मौसम की मार के कारण चिता जलाने में भी बाधाएं आती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति मानवीय गरिमा के प्रतिकूल है और प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाती है।

मनरेगा से काम स्वीकृत पर पैसे सालों बाद

सरपंच ने बताया कि सरकार मनरेगा योजना के तहत मुक्तिधाम की अनुमति दे रही, लेकिन मनरेगा के पैसे दो साल में स्वीकृत होता है। उनका मानना है कि आज भी उनके गांव में हुए विकास कार्य जो मनरेगा योजना में हुए हैं उसमें १२ लाख रुपए सरपंच के पाकेट से घुस चुका है। इसके चलते वह फिर से मनरेगा से मुक्तिधाम बनाना नहीं चाहती। क्योंकि योजना में पूरे पैसे पाकेट से लगानी पड़ती है।

सुशासन तिहार में सौंपा ज्ञापन, अफसरों से मिन्नत फिर भी नहीं जागे

इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत सरपंच अम्बिका यादव द्वारा समय-समय पर संबंधित विभागों को लिखित आवेदन दिए जा चुकी हैं। हाल ही में गर्मी में सुशासन तिहार में अफसरों को ज्ञापन सौंपा था लेकिन कोई काम नहीं आई। कलेक्टर जनदर्शन एवं मुख्यमंत्री जनदर्शन रायपुर में भी ज्ञापन प्रस्तुत किया गया जा चुका है। बावजूद आज तक किसी भी स्तर से स्वीकृति या कार्रवाई का जवाब नहीं मिला है। क्या यही सरकार का सुशासन है।

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