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CG Impactful News : किसान को मिला ट्रैक्टर भाड़ा, जानें कहां दबी थी फाइल

- खुद दबाए बैठे थे बिल और जिपं सीईओ बोल रहे फरियादी कार्यालय गया ही नहीं

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CG Impactful News : किसान को मिला ट्रैक्टर भाड़ा, जानें कहां दबी थी फाइल

CG Impactful News : किसान को मिला ट्रैक्टर भाड़ा, जानें कहां दबी थी फाइल

जांजगीर. चांपा मोदी की सभा में भीड़ जुटाने के लिए ट्रैक्टर भाड़ा का बिल कहीं और नहीं बल्कि जिला पंचायत में ही दबी रह गई थी। जिला पंचायत सीईओ का कहना है कि फरियादी जनपद पंचायत कार्यालय शिकायत करने गया ही नहीं, जबकि जिला पंचायत सीईओ खुद गलती स्वीकार करते हुए 14 अगस्त को ही बिल में साइन करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में जिला पंचायत के अफसरों के कार्यप्रणाली में सवाल उठना स्वाभाविक है। मामला देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए भाड़े का बिल पेंडिंग का है।

गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माह भर पहले दुर्ग आए थे। तब उनकी सभा में भीड़ जुटाने के लिए पूरे छत्तीसगढ़ के अफसरों को जिम्मेदारी दी गई थी। जिसमें भीड़ जुटाने के लिए जांजगीर से भी ट्रैक्टर भरकर लोग दुर्ग गए थे। बम्हनीडीह जनपद सीईओ मुकेश रावटे भी कार्यक्रम में भीड़ जुटाने व शौचालय के डेमों की प्रदर्शनी के लिए बम्हनीडीह से एक ट्रैक्टर ले गए थे। टै्रक्टर बम्हनीडीह निवासी ओंकार प्रसाद का था। काम होने के बाद अब ट्रैक्टर मालिक ओंकार प्रसाद जनपद में ट्रैक्टर भाड़े का बिल 13 हजार तीन सौ रुपए जनपद सीईओ को दिया था।
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बिल जमा करने के बाद किसान ओंकार प्रसाद जनपद का चक्कर काटते थक गया, लेकिन उसके बिल का भुगतान नहीं हो रहा था। मामले की सूचना जिला पंचायत को भी दी गई थी। इतना ही नहीं इस आशय की खबर पत्रिका में 15 अगस्त 2018 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। खबर प्रकाशन के बाद जिला पंचायत सीईओ तिलमिला उठे और उनका कहना था कि किसान कभी जनपद का चक्कर काटा ही नहीं। जबकि उन्होंने कुछ देर बाद खुद कहा कि 14 तारीख को ही पेंडिंग बिलों का भुगतान किया गया है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऊंची कुर्सी में बैठे अफसर बिना सोचे समझे लोगों को किस कदर बुद्धू बनाते हैं, जबकि उन्हें खुद पता नहीं रहता कि कौन सी फाइल कहां पड़ी है और किस फाइल में दस्तखत हुआ है या नहीं।

फरियादी जनपद कार्यालय कब गया इसकी जानकारी नहीं है। बिल जिला पंचायत में पेंडिंग थी, कल ही साइन हुआ है- अजीत वसंत, सीईओ जिला पंचायत