
Chhattisgarh farmers (Patrika Creative Image)
CG News: खरीफ सीजन 2025-26 में जिले में पंजीकृत 1 लाख 26 हजार 43 किसानों में से 1 लाख 18 हजार 927 किसानों ने ही समर्थन मूल्य पर धान बेचा है। 7116 किसानों ने धान नहीं बेचा। इसके चलते लिकिंग के जरिए सेवा सहकारी समितियों के जरिए किसानों को बांटा गया 164 करोड़ रुपए के ऋण में से 158 करोड़ रुपए की ही ऋण वसूली हुई है। साढ़े 6 करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण की वसूली नहीं हो सकी।
इन किसानों से अब नगद में ऋण वसूली की जाएगी। 31 मार्च तक किसान ऋण जमा कर सकते हैं। इस तिथि के बाद ऋण जमा नहीं होने की स्थिति में किसानों को फिर लिए गए कर्ज पर सालाना ब्याज जुड़ता जाएगा। वहीं अगले साल समितियों से कर्ज भी नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं दो साल तक कर्ज जमा नहीं करने की स्थिति में किसान डिफाल्टर की श्रेणी में डाल दिए जाएंगे। नोडल अधिकारी अमित साहू के मुताबिक, लिकिंग से 96 प्रतिशत ऋण वसूली हो गई है। हर साल 95 से 96 प्रतिशत ही लिकिंग से ऋण आता है। बाद में मार्च अंतिम तक 99 प्रतिशत वसूली हो जाती है।
ग्राम किरीत के किसान देवलाल साहू ने बताया कि अंतिम तक रकबा संशोधन नहीं हुआ। इसके चलते धान नहीं बिका और अब समिति का 60 हजार रुपए का कर्ज बच गया है। इसी तरह खोखरा के किसान परमेश्वर सूर्यवंशी की माने तो रकबा संशोधन के लिए चक्कर लगाते-लगाते थक गया लेकिन रकबा नहीं सुधर पाया। इसके चलते धान नहीं बिका। समिति का 50 हजार रुपए कर्ज जमा नहीं हो पाया। इसी तरह अश्वनी तिवारी केरा पर 1.50 लाख का ऋण है। 600 बोरी धान बिका ही नहीं। नीलकुमार गौतम रसौटा पर 1.75 लाख रुपए कर्ज हो गया है।
खेती-किसानी के लिए किसानों को जिला सहकारी बैंकों के जरिए जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर खाद-बीज और नगद के रूप में ऋण बांटा जाता है। बाद में जब किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचता है, तो कर्ज की राशि पहली काट ली जाती है और उसके बाद धान का शेष पैसा किसानों को दिया जाता है। जिले में इस बार 164 करोड़ का ऋण सहकारी बैंकों से बांटा गया था। लेकिन कर्ज लेने के बाद भी 7 हजार किसानों ने धान नहीं बेचा है। इसके चलते 6.60 करोड़ रुपए ऋण की वसूली नहीं हो सकी।
ग्राम कर्रा में धान नहीं बेच पाने से बड़ी संख्या में किसान 6 फरवरी से केंद्र के सामने धरने पर ही बैठे हुए थे लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में बुधवार को किसानों ने केंद्र से धान उठाव के लिए आए ट्रक को रोक दिया। इससे हंगामा शुरू हो गया। बाद में पुलिस के द्वारा जबरन पंडाल को निकलवा दिया और किसानों को थाना ले आएं।
Updated on:
21 Feb 2026 03:07 pm
Published on:
21 Feb 2026 03:06 pm
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