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झमाझम बारिश से खिल उठे किसानों के चेहरे, फटाफट शुरू किया बोआई का काम

सुबह से बारिश का दौर चलता रहा
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जांजगीर चंपा

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Shiv Singh

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Updated: 28 Jun 2018, 8:59 PM IST

सुबह से बारिश का दौर चलता रहा

सुबह से बारिश का दौर चलता रहा

जांजगीर-चांपा. गुरुवार को सुबह से जिले में झमाझम बारिश हुई। इससे अंचल तर बतर हो गया। लगातार हो रही बारिश से एक ओर लोग घरों से निकल नहीं पाए तो वहीं किसानों के चेहेर खिल उठे। इस दिनों खेती किसानी का दौर पूरे सबाब पर है। किसानों को समय के अनुकूल बारिश का पानी मिलने से खुशी का आलम है। वे खुर्रा बोनी के अलावा लेई पद्धति से बोनी शुरू कर दिए है।


इस बार समय पर पर्याप्त बारिश होने से किसानों का कारोबार समय पर हो रहा है। हर रोज की तरह गुरुवार को भी अच्छी बारिश हुई। सुबह से बारिश का दौर चलता रहा। दिन भर झड़ी लगी है। रुक-रुककर दिन भर बारिश हो रही है। जिससे मौसम खुशनुमा हो गया है। लोगों को गर्मी से निजाम मिल गया। वहीं दिन भर बारिश से व्यवसायी वर्ग के लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी हुई।

क्योंकि उनका कारोबार नहीं चल सका। बारिश से दिन भर बिजली भी गुल होती रही। बिजली नहीं होने से बिजली से चलित व्यवसाय ठप रहा। वहीं ग्रामीण अंचलों में अब तक बिजली गुल है। बिजली नहीं होने से लोगों को कई तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ा।


वहीं एक सप्ताह से जारी मानसूनी बारिश ने उदास बैठे किसानों को व्यस्त कर दिया है। अंचल में इन दिनों खेत जोताई के साथ बोआई के काम में तेजी आई है। ज्यादातर खेतों में हरियाली अब लौटने लगी है। बारिश से सूखे पड़े खेतों में बोआई के लिए पर्याप्त पानी भर दिया है। इससे रोपाई व बोआई दोनों कार्यों में तेजी आ गई है।
वर्तमाने दौर में सिंचाई साधन वाले किसानों की रोपाई व खुर्रा बोनी करने वाले किसानों की खेत जोताई के साथ बोआई का कार्य में तेजी आई है।

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किसानों के अनुसार अंचल में लगभग ५0 फीसदी बोआई का काम पूरा हो चुका है, जबकि रोपा लगाने का कार्य भी जारी है। वहीं बारिश को देखते हुए अंचल में ट्रेक्टरों सहित कृषि यंत्रों व मजदूरों की डिमांड बढ़ गई है। कृषि के क्षेत्र में विगत पांच-छह से वर्षों से भारी बदलाव आया है। किसान जहां जोताई, रोपाई, बोआई में ट्रैक्टर सहित सीड ड्रिल व अन्य यंत्रों का उपयोग को महत्व देने लगे हंै,

वहीं कटाई में हार्वेस्टर व थ्रेसर को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसके साथ ही नांगर जैसे अनेक पारंपरिक कृषि यंत्रों का अब अपेक्षाकृत उपयोग कम होने लगा है। खोखरा के कृषक पुसनलाल, राम किसन व अन्य ने बताया कि हल से जहां जोताई में समय अधिक लगता है,

वहीं हल सहित मजदूरी भी बढ़ गई है, जबकि ट्रैक्टर से जोताई व मताई जैसे अन्य कार्य में समय की बचत होती है। दस-बारह दिन विलंब से आए मानसून के शुरूआत में किसान जहां चिंतित थे, वहीं एक सप्ताह की बारिश ने किसानों को व्यस्त कर दिया है।

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